सुगम लोक परिवहन सेवा के संचालन में हो रही देरी

परिवहन सेवा
  • सरकार की मंशा पर पानी फेर रहे परिवहन विभाग के अफसर

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनकी सरकार की मंशा है कि प्रदेश में जल्द ही सरकारी बस सड़कों पर दौड़े। इसके लिए सरकार जल्द ही राज्य परिवहन निगम की तर्ज पर नए सिरे से बस सेवा प्रारंभ करने वाली है। नए साल में प्रदेश की जनता को यह सौगात मिलने वाली है। बता दें कि इसका नया नाम सुगम लोक परिवहन सेवा होगा जो पीपीपी मॉडल पर संचालित होगी। लेकिन परिवहन विभाग के अधिकारियों की लापरवाही और भर्राशाही के कारण सुगम लोक परिवहन सेवा के संचालन में लगातार देरी हो रही है।
जानकारी अनुसार प्रदेश के मुखिया डॉ. मोहन यादव ने सुगम लोक परिवहन सेवा के जरिए मप्र में सरकारी बसों की वापसी करने जा रहे हैं। सेवा चालू होने के बाद दूरस्थ्य गांव तक तक सस्ती और लग्जरी यात्रा की सुविधा मिल सकेगी। कैबिनेट में इस प्रस्ताव को पहले ही मंजूरी दी जा चुकी है। सरकार ने इसके लिए 101 करोड़ की अंशपूंजी को बजट को स्वीकृति दी है। बता दें कि मप्र में सीएम सुगम लोक परिवहन सेवा के तहत बस स्टेंड, टर्मिनल और अन्य इन्फास्ट्रक्चर का निर्माण पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर किया जाएगा। बस संचालन और संधारण भी पारदर्शी प्रक्रिया के तहत निजी बस ऑपरेटर्स के माध्यम से किया जाएगा। हालांकि इन सब पर पूरा नियंत्रण सरकारी कंपनी का रहेगा। वर्तमान स्थिति को देखते हुए सरकार की लोक परिवहन सेवा में महिला, छात्र और बुजुर्गों को किराये में मिलने वाली रियायत के लिए अभी और इंतजार करना होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि लोक परिवहन की बसों को सड़क पर उतरने में लगने वाला समय लगातार बढ़ता ही जा रहा है। जब तक ये बसें शुरू नहीं हो जाती, तब तक उक्त वर्गों को किराये में रियायत का लाभ नहीं मिलेगा।
इसलिए हो रही देरी
लोक परिवहन सेवा में देरी की जो वजह बताई जा रही है उसके अनुसार, इंदौर-उज्जैन में रूटों का चयन तो पूरा हुआ, लेकिन बाकी संभागों में यह काम पिछड़ा है। बसों के संचालन के लिए बनाई राज्य स्तरीय होल्डिंग कंपनी में मैनपावर की कमी है। बसों के संचालन के लिए सड़क परिवहन की जमीन और संपत्ति वापस चाहिए, जो विभाग नहीं ले पा रहा है। राज्य स्तरीय होल्डिंग कंपनी के अलावा 7 संभागीय कंपनियों को भी अस्तित्व में लोभा है, ये शहरों में बस चलाने वाली कंपनियों ही होंगी, लेकिन काम भी अधूरा है। बसों को चलाने के लिए जो सिस्टम बनाया जाना है, उसमें कई स्तर पर कमियां है। परिवहन विभाग खुद ही मैनपावर और अनुभवी अधिकारियों की कमी से जूझ रहा है।  निजी व आउटसोर्स कंपनियों के कामों की निगरानी ठीक से नहीं हो पा रही है। बसों को जमीन पर उतारने का काम परिवहन सचिव मनीष सिंह के पास है। सरकार ने कामों को विकेंद्रीकृत नहीं किया। एक अफसर के कारण सभी मोर्चों पर तेजी से काम नहीं हो पा रहा है।
लोक परिवहन सेवा निजी हाथों में
बता दें, अभी प्रदेश में बस सेवा निजी हाथों में है। यह हाल सड़क परिवहन निगम के 20 साल पहले बंद होने के कारण बनी। जिसके कारण लोक परिवहन सेवा पर पूरा कब्जा निजी ऑपरेटरों का है। ये ज्यादातर रूटों पर मनमानी कर रहे हैं, जिस पर सरकार का सीधा प्रभावी नियंत्रण नहीं है। इन सभी बातों को देखते हुए मोहन सरकार ने लोक परिवहन सेवा को बदले हुए स्वरूप में जमीन पर उतारने का रोडमैप बनाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश है कि ये बसें जल्द से जल्द उतारी जाए, लेकिन परिवहन विभाग के अफसर उस मंशा के अनुरूप काम नहीं कर पा रहे हैं। इसलिए प्रयासों के बावजूद लोक परिवहन से अनुबंधित बसें सड़कों पर नहीं उतर पाई हैं। 

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