जल जीवन मिशन: राशि नहीं मिलने से बढ़ा आर्थिक बोझ

आर्थिक बोझ
  • मप्र ने केंद्र सरकार से मांगे आठ हजार करोड़ रुपये

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्य प्रदेश में हर घर नल से जल पहुंचाने के लिए जल जीवन मिशन के अंतर्गत 23 हजार योजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इन पर काम भी प्रारंभ हो गया है लेकिन केंद्र सरकार से राशि नहीं मिल रही है। इसके कारण राज्य पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है। प्रदेश सरकार ने आगामी आम बजट में जल जीवन मिशन के लिए आठ हजार करोड़ रुपये देने की मांग की है। दरअसल, आठ परिष्कजनाओं को पुनरीक्षित करना पड़ा है, जिससे योजना लागत में वृद्धि हुई है। इसका भार भी राज्य के बजट पर पड़ा है क्योंकि केंद्र सरकार ने बढ़ी हुई लागत देने से मना कर दिया है। प्रदेश में जल जीवन मिशन के अंतर्गत 20,765 करोड़ रुपये की 27,990 एकल ग्राम नल जल और 60,786 करोड़ रुपये लागत की 148 समूह जल प्रदाय योजनाएं स्वीकृत हैं। 15,947 ग्रामों की एकल नल-जल योजनाएं पूरी हो चुकी हैं और 12,043 योजनाओं पर काम चल रहा है। 8,358 योजनाओं का पुनरीक्षण किया गया क्योंकि सात लाख ग्रामीण परिवार इससे वंचित हो रहे थे। इससे परियोजना लागत 6,213 करोड़ 76 लाख रुपये से बढक़र 9,026 करोड़ 97 लाख रुपये हो गई। केंद्र सरकार ने बढ़ी हुई लागत देने से मना कर दिया, इसलिए 2,813 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार राज्य सरकार को उठाना पड़ा। वहीं, केंद्रांश भी दो साल से पूरा नहीं मिला। चूंकि, परियोजना पर काम प्रारंभ हो चुका है और 2028 तक इसे पूरा करना है इसलिए राशि की आवश्यकता है। यदि यह नहीं मिलती है तो राज्य का बजट गड़बड़ा जाएगा। प्रगतिरत कार्यों की आवश्यकता को देखते हुए जारी अग्रिम राशि के संबंध में प्रदेश को प्राप्ति योग्य केंद्रांश वर्ष 2024-25 का 4,370 करोड़ रुपये और 2025-26 का 3,750 करोड़ रुपये उपलब्ध कराया जाए।

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