कटे एक-एक वोट का… आकलन करेगी पार्टी

  • एसआईआर के बाद ड्राफ्ट वोटर लिस्ट ने बढ़ाई भाजपा का टेंशन
  • गौरव चौहान
एसआईआर

मप्र में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया ने भाजपा के लिए परेशानी पैदा कर दी है। शहरी क्षेत्रों बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम कटे हैं। इससे भाजपा का सिरदर्द बढ़ गया है। शहरी वोटरों के नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से कटने के बाद भाजपा अलर्ट हो गई है। पार्टी ने निर्णय लिया है कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में कटे एक-एक नाम का आकलन किया जाएगा। पार्टी की रणनीति है कि दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया के जरिए कटे हुए नाम दोबारा जुड़वाने पर फोकस किया है। इसके लिए हर विधानसभा और प्रत्येक बूथ का सर्वे कराया गया है। जिन बूथों और विधानसभा क्षेत्रों में सबसे ज्यादा मतदाताओं के नाम कटे हैं, वहां कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया जा रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में जिन 66 सीटों पर भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था, उन पर भी अलग से समीक्षा की गई है। इन सीटों पर एसआईआर के दौरान 20 से 22 हजार तक मतदाताओं के नाम कटने की जानकारी सामने आई है। संगठन का मानना है कि यदि समय रहते स्थिति नहीं संभाली गई, तो इसका सीधा असर आगामी चुनावी परिणामों पर पड़ सकता है।
गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में मतदाता सूची के शुद्धीकरण के लिए 22 वर्षों बाद कराए गए एसआईआर ने सत्तारूढ़ भाजपा की चिंता बढ़ा दी है। इस प्रक्रिया में प्रदेशभर में 42 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम कट जाने से पार्टी के चुनावी गणित पर असर पडऩे की आशंका जताई जा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार राज्य की लगभग हर विधानसभा में औसतन हजारों तक मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, जो कई सीटों पर जीत-हार के अंतर से भी ज्यादा हैं। भाजपा के भीतर इसे अगले विधानसभा चुनाव के लिहाज से गंभीर संकेत माना जा रहा है। प्रदेश में अनेक विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां पिछला चुनाव बेहद कम अंतर से जीता या हारा गया था। ऐसे में बड़ी संख्या में नाम कटने से उन सीटों पर समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं। इसी कारण पार्टी संगठन ने एसआईआर को लेकर अब सख्त रुख अपनाया है।
संगठन की कार्यप्रणाली पर सवाल
दरअसल, एसआईआर को लेकर भाजपा ने शुरुआती दौर में व्यापक घर-घर संपर्क अभियान चलाया था। कार्यकर्ताओं को मतदाताओं के फॉर्म भरवाने से लेकर उन्हें जमा कराने तक की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। पार्टी का दावा था कि बूथ स्तर तक निगरानी रखी जा रही है। इसके बावजूद इतने बड़े पैमाने पर नाम कटने से संगठन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। इसी को लेकर एक दिन पहले भाजपा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह, संगठन महामंत्री हितानंद ने एसआईआर की समीक्षा बैठक की। बैठक में विधायकों की भूमिका को लेकर नाराजगी भी सामने आई। बताया गया कि कई विधायकों ने एसआईआर को गंभीरता से नहीं लिया, जिससे उनके क्षेत्रों में मतदाताओं के नाम बड़ी संख्या में कट गए। संगठन ने इसे लापरवाही मानते हुए अब रोजाना समीक्षा का निर्णय लिया है। भाजपा ने निर्देश दिए हैं कि अब ब्लॉक, जिला और प्रदेश स्तर पर प्रतिदिन वर्चुअल समीक्षा की जाएगी। इन बैठकों में यह आकलन किया जाएगा कि किस विधानसभा और किस बूथ पर बेहतर काम हो रहा है और कहां सुधार की जरूरत है। जिन क्षेत्रों में ज्यादा नाम कटे हैं, वहां विशेष निगरानी रखी जाएगी। पार्टी ने अब रणनीति बदलते हुए दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया के जरिए कटे हुए नाम दोबारा जुड़वाने पर फोकस किया है। इसके लिए हर विधानसभा और प्रत्येक बूथ का सर्वे कराया गया है। जिन बूथों और विधानसभा क्षेत्रों में सबसे ज्यादा मतदाताओं के नाम कटे हैं, वहां कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया जा रहा है।
ऐसे मतदाताओं से संपर्क कर उनके नाम पुन: जुड़वाने के लिए आवश्यक फॉर्म भरवाए जा रहे हैं। इस संबंध में सभी विधायकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में व्यक्तिगत रुचि लें। विधानसभावार प्रगति की समीक्षा भी की जाएगी। निर्वाचन आयोग के कार्यक्रके अनुसार एसआईआर की प्रक्रिया 22 जनवरी तक चलेगी, जबकि अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 14 फरवरी को किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि एसआईआर के दौरान मतदाताओं के नाम जुड़वाने के लिए भाजपा ने बाकायदा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण भी दिया था। इसके लिए प्रदेश स्तर पर कार्यशालाओं का आयोजन किया गया। भाजपा प्रदेश कार्यालय में राष्ट्रीय सह-संगठन मंत्री शिवप्रकाश और प्रदेश संगठन महामंत्री हेमंत खंडेलवाल ने बैठक लेकर एसआईआर की बारीकियां समझाई थीं। पाटी ने बूथ स्तर पर अपनी ओर से बीएलओ जैसे कार्यकर्ता भी नियुक्त किए थे।
मंत्रियों की सीट से 8 लाख मतदाता कटे
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट का आकलन करने पर यह तथ्य सामने आया है कि मंत्रियों की सीट पर 8 लाख मतदाता के नाम कटे हैं। एसआईआर में सबसे ज्यादा मतदाताओं के नाम भोपाल की गोविन्दपुरा विधानसभा सीट से काटे गए हैं। यह सीट विधायक और मोहन सरकार की मंत्री कृष्णा गौर का क्षेत्र है। यहां से 97,052 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जो प्रदेश की सभी 230 विधानसभा सीटों में सबसे ज्यादा हैं। दूसरे नंबर पर इंदौर-5 विधानसभा सीट है, जहां से विधायक महेंद्र हार्डिया के क्षेत्र में 87,591 मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। सबसे कम नाम नर्मदापुरम जिले की सोहागपुर विधानसभा सीट से कटे हैं। यहां एसआईआर की ड्राफ्ट सूची में 6,034 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। एसआईआर की प्रारूप मतदाता सूची सामने आने के बाद  मोहन सरकार के पांच मंत्रियों के क्षेत्रों से 50 हजार से अधिक मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। इसमें भोपाल की गोविन्दपुरा और नरेला, इंदौर की इंदौर-1 और इंदौर-5, ग्वालियर जिले की ग्वालियर और ग्वालियर दक्षिण विधानसभा सीटें शामिल हैं। इंदौर-5 सीट इस सूची में दूसरे नंबर पर है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उज्जैन दक्षिण विधानसभा सीट से 37,728 मतदाताओं के नाम अलग-अलग कारणों से हटाए गए हैं। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के मुरैना जिले की दिमनी सीट से 13,920 मतदाताओं के नाम कटे हैं। कांग्रेस विधायक और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की गंधवानी सीट से 14,712 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। इसी तरह अटेर विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे के क्षेत्र में 17,505 मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। पूर्व मंत्रियों के क्षेत्रों का विश्लेषण करने पर सामने आया कि महेंद्र हार्डिया के इंदौर-5 क्षेत्र से सबसे अधिक 87,591 नाम कटे हैं। जबलपुर पूर्व से विधायक और पूर्व मंत्री लखन घनघोरिया के क्षेत्र से 49,215 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की छिंदवाड़ा सीट से 21,981 मतदाताओं के नाम एसआईआर में काटे गए हैं।

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