
- संगठन की हिदायत बयानबाजी से बचे
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। विवादों में फंसे मप्र के दो मंत्रियों ने प्रदेश भाजपा मुख्यालय पहुंचकर सफाई दी। सूत्रों का कहना है कि दोनों मंत्रियों को संगठन ने हिदायत दी कि बेवजह बयानबाजी से बचे। गौरतलब है कि इंदौर में दूषित पानी की घटना के बाद नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और उनकी राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी गुरुवार को भाजपा मुख्यालय में खामोश नजर आयी। हालांकि विजयवर्गीय ने आधे घंटे से ज्यादा संगठन महामंत्री हितानंद से अकेले में चर्चा की। सूत्रों का कहना है कि शीर्ष नेतृत्व ने इन दोनों नेताओं को फिलहाल किसी भी तरह की बयानवाजी से बचने की सलाह दी है।
गौरतलब है कि इंदौर में दूषित पानी की वजह से जहां नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय विपक्ष के निशाने पर है, तो वहीं अपने भाई की गांजा तस्करी में गिरफ्तारी की वजह से राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी भी चर्चा में रही है। इन दोनों मंत्रियों को प्रदेश से लेकर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व द्वारा खामोश रहने को कहा गया है। संगठन के निर्देश का असर गुरुवार को भाजपा के प्रदेश दफ्तर में देखने को उस वक्त मिला, जब दोनों मंत्री कार्यकर्ताओं की समस्याओं का निराकरण करने के लिए पार्टी मुख्यालय पहुंचे थे। कार्यकर्ताओं से मिलने से पहले विजयवर्गीय ने संगठन महामंत्री हितानंद ने अकेले में तकरीबन आधा घंटे तक चर्चा की। सूत्र इन मुलाकात को इंदौर घटना से जोडकऱ देख रहे है। कहा जा रहा है कि दिल्ली में नेतृत्व ने विजयवर्गीय के बयान और घटना को लेकर नाराजगी जताई है और उन्हें फिलहाल किसी भी मुद्दे पर कोई भी बयान नहीं देने को कहा है। कहा जा रहा है कि विजयवर्गीय ने दिल्ली में वरिष्ठ नेताओं के साथ उनकी मुलाकात के बारे में हितानंद को अवगत कराया है।
कोई बड़ा कदम उठा सकती है पार्टी
इधर सूत्रों का कहना है कि पार्टी इंदौर मामले पर कोई बड़ा कदम ले सकती है, जिस पर खरमास खत्म होने के बाद निर्णय लिया जा सकता है। जानकारों का कहना है कि दरअसल इंदौर की घटना से पार्टी और सरकार की छवि खराब हुई है। इसे लेकर जल्द ही पहले भोपाल और बाद में दिल्ली में संगठन की बड़ी बैठक संभावित है, जिसमें इसे डैमेज की किस तरह से भरपाई की जाए, इसे लेकर मंथन किया जाएगा। इसी बैठक में प्रदेश सरकार के संभावित फेरबदल या विस्तार को लेकर भी निर्णय होंगे, तो भाजपा की राष्ट्रीय टीम में मध्यप्रदेश के प्रतिनिधित्व पर भी चर्चा की जाएगी। सूत्रों का कहना है कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने प्रदेश संगठन से राज्य सरकार के उन मंत्रियों की जानकारी मांगी है, जिनके बयान, कार्यप्रणाली और उनसे जुड़े मुद्दों की वजह से पार्टी और राज्य सरकार की छवि खराब हुई है। कहा जा रहा है कि दिल्ली नेतृत्व इस रिपोर्ट के आधार पर ही निर्णय लेगी कि उसे मध्यप्रदेश में संगठन और सरकार स्तर पर किस तरह का बदलाव किया जाना है। वहीं असम चुनाव के लिए पार्टी ने मध्यप्रदेश के 11 बड़े नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी है। इनमें से अधिकांश नेता प्रदेश संगठन से लेकर राज्य की राजनीति में अहम भूमिका निभाते आ रहे है। इनमें से कुछ ये नेता भी शामिल है, जो पिछले कई महीनों से बड़े निगम मंडलो के पदों के लिए भोपाल से लेकर नागपुर और दिल्ली तक फेरी लगा रहे है।
