सरकार के दावे और जमीनी हकीकत में पूरी तरह विफल

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  • कांग्रेस ने इंदौर में दूषित जल की घटना के बाद लगाया आरोप…

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इंदौर में दूषित जल की घटना के बाद हुए वाटर आडिट के निष्कर्षों के हवाले से आरोप लगाया कि इसने स्वच्छता के दावे की हवा निकाल दी है। भागीरथपुरा से लेकर इंदौर के कई इलाकों में नलों से दूषित, बदबूदार और सीवेज मिला पानी आ रहा है, जो इस बात का प्रमाण है कि यह किसी एक क्षेत्र की समस्या नहीं, पूरे शहरी प्रशासन की विफलता है। सिंघार ने दूषित जल मामले के बाद गत सात जनवरी को इंदौर के कई क्षेत्रों में हुए वाटर आडिट के निष्कर्ष सार्वजनिक करते हुए कहा कि भाजपा सरकार के स्वच्छता के दावे और जमीनी हकीकत अलग-अलग है। आडिट मदीनां नगर, खजराना, भूरी टेकरी, बर्फानी धाम, कृष्णा बाग और कनाडिया क्षेत्र में कराया गया। यह भागीरथपुरा से पांच से 18 किलोमीटर दूर हैं। इन्हीं क्षेत्र में गरीब और मजदूर वर्ग रहता है। मदीना नगर में नियमित बिल के बावजूद गंदे पानी की आपूर्ति, शिकायतों के बाद भी निगम व जनप्रतिनिधि नदारद रहे। खजराना में नर्मदा जल में तेज बदबू और प्रदूषण, पानी पीने योग्य नहीं, भूरी टेकरी में पानी दूषित, भारी गंदगी और जलभराव, कृष्णा बाग गटर के पास से गुजरती पेयजल पाइपलाइन, सीवेज मिलावट, बर्फानी धाम में दूषित पानी की आपूर्ति, अव्यवस्थित जल वितरण और कनाडिया क्षेत्र में पानी की गुणवत्ता बेहद खराब पाई गई। जगह-जगह गंदगी, कचरे के ढेर, कीचड़ और नाले खुले हैं। सडक़ें गड्ढों, टूटे फुटपाथों और अधूरे निर्माण कार्यों से भरी हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव से मांग की पूरे प्रदेश में वाटर आडिट कराया जाए। इसके साथ ही आमजन और जनप्रतिनिधियों श्री अपने-अपने क्षेत्र में वाटा आडिट करें ताकि सच्चाई सामने आ सके क्योंकि वाटर आडिट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इंदौर का जल संकट कोई अपवाद नहीं, बल्कि भाजपा सरकार कार के शहरी शासन माडल की असफलता है।
एडीबी से मिली राशि का क्या हुआ
उधर, कांग्रेस के मीडिया और पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा ने इंदौर की घटना को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर को कवर करने के लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) ने 2003 में 200 मिलियन डालर का कर्ज दिया था, उस राशि का क्या हुआ? इंदौर में जो दूषित पानी से मौतें हुई, उन मामलों में वाटर सैंपल और प्रभावित नागरिकों के स्टूल सैंपल की जांच हुई या नहीं? अगर जांच की गई तो उसमें हैजा का बैक्टीरिया मिला या नहीं? अगर हैजा के बैक्टीरिया की पुष्टि हुई है, तो क्या इन मामलों को एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम के अंतर्गत अधिसूचित किया गया है कि नहीं? क्या हैजा से संबंधित मामलों की सूचना राज्य सरकार द्वारा, केंद्र सरकार को दी गई? अगर दी गई तो दोनों के बीच की बातचीत को सार्वजनिक किया जाए।

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