इस साल पुलिस ने खोज निकाली 13774 गुमशुदा बालिकाएं

  • ऑपरेशन मुस्कान से घट गए 1460 लंबित केस, अभियान का दिखाई दिया असर

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
एक तरफ तो पुलिस रिकार्ड में चोरी, मारपीट, बलात्कार जैसे मामलों की संख्या बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ गुमशुदा बालिकाओं के लंबित मामलों की संख्या में कमी आई है। पीएचक्यू की महिला अपराध शाखा से मिली जानकारी के अनुसार इस साल पुलिस ने प्रदेश भर में अभियान चलाकर कुल 13774 बालिकाओं को भी खोड निकाला इनमें लगभग 2000 मामले पिछले सालों के हैं। इनमें से कई बालिकाओं की पुलिस ने एमपी के अलग अलग स्थानों के अलावा अन्य राज्यों से भी जाकर दस्तयाब (खीजा) किया है। इस साल ऑपरेशन मुस्कान के नाम से पुलिस ने प्रदेश से गुम हो रही बालिकाओं को खोजने और उनकी संख्या में कमी लाने के लिए कवायद शुरू की थी।
2017 में झाबुआ जिले के राणापुर बस स्टैंड से एक बालिका गायब हो गई थी। थी। परिजनों परिजनों ने हर दरवाजे पर पर जाकर गुहार लगाई लेकिन नतीजा शून्य रहा। पुलिस ने किसी अनहोनी की आशंका से 20 हजार का इनाम भी घोषित किया, लेकिन कोई जानकारी नहीं लगी गुमशुदगी की ये फाइल सालों तक धूल खाती रही लेकिन 2025 में ऑपरेशन मुस्कान के जरिए इस केस को रीओपन किया गया। इसके बाद बालिका को गुजरात के गोधरा से सुरक्षित लाकर उसके परिजनों को सौंपा गया। इसी साल मई माह में सीधी जिले के थाना जमोड़ी में एक बेटी रहस्यमय ढंग से घर से लापता हो गई वह रात को रात भोजन के बाद सोने गई थी, लेकिन सुबह उठने पर घर में नहीं मिली। इस केस में पुलिस ने सीसीटीवी सर्विलांस और लोकेशन ट्रैकिंग के जरिए पता लगाया तो बालिका की लोकेशन सिंगरौली में मिली। वहां से बालिका को लेकर परिजनों को सौंपा गया।
पिछले दो सालों से बढ़ रही थी गुमशुदगी
प्रदेश में 2022 तक गुम होने वाली बालिकाओं की संख्या 10 हजार से कम थी लेकिन 2023 के बाद से इनके आंकड़ों में लगातार इजाफा हुआ है। 2023 में 11250, 2024 में 11907 और 2025 में 12314 बालिकाओं के गुम होने की रिपोर्ट पुलिस थानों में दर्ज कराई गई। पिछले तीन सालों से लगातार गुम हो रही बालिकाओं की संख्या में इजाफे के बाद राज्य सरकार ने इन्हें खोज निकालने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश पुलिस को दिए थे। इसके बाद ऑपरेशन मुस्कान के जरिए पुलिस ने इन खोई हुई बालिकाओं की सकुशल घर वापसी पर फोकस किया और 2025 में लंबित मामलों की संख्या घटकर केवल 2541 रह गई।

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