भोपाल की सडक़ों पर फिर लगने लगा भिखारियों का डेरा

  • फरवरी के बाद फिर तेज होगी कार्रवाई…

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान 3 फरवरी 2025 को शुरू हुआ भिक्षावृत्ति उन्मूलन अभियान कागजों में सिमट कर रह गया है। अभियान की शुरुआत के दौरान कलेक्टर भोपाल कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने जिले के सभी एसडीएम को टीमें बनाकर अपने इलाकों में कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इस दौरान पुलिस विभाग के सीसीटीवी कैमरों से निगरानी करने की भी बात कही गई थी। साथ ही भिक्षा देना और भिक्षा लेना दोनों को अपराध बताते हुए कार्रवाई करने की बात कही गई थी, लेकिन एक साल बाद भी शहर की सडक़ों पर भिक्षुके डेरा डाले हुए हैं। वहीं जिम्मेदारों का तर्क है कि एसआईआर के तहत अभियान धीमा जरूर हुआ है, लेकिन काम चल रहा है। फरवरी में मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद एक बार फिर सडक़ों पर उतरकर भिक्षुकों को रोजगार से जोडऩे का काम किया जाएगा। दूसरी ओर ट्रैफिक सिग्नलों पर आम भी भिक्षुक वाहनों के रुकते ही ड्राइवर व सवारियों के पास जाकर भिक्षा मागते हैं। कई बार सिग्नले के रेड हो जाने के बाद भी वाहनों के सामने से नहीं हटते। जिसके चलते उस वाहन चालक के साथ पीछे खड़े अन्य वाहनों के चालक भी परेशान होते हैं। बता दें कि शहर के रोशनपुरा, माता मंदिर, ज्योति सिनेमा, बोर्ड आफिस, भोपाल टॉकीज, नादरा बस स्टैंड, अल्पना तिराहा, चूना भट्टी सहित अन्य चौराहों पर वाहनों को देखते ही भिक्षुक दौड़ पड़ते हैं। वाहन के आगे के कांच पर कपड़ा मारकर भिक्षा मांगते हैं। यदि लोग भिक्षा नहीं देते हैं, तो उनके साथ बदसलूकी भी की जाती है।
इंदौर के एनजीओ को मिला काम
जिला प्रशासन द्वारा भिक्षावृत्ति उन्मूलन कार्यक्रम के तहत भिक्षुक गृह आश्रय स्थल के संचालन के लिए 6 जुलाई को विज्ञापन जारी किया गया था। विज्ञापन में स्वयं सेवी संस्थाओं से 15 जुलाई तक प्रस्ताव मांगे गए थे ताकि आश्रय स्थल का संचालन किया जा सके, लेकिन अधिकारियों का तर्क है इंदौर के एनजीओ को आश्रय स्थल संचालन का काम दिया गया है, लेकिन दूसरी ओर कोलार स्थित आश्रय स्थल पर एक भी भिक्षुक मौजूद नहीं है। योजना कागजों में ही सिमटती दिख रही है।
16 अक्टूबर को हुई अंतिम कार्रवाई: शहर में भिक्षावृत्ति उन्मूलन के लिए आखिरी कार्रवाई एसडीएम एमपी नगर एलके खरे ने एसीपी मनीष भारद्वाज के साथ 16 अक्टूबर को की थी। इस दौरान व्यापम चौराहे पर राजस्थान से आए भिक्षुकों पर दबिश देते हुए उन्हें राजस्थान लौटाया गया था। सडक़ पर भिक्षा मांग रही महिलाओं को भी समझाइश देकर घर भेजा गया था। इसके पहले फरवरी माह में कुछ एनजीओ संचालाकों की सूचना पर बोर्ड आफिस, न्यू मार्केट व अन्य इलाकों में लोगों पर कार्रवाई की गई, लेकिन उसी दिन लोगों को छोड़ भी दिया गया।
खाली पड़ा है कोलार स्थित भिक्षुक गृह
अभियान की ढिलाई के चलते कोलार स्थित भिक्षुक गृह भी पूरी तरह खाली पड़ा हुआ है। यहां के स्टाफ के अनुसार भिक्षुक कुछ समय तो यहां रहे, लेकिन मौका देखते ही गायब हो गए। दरअसल भिक्षुक गृह को भिखारियों को भिक्षावृत्ति छुड़वाकर रोजगार के अन्य साधनों से जोड़ने के लिए बनाया गया था। लेकिन साल भर में एक भी भिखारी को भिक्षावृत्ति से बाहर नहीं निकाला जा सका। आखिर में केवल दो या तीन भिक्षुक यहां जीवन यापन कर रहे थे। नवंबर के बाद से वे भी यहां से गायब हो गए हैं स्माइल योजना के तहत राजधानी भोपाल में भिक्षावृत्ति उन्मूलन कार्यक्रम का संचालन किया जाना है, जिसके तहत एक एनजीओ का चयन किया गया है। इस एनजीओ ने इंदौर में बेहतर काम किया है। जिस कारण भोपाल का काम भी इसी एनजीओ को दिया गया है।

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