- जल शक्ति मंत्रालय के सर्वे में सामने आई मप्र की हकीकत
- गौरव चौहान

इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में सरकारी पानी की सप्लाई से फैली गंभीर बीमारी ने 16 लोगों की जान ले ली है। इस हादसे के बाद से पूरे शहर में मातम का माहौल है। नर्मदा लाइन से सप्लाई हो रहे पानी की जांच में मल-मूत्र जनित पेसाब और जानलेवा बैक्टीरिया मिलने की पुष्टि हुई है। केवल इंदौर ही नहीं बल्कि भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन सहित प्रदेश के लगभग हर शहर में लोग दूषित पानी पी रहे हैं। इसका खुलासा हाल ही में आई जल शक्ति मंत्रालय की रिपोर्ट में भी हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, मप्र के बड़े शहरों की अपेक्षा छोटे शहरों में शुद्ध पानी मिल रहा है।
भागीरथपुरा से लिए गए पानी के सैंपल की जांच में फीकल कॉलीफॉर्म, ई कोलाई और क्लेस बेला जैसे खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए हैं। ये बैक्टीरिया उल्टी, दस्त और आंतों से जुड़ी गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं। जानकारी के मुताबिक कुछ सैंपल में विब्रियो कोलेरी जैसे तत्व भी मिले हैं, जो हैजा की बीमारी में पाए जाते हैं। यह प्रशासनिक लापरवाही का भी प्रमाण है। इंदौर ही नहीं भोपाल, ग्वालियर जैसे शहरों में भी 100 फीसदी घरों को पीने योग्य पानी नहीं मिल रहा है। यह खुलासा मप्र में घरों तक सप्लाई किए जा रहे पानी की गुणवत्ता को लेकर जिला-वार रिपोर्ट में सामने आई है। कुछ जिलों में जहां सभी घरों में पीने योग्य पानी उपलब्ध है, वहीं कई जिलों में यह आंकड़ा शून्य प्रतिशत तक दर्ज किया गया है। मप्र में ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति की स्थिति भी असमान बनी हुई है। ताजा आंकड़ों के अनुसार कई जिलों में जहां 55 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन से अधिक पानी उपलब्ध है, वहीं कुछ जिलों में बड़ी आबादी को अब भी 40 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन से कम पानी पर निर्भर रहना पड़ रहा है। छिंदवाड़ा की स्थिति इस मामले में सबसे ज्यादा खराब है। यहां 48 फीसदी आबादी को 40 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन से कम पानी पर निर्भर रहना पड़ रहा है। इसके अलावा देवास, धार, दतिया, बुरहानपुर में भी बड़ी आबादी को अपर्याप्त जल आपूर्ति का सामना करना पड़ रहा है।
कुछ जिलों में पीने योग्य पानी नहीं
भारत सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग जल शक्ति मंत्रालय द्वारा सर्वे कराने के बाद जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के कुछ जिले तो ऐसे हैं, जिनको पीने योग्य पानी मिल ही नहीं रहा है। रिपोर्ट में उल्लेख है कि कई जिलों में निर्धारित शेड्यूल के अनुसार नियमित जल आपूर्ति नहीं हो पा रही है, जिससे पीने योग्य पानी की उपलब्धता प्रभावित हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जहां जल गुणवत्ता और उपलब्धता कमजोर है, वहां शुद्धिकरण संयंत्र, पाइपलाइन सुधार, स्रोत संरक्षण और नियमित आपूर्ति पर तत्काल ध्यान देना जरूरी है, ताकि हर परिवार को सुरक्षित पेयजल मिल सके। रिपोर्ट के मुताबिक भोपाल, जबलपुर सहित प्रदेश के अन्य शहरों में फीने योग्य पानी की उपलब्धता में सुधार की जरूरत है। भोपाल (56.9 फीसदी), भिंड (56.6 फीसदी), जबलपुर (54.3 फीसदी), दतिया (52.1 फीसदी), सागर (58.3 फीसदी), देवास (58.5 फीसदी), नीवारी (59.9 फीसदी) और छतरपुर (60.1 फीसदी) जैसे जिलों में आधे से थोड़ा अधिक घरों तक ही पीने योग्य पानी पहुंच पा रहा है। वहीं रिपोर्ट में अनूपपुर, डिंडोरी, पन्ना, रीवा और उमरिया में 0 फीसदी घरों में पीने योग्य पानी उपलब्ध होना सबसे चौंकाने वाला तथ्य है। इसके अलावा ग्वालियर (20.9 फीसदी), अशोकनगर (21.9 फीसदी), मुरैना (25.2 फीसदी) दमोह (33.5 फीसदी), इंदौर (33.0 फीसदी), खंडवा (35.2 फीसदी), उज्जैन (35.3 फीसदी) और शिवपुरी (36.4 फीसदी) में भी स्थिति बेहद कमजोर बताई गई है।
यहां की स्थिति बेहतर
रिपोर्ट के अनुसार आलीराजपुर, बड़वानी, झाबुआ, नरसिंहपुर और सीधी में 100 प्रतिशत घरों में पीने योग्य पानी उपलब्ध बताया गया है। यह इन जिलों की जल आपूर्ति व्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है। वहीं अनूपपुर, डिंडोरी, पन्ना, रीवा और उमरिया में किसी भी घर को पीने योग्य पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। मप्र में पेयजल उपलब्धता के मामले में भी स्थिति असमान है। पीने योग्य पानी के मामले में प्रदेश के कुछ जिलों की स्थिति बेहतर है। इनमें हरदा (93.8 फीसदी), नीमच (93.6 फीसदी), बालाघाट (91.7 फीसदी), कटनी (89.3 फीसदी), खरगोन (89 फीसदी), रायसेन (73.9 फीसदी), रतलाम (82.6 फीसदी), सीहोर (82.6 फीसदी), विदिशा (80.7 फीसदी) और गुना (79.9 फीसदी) में भी बड़ी आबादी को पीने योग्य पानी उपलब्ध हो रहा है।
गटर का पानी पी रहे लोगे
राजधानी भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर में कई इलाके ऐसे हैं, जहां दूषित पेयजल सप्लाई किया जा रहा है। यहां तक कि सीवेज की गंदगी पेयजल पाइपलाइनों में बेधडक़ पहुंच रही है। भोपाल नगर निगम के जोनल कार्यालय 2 स्थित वाजपेयी नगर में बनी मल्टियों में पिछले 15 दिन से पीने के पानी में सीवेज की गंदगी मिलकर आ रही है। परेशान लोगों ने इसकी शिकायत पार्षद से लेकर जोनल अधिकारी तक से की है। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। जबलपुर नगर निगम की बदहाल पेयजल आपूर्ति व्यवस्था ने शहर के नागरिकों की चिंता भी बढ़ा दी है। क्योंकि शहर में करीब 80 प्रतिशत पेयजल आपूर्ति लाइन नाला-नालियों के नीचे से होकर गुजर रही हैं। जिससे जबलपुर में भी इंदौर जैसे हालात बनने की संभावनाओं को बल मिल रहा है। पानी की डिस्ट्रीब्यूशन लाइन की उम्र वैसे तो 20 साल होती है परंतु अधिकांश लाइनों को 40 से 50 वर्ष तक हो चुके हैं। ग्वालियर में गोल पहाडिय़ा से तिघरा रोड पर पानी की मुख्य लाइन तक सीवर चेंबर के अंदर से होकर निकल रही है। यह स्थिति तब है जब बीते वर्ष जून में अर्जुन नगर में 20 दिन गंदे पानी की सप्लाई से 50 घरों में सीवर युक्त पानी पहुंचा और 10 लोगों को हॉस्पिटल में भर्ती कराना पड़ा था। उज्जैन धार्मिक नगरी उज्जैन के वार्ड क्रमांक 34 स्थित जयसिंहपुरा क्षेत्र के भगत सिंह मार्ग पर नगर निगम और पीएचई विभाग की लापरवाही के चलते हालात गंभीर बने हुए हैं। बीते दो माह से क्षेत्र के रहवासी नलों से आ रहे नाली जैसे काले और दूषित पानी को पीने को मजबूर हैं। इससे करीब 265 परिवारों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग अब तक मूकदर्शक बने हुए हैं।
