एमपी-सीजी अफसरों का कार्यकाल महज तीन से चार महीने का

एमपी-सीजी अफसरों
  • एक साल में चार पीसीसीआईटी बदले, अब भी अतिरिक्त प्रभार से चल रहा विभाग

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। देश को 33 हजार करोड़ रुपये आयकर से अधिक का राजस्व देने वाला मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ सर्किल इन दिनों प्रशासनिक अस्थिरता से जूझ रहा है। आयकर विभाग के सबसे बड़े इनकम अधिकारी, प्रिंसिपल चीफ कमिश्नर टैक्स (पीसीसीआईटी) के पद पर यहां लंबे समय से स्थायी नियुक्ति नहीं हो पा रही है। हालात यह हैं कि बीते एक साल में चार अधिकारी इस पद पर आए और कुछ ही महीनों में रिटायर होकर चले गए। फिलहाल व्यवस्था अतिरिक्त प्रभार के सहारे चल रही है।
ठप पड़ी योजनाएं-
भोपाल स्थित एमपी-सीजी सर्किल में तैनात किए गए पीसीसीआईटी अधिकारियों का कार्यकाल महज तीन से चार महीने का रहा। इतना कम समय मिलने के कारण न तो कोई अधिकारी राजस्व बढ़ाने की ठोस रणनीति बना सका और न ही रिकवरी से जुड़े बड़े फैसले अमल में आ सके। बुधवार को पीसीसीआईटी ललित कृष्ण दहिया भी रिटायर हो गए। वे सितंबर में मुंबई से प्रमोट होकर भोपाल आए थे और 31 दिसंबर को सेवा निवृत्त हो गए।
टैक्स कलेक्शन और रिकवरी पर असर
स्थायी नेतृत्व के अभाव का सीधा असर टैक्स कलेक्शन और रिकवरी पर पड़ रहा है। हर नए अधिकारी को स्थानीय व्यवस्था समझने में ही समय लग जाता है और जब तक योजनाएं आकार लेती हैं, तब तक उनका कार्यकाल समाप्त हो जाता है। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले महीने भोपाल को स्थायी पीसीसीआईटी मिल जाएगा, जिससे व्यवस्था को स्थिरता मिल सके।
अब जयपुर से संभाला जा रहा अतिरिक्त प्रभार
ललित कृष्ण दहिया के रिटायरमेंट के बाद वित्त मंत्रालय ने राजस्थान सर्किल के पीसीसीआईटी सुमीत कुमार को एमपी-सीजी सर्किल का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है। यानी फिलहाल भोपाल में आयकर विभाग का शीर्ष पद प्रभारी व्यवस्था के भरोसे है। अधिकारियों का मानना है कि स्थायी पदस्थापना न होने से निर्णय प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
रिकवरी और कलेक्शन पर असर
विभाग में स्थायी अधिकारी न होने का असर उसके कामकाज पर होता है। आयकर विभाग का मूल काम टैक्स कलेक्शन और रिकवरी का है। इन हालातों में जो भी अफसर यहां आता है उसे स्थानीय कार्यप्रणाली को समझने और प्लानिंग बनाने में ही एक माह का समय बीत जाता है। इसके बाद जब तक रेवेन्यू के साथ रिकवरी बढ़ाने के प्रयास शुरू होते हैं, तब तक अफसर रिटायर हो जाता है। रेवेन्यू कलेक्शन और रिकवरी में इजाफे की सारी कोशिशें वापस ठंडे बस्ते में चली जाती हैं।
2025 में ऐसे बदली पीसीसीआईटी की कुर्सी
वर्ष 2025 की शुरुआत में 1 जनवरी को पुरुषोत्तम त्रिपुरी पीसीसीआईटी बने, जो मार्च में रिटायर हो गए। इसके बाद अप्रैल में नवरतन सोनी की नियुक्ति हुई, वे जुलाई में सेवानिवृत्त हुए। जुलाई से अगस्त तक यूपी सर्किल की अपर्णा करण को अतिरिक्त प्रभार दिया गया। सितंबर में ललित कृष्ण दहिया आए और चार महीने में ही रिटायर हो गए। अब एमपी सीजी सर्किल में आयकर विभाग का सबसे बड़ा पद फिर से अतिरिक्त प्रभार में चला गया है। उम्मीद है कि अगले माह तक भोपाल में पीसीसीआईटी के नए नाम का ऐलान कर दिया जाएगा।

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