देश के बेस्ट परफॉर्मिंग राज्यों में मप्र शामिल

बेस्ट परफॉर्मिंग राज्यों
  • मप्र में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की रैंकिंग में जबरदस्त सुधार

    भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। वर्ष 2025 में मप्र ने कई क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां दर्ज की हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में किए गए प्रशासनिक और डिजिटल सुधारों ने प्रदेश को निवेश के लिए भरोसेमंद राज्य के रूप में स्थापित किया है।  प्रदेश में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ाने के लिए छोटे अपराधों को अपराध मुक्त करने और दंड को युक्तिसंगत बनाने के मामले में मप्र देश के बेस्ट परफॉर्मिंग राज्यों में शामिल हो गया है। मप्र ने देश में हरियाणा के साथ दूसरा स्थान हासिल किया है। जबकि त्रिपुरा, ओडिशा और उत्तरप्रदेश संयुक्त रूप से पहले स्थान पर रहे।
    गौरतलब है कि मोहन सरकार ने मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस के सिद्धांत पर चलते हुए व्यापार और निवेश प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर विशेष जोर दिया। समग्र सुधारों, डिजिटल पहलों और निवेशक-अनुकूल नीतियों के चलते मप्र ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में तेज प्रगति की। डिजिटल सिस्टम, पारदर्शी प्रक्रियाएं और बड़े पैमाने पर सुधारों ने प्रदेश को देश के सबसे निवेशक-अनुकूल राज्यों में शामिल कर दिया है। मप्र में पिछले एक में जनविश्वात अधिनियम के माध्यम से 24 कानूनों में संशोधन कर कारावास या जुर्माना के स्थान पर शास्ति या पेनाल्टी लगाने के प्रावधान किए गए हैं। हालांकि कुछ मामलों में पेनाल्टी कई गुना बढ़ा दी गई है। अब यह मामले कोर्ट में भी नहीं जाएंगे, प्रशासनिक स्तर पर पेनाल्टी लगाकर इन्हें सुलझा लिया जाएगा। इसी प्रकार वर्तमान समय में अपनी प्रासंगिकता खो चुके चार कानूनों को राज्य सरकार ने खत्म कर दिया है।
    जनविश्वास विधेयक 2026 पर काम कर रही
    अब सरकार जनविश्वास विधेयक 2026 पर काम कर रही है। इसके तहत मुख्यत- शिक्षा, पर्यावरण और जमीन संबंधी कानूनों के सरलीकरण पर काम किया जाएगा। इससे प्रदेश में और ज्यादा निवेश बढऩे की संभावना है। पहले चरण में दिसंबर 2024 में सरकार ने 5 विभागों औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन, सहकारिता, श्रम, ऊर्जा और नगरीय विकास एवं आवास विभाग के तहत 8 कानूनों की 64 धाराओं में संशोधन किया। दूसरे चरण में अगस्त 2025 में आठ विभागों के 16 कानूनों में संशोधन कर जुर्माने की बजाय पेनाल्टी के प्रावधान किए गए। हालांकि इसे 10 गुना तक बढ़ा दिया गया। इसके साथ सरकार ने चार कानून मप्र कपास (सांख्यिकी) अधिनियम 1947, मप्र कपास नियंत्रण अधिनियम 1954, मध्य भारत कृषि उपज तौल विनियमन अधिनियम 1956 और मप्र चेचक टीका अधि. 1968 शामिल हैं।
    30 प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर काम
    केन्द्र के निर्देशानुसार अब्र सरकार 7 सेक्टर के 30 प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर काम कर रही है। इनमें केन्द्र ने शिक्षा से जुड़े पांच क्षेत्र, यूटिलिटी और परमिशन्स के पांच, जमीन संबंधी तीन, बिल्डिंग एंड कंस्ट्रक्शन के दो, पर्यावरण संबंधी दो, श्रम का एक, सरकार की व्यापक प्राथमिकताएं, सरकार के लिए ऐच्छिक सात प्राथमिकताएं तय करने के लिए भी कहा है। इससे संबंधित एक बैठक भी सीएस ने करते हुए अफसरों को निर्देश दिए हैं। इसके तहत प्रमुख संशोधन किए गए हैं। जिसके तहत सहकारिता सोसायटी अधिनियम में सदस्यों की अनियमितताओं के लिए अब 25 हजार तक की पेनाल्टी का प्रावधान है। यह केस कोर्ट में नहीं जाएंगे। पहले 50 हजार रूपए तक जुर्माना था। नगर पालिक निगम अधिनियम में किसी ने नाली या सडक़ को क्षतिग्रस्त किया या फिर निजी भूमि पर मार्ग के लिए चूने की लाइन डालकर प्लाटिंग की जाती है तो अर्थदंड पांच सौ के स्थान पर पांच हजार रुपए लगेगा। नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम से वह धारा हटाई गई जिसके तहत किसी भूमि या भवन में अधिकारी को रोकने पर 3 महीने तक कारावास की सजा थी। मप्र नगर पालिक निगम अधिनियम में भवन अनुज्ञा से इतर निर्माण या अतिक्रमण वाले भवन स्वामियों पर जुर्माना नहीं अब 5 हजार तक पेनाल्टी। मप्र आयुर्वेदिक यूनानी तथा प्राकृतिक चिकित्सा व्यवसायी अधिनियम के उल्लंघन पर पहली बार 50 हजार इसके बाद 1 लाख तक पेनाल्टी। पहले 5 हजार थी। मप्र एग्रीकल्चर वेयरहाउस एक्ट का उल्लंघन करने पर पहले केवल 3 साल के कारावास की सजा अब 3 लाख की पेनाल्टी में बदला गया।

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