कंपनियों की गलती का ठीकरा फूट रहा उपभोक्ताओं पर

  • बिजली चोरी और लाइन लॉस कम करने में मप्र नाकाम
  • गौरव चौहान
कंपनियों की गलती

 मप्र में बिजली चोरी और लाइन लॉस ऐसी समस्या बन गया है, जिससे निपटने में बिजली कंपनियां नाकाम हो रही हैं। करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी बिजली कंपनी के अफसर लाइन लॉस रोकने में नाकाम साबित हुए हैं। इसकी भरपाई के लिए ही हर साल बिजली की दरें बढ़ाकर उपभोक्ताओं पर भार डाला जा रहा है। गौरतलब है कि मप्र में नियामक आयोग ने बिजली कंपनियों को बिजली चोरी और लाइन लॉस रोकने का कई बार निर्देश दिया है। वहीं सरकार ने इसके लिए कई योजनाएं चलाई है, कई सक्ष्त कदम भी उठाए हैं। इसके बाद भी हालात में सुधार नहीं हुआ है।
गौरतलब है कि मप्र सरकार ने बिजली चोरी, केबल चोरी और बिजली कर्मचारियों पर हमलों की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रही है। प्रदेश में पहली बार बिजली थाने खोले जा रहे हैं। पहले चरण में इंदौर, उज्जैन, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर और रीवा में ये थाने शुरू होंगे। यहां तैनात पुलिस टीम मौके पर जाकर औचक निरीक्षण करेगी, एफआईआर दर्ज करेगी और केस डायरी भी तैयार करेगी। ये थाने गुजरात के मॉडल पर बनाए जाएंगे। हाल ही में प्रदेश के ऊर्जा मंत्री और बिजली कंपनी के प्रतिनिधि मंडल ने गुजरात जाकर वहां की व्यवस्था का निरीक्षण किया था। अब सवाल उठ रहा है कि क्या इससे बिजली चोरी कम हो पाएगी।
अभी तक के सारे प्रयास विफल
मप्र में बिजली चोरी और बिजली लॉस को कम करने और रोकने के लिए सरकार ने अभी तक जो प्रयास किए हैं वे सारे विफल रहे हैं। जानकारी के अनुसार, केंद्र और राज्य सरकार ने मध्य, पूर्व व पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनियों को 11 सालों में 2.41 लाख करोड़ रुपए बिजली चोरी और लाइन लॉस रोकने को दी। तब भी जिम्मेदार अफसर इतनी बड़ी राशि से बिजली व्यवस्थाओं को हाईटेक नहीं कर पाए। नतीजा एग्रीगेट टेक्नीकल और कमर्शियल लॉस (एटी एंड सी लॉस) बढ़ता ही जा रहा है। कटौती, ट्रिपिंग जैसी घटनाएं रुकी नहीं। बदमाश सिस्टम तोडकऱ चोरी कर रहे हैं। इस कारण कंपनियां इस नुकसान की भरपाई हर साल टैरिफ बढ़ा कर रही हैं। इसका सीधा असर प्रदेश के 1.75 करोड़ आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। इन कंपनियों ने इस बार भी नुकसान का ठीकरा उपभोक्ताओं पर फोडऩे की तैयारी है। विद्युत नियामक आयोग ने बिजली कंपनियों की मंशानुसार, नुकसान को आधार बनाते हुए टैरिफ की दरों में 10.2 प्रतिशत तक बढ़ाने की पेशकस की है।
योजनाएं अधर में
मप्र में बिजली चोरी और लाइन लॉस को रोकने के लिए सरकार ने कई योजनाएं बनाई है। लेकिन अधिकांश असर में है। इसी में से एक है दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना। इस योजना का उद्देश्य किसानों को दिन में भी बिजली सप्लाई और अन्य उपभोक्ताओं को 24 घंटे  बिजली मिल सके। साथ ही बिजली की गुणवत्ता और विश्वसनीयता बढ़े। इस योजना के तहत सभी अविद्युतीकृत गांवों और घरों तक बिजली कनेक्शन देना था। कृषि और गैर-कृषि उपभोक्ताओं के लिए अलग-अलग बिजली फीडर बनाना था। सब-स्टेशन, ट्रांसफार्मर, फीडर और उपभोक्ताओं की मीटरिंग सहित ग्रामीण वितरण नेटवर्क को मजबूत करना था।  लेकिन योजना में आधे-अधूरे काम हुए। टोले-मजरे बिजली से आज भी छूटे हुए हैं। उपभोक्ताओं को आज भी औसत खपत के बिल दिए जा रहे हैं, क्योंकि इनके घरों में मीटर नहीं लगाए। ऐसी ही स्थिति  आइपीडीएस की भी है। इस योजना के तहत शहरी क्षेत्रों में बिजली के सब-ट्रांसमिशन, वितरण नेटवर्क, ट्रांसफार्मर, फीडर और मीटरिंग, आइटी सक्षम बनाना, जीआइएस मैपिंग, सरकारी इमारतों पर सौर पैनल लगाकर ग्रीन और रिन्युएबल एनर्जी प्रमोट करना था। इस योजना का  उद्देश्य विद्युत हानियों को कम करना और बिजली की गुणवत्ता सुधारना था।  लेकिन कई सरकारी इमारतों तक सोलर पैनल भी नहीं पहुंचे। वहीं शहरों में ये काम पूरे नहीं हुए। बिजली के तार खुले हैं। स्मार्ट मीटर में सिस्टम उलझा है। काम रेकॉर्ड पीछे हैं। जीआईएस मैपिंग पिछड़ी है। इसी तरह एसएसटीडी योजना भी प्रभावी नहीं रही। इसके तहत नई बिजली लाइनें बिछा कर मजबूत बिजली सप्लाई व्यवस्था बनाना, ट्रांसफार्मर की क्षमता बढ़ाना, नए ग्रिड बनाना, बिजली वितरण में होने वाले नुकसान (लॉस) को कम करना, जन शिकायतों और सुविधाओं के मद्देनजर संसाधन को विकसित करना है ताकि बिना रुकावट सप्लाई जारी रहे। इस योजना को उद्देश्य बिजली वितरण प्रणाली को मजबूत बनाना है। इसी योजना के तहत बिजली कंपनियां हर साल 1050 करोड रुपए का लोन लेती हैं, जिसकी गारंटी सरकार देती है। इस योजना के तहत हर साल राशि मिल रही, लेकिन जिन लक्ष्यों के लिए दी जा रही है, वे लक्ष्य पूरे नहीं हो रहे। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में सप्लाई को लेकर समस्या बनी हुई है।

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