- 6 किमी बफर से सटे मार्ग पर बनेगा 610 मीटर का अंडर पास

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
भोपाल के रतनपुर सड़क से लेकर फंदा कलां तक वेस्टर्न बायपास के नए रूट को मंजूरी मिल गई है। उसका अलाइनमेंट अब बदला गया है, ताकि पेड़ों की कटाई कम करना पड़े। 41 किलोमीटर लंबे इस बायपास से इंदौर-भोपाल की दूरी भी लगभग 21 किलोमीटर कम होगी और 25 से 30 मिनट का समय भी बचेगा। इससे बीच शहर से गुजरने से भी बचा जा सकेगा और अभी अलाइनमेंट बदलने से एक पुराने मंदिर के साथ टाइगर रिजर्व के बफर जोन को भी बचाया गया है। अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि नए प्रस्ताव में हर एक किमी पर 100 मीटर का अंडरपास बनेगा। यानि कुल 6 किमी बफर से सटे मार्ग पर 610 मीटर का अंडर पास बनेगा। साथ ही सड़क के दोनों ओर फेंसिंग भी होगी। पहले बॉयडक्ट व अन्य कामों को जोडऩे की वजह से प्रोजेक्ट की लागत करीब 1600 करोड़ बढ़ गई थी, यह अब कम हो जाएगी। नए प्रस्ताव में दोनों ओर 15-15 मीटर की ग्रीन बेल्ट बनेगी। प्रोजेक्ट में भोपाल जिले की कोलार एवं हुजूर तहसील के 23 गांव की 416.25 हेक्टेयर जमीन प्रभावित होगी। इसमें निजी भूमि 309.08 हे., सरकारी जमीन 62.17 हे. और वन भूमि 45 हे. होगी।
जानकारी के अनुसार, भोपाल के पश्चिमी बायपास के रूट में प्रस्तावित करीब 1480 मीटर के बॉयडक्ट (जंगली जानवरों के आवागमन के लिए बनने वाले अंडरपास) को 870 मीटर तक घटा दिया गया है। इससे लागत 300 करोड़ के करीब कम हो जाएगी। पूर्व में प्रस्तावित बॉयडक्ट को आधे से भी कम करने के बाद बने नए प्रस्ताव को स्टेट लेवल इंपावर्ड कमेटी (एसएलईसी) के रिव्यू के लिए दो दिन पहले भेज दिया गया। मुख्य सचिव (सीएस) अनुराग जैन की अध्यक्षता वाली एसएलईसी जनवरी के पहले पखवाड़े में इसका रिव्यू करेगी। इसी के बाद भू-अर्जन के लिए धारा-11 का प्रकाशन होगा। जिन लोगों की जमीन बायपास के रूट पर आ रही है, उनकी अधिसूचना जारी करने के बाद आपत्तियां ली जाएंगी। यह बॉयडक्ट रातापानी टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र के किनारे प्रस्तावित थे। हाल में जब पीडब्ल्यूडी की मीटिंग हुई थी, तब उच्च स्तर पर बॉयडक्ट पर सवाल उठे थे कि कलियासोत की तरफ शहरी क्षेत्र लगता है। जंगल से जानवर या टाइगर शहर की तरफ आए, इसके लिए इतने बड़े बॉयडक्ट की जरूरत क्यों है। जंगली जानवरों को तो शहर की तरफ आने से रोकना है।
नए प्रस्ताव में ग्रीन बेल्ट
करीब 9 महीने के सर्वे के बाद इस रूट को फाइनल किया गया है, जिसमें पुराने रुट पर जमीन विवाद के चलते अलाइमेट बदला गया है। अब नया रूट भोपाल-जबलपुर मार्ग 46 के ग्राम रतनपुर सडक़ से शुरू होगा। ये कोलार-रातीबड़ होता हुआ भोपाल-देवास रोड पर स्थित ग्राम फंदा कलां पर जुड़ेगा। अधिकारियों का कहना है कि 4 अगस्त 2025 को एमपी-आरडीसी के बोर्ड में पश्चिमी बायपास को चेयरमैन व सीएम डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में सैद्धांतिक सहमति मिल गई है। नए प्रस्ताव को एसएलईसी की मंजूरी के बाद फिर अनुमोदन कराया जाएगा। भोपाल के रतनपुर (11 मील के पास) से शुरू होकर कोलार-रातीबड़ होते हुए भोपाल-देवास रोड पर फंदा गांव से मिलने वाला पश्चिमी बायपास आगे जाकर इंदौर-भोपाल-जबलपुर हाई स्पीड ग्रीनफील्ड 6-लेन हाईवे की कनेक्टिविटी का हिस्सा होगा। इसकी कुल लंबाई 35.6 किमी प्रस्तावित है। भू-अर्जन के लिए भोपाल कलेक्टर को संकेत दे दिए गए हैं।
7 स्थानों पर एलिवेटेड रोड होगी
बता दें, पुराने अलाइमेंट में बायपास की लंबाई करीब 41 किमी थी, जो कि अब करीब 6 किमी कम हो गई है। नए रूट में जमीन का अधिग्रहण भी कम होगा। इन्हीं तर्कों के बाद सीएम ने नए रूट पर सहमति दी है। वहीं रायसेन कलेक्टर के खाते में जमीन अधिग्रहण के लिए जमा 100 करोड़ रुपए भी अब भोपाल कलेक्टर के खाते में आएंगे। पहली बार इस रूट पर बाघों के आने-जाने के लिए 7 स्थानों पर एलिवेटेड रोड होगी। यानी नीचे से बाघों और वन्यजीवों के आने-जाने का रास्ता होगा और ऊपर से वाहन निकलेंगे। बायपास ये पूरी तरह से साउंड प्रूफ होगा, जिसमें सड़क के दोनों तरफ 10 मीटर ऊंचाई की फेंसिंग की जाएगी। फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने इन सभी शर्तों के साथ ही सडक़ बनाने की अनुमति दी है। साथ ही नए रूट में रातापानी टाइगर रिजर्व के बफर जोन का कम एरिया आ रहा है। अब फॉरेस्ट का एरिया 6.1 किमी की जगह पर 5.45 किमी होगा।
हाईब्रिड एन्यूटी मॉडल पर बनेगा बायपास
नया बायपास हाइब्रिड एन्युटी मॉडल पर बनेगा, जिसमें 60 फीसदी राशि का इंतजाम बायपास बनाने वाले कंपनी मेसर्स पीएनपी इंफ्राटेक लिमिटेड को करना होगा। वहीं 40 फीसदी राशि राज्य सरकार दो साल के भीतर किस्तों में देगी। काम पूरा होने के बाद अगले 15 साल में कंपनी को उसकी लागत की राशि हर 6 महीने में किस्तों के माध्यम से दी जाएगी। इस रूट पर जो टोल लगेगा, उसकी राशि कॉन्ट्रेक्टर के पास नहीं बल्कि एमपीआरडीसी के खाते में जमा होगी। 15 साल तक कंपनी को इस बायपास का मेंटेनेंस भी करना होगा। अफसरों को उम्मीद है कि नए रुट पर पुराने रिंग रोड का 30 फीसदी से ज्यादा ट्रैफिक गुजरेगा।
