सडक़ दुर्घटनाओं पर लगेगी लगाम… अब खत्म होंगे 142 ब्लैक स्पॉट

सडक़ दुर्घटनाओं
  • स्टेट हाईवे पर दुर्घटनाओं को कम करने के लिए की जा रही कवायद

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। एमपीआरडीसी ने प्रदेश के स्टेट हाईवे पर 142 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए हैं। इन ब्लैक स्पॉट को खत्म करने के लिए डीपीआर बनाई जाएगी। इन ब्लैक स्पॉट पर सुधार का कार्य चार पैकेज में पूरा होगा। इसके लिए एमपीआरडीसी ने सुरक्षा सलाहकार की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू कर दी है। इनके सुधार पर 2 करोड़ 84 लाख रुपए के खर्च का अनुमान लगाया गया है। गौरतलब है कि ब्लैक स्पॉट की वजह से सडक़ दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। मप्र में सडक़ दुर्घटनाओं की संख्या में भी लगातार इजाफा हो रहा है। प्रदेश के ग्वालियर, भोपाल, नर्मदापुरम, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, सागर, धार, रीवा, शहडोल और छिंदवाड़ा जिलों में पडऩे स्टेट हाईवे पर यह ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए हैं। इनकी वजह से दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ गई है। ऐसे में इन ब्लैक स्पॉट को खत्म करने और स्टेट हाईवे में सुधार की कवायद शुरू की गई है। मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कार्पोरेशन (एमपीआरडीसी) के अधिकारियों ने चार पैकेज तैयार कर इन ब्लैक स्पॉट को खत्म करने के लिए सेफ्टी कंसल्टेंट (संरक्षा सलाहकार) की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की है। गौरतलब है कि ब्लैक स्पॉट की वजह से इंदौर क्षेत्रमें वर्ष 2024 में 328 मौतें और 2025 में सितंबर तक 140 से ज्यादा मौतें दर्ज की गई, जो फ्लाईओवर बनने के बाद भी जारी हैं। वहीं भोपाल क्षेत्र में 2024 में 235 लोगों की जान गई, और मिसरोद जैसे इलाके दुर्घटनाओं के हॉटस्पॉट बने हुए हैं, जहां तेज रफ्तार और अचानक कट पॉइंट (डिवाइडर) मुख्य कारण हैं। जनवरी से जून 2025 के बीच प्रदेश में 108 एम्बुलेंस के जरिए दर्ज 69,951 ट्रॉमा मामलों में से जयादातर 16-30 साल के युवा थे।
प्रदेश के इन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा ब्लैक स्पॉट
भोपाल-जबलपुर हाईवे पर समरधा ब्रिज और 11 मील, भोपाल-देवास हाईवे पर चिरायु अस्पताल के सामने, भोपाल-बैरसिया सिरोंज रोड पर गोलखेड़ी तिराहा, दुर्गा मंदिर तिराहा, शमशाबाद चौराहा को चिन्हित किया गया है। इसके अलावा भोपाल-विदिशा मार्ग, भोपाल-देवास मार्ग, रायसेन-राहतगढ़, गुना-आरोन मार्ग, बुधनी-इटारसी मार्ग, बैतूल-परतवाड़ा, बैतूल-सारणी, हरदा-खंडवा मार्ग सहित 43 ब्लैक स्पॉट हैं। वहीं इंदौर डिवीजन के अंतर्गत खरगोन जिले में सनावद खरगोन, धार रोड, बड़वाह-धामनोद, खंडवा-देडतलाई, मुंदी-पुनासा, उज्जैन-इंदौर रोड पर 13 ब्लैक स्पॉट हैं। धार में खलघाट-मनावर रोड, महू-घाटा बिल्लौद मार्ग, मनावर-मंगोद, खरगोन-बड़वानी मार्ग पर 10 ब्लैक स्पॉट हैं। उज्जैन डिवीजन में उज्जैन-मक्सी मार्ग, सिंहस्थ बायपास, उज्जैन-जावरा, देवास बायपास, लेबड़-जावरा, जावरा-नयागांव पर 18 मिलाकर कुल 41 ब्लैक स्पॉट है।
सर्वे कर सौंपी जाएगी विस्तृत रिपोर्ट
कंसल्टेंट कंपनियां इन ब्लैक स्पॉट का सर्वे कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर एमपीआरडीसी को सौंपेंगी। इसके बाद सुधार का कार्य कराया जाएगा। प्राथमिक तौर पर भोपाल और नर्मदापुरम में 43 ब्लैक स्पॉट, इंदौर व उज्जैन क्षेत्र में 41, ग्वालियर व सागर क्षेत्र में 21 और जबलपुर क्षेत्र के आसपास 37 ब्लैक स्पाट चिन्हित किए गए हैं। इन्हें समाप्त करने के लिए केंद्रीय सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय में सूचीबद्ध कंसल्टेंट ही अधिकृत होकर टेंडर प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे। हर ब्लैक स्पाट का मौके पर पहुंचकर सर्वे का कार्य किया जाएगा कि उन्हें समाप्त करने के लिए हाईवे की संरचना में किस प्रकार बदलाव की जरूरत है। किसी स्थान पर चेतावनी संकेतक लगाकर काम चल सकता है या फिर कहीं किसी बड़ी संरचना को तैयार किया जाना है। इस आधार पर एमपीआरडीसी द्वारा सुधार कार्य किया जाएगा।
सडक़ दुर्घटनाओं के मुख्य कारण
– रात के समय और हाईवे पर तेज गति से वाहन चलाना सडक़ दुर्घटनाओं का बड़ा कारण है।
– डिवाइडर पर अचानक कट पॉइंट होने से दुर्घटनाएं बढ़ जाती हैं।
– सडक़ों के किनारे झुग्गियां और दुकानें होने से लोग अचानक सडक़ पर आ जाते हैं। इससे भी दुर्घटनाएं बढ़ी है।
– कुछ स्थानों पर सडक़ का डिजाइन ही खतरनाक है। इससे भी प्रदेश में सडक़ दुर्घटनाओं का आंकड़ा बढ़ा है।

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