
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मप्र कार्य गुणवत्ता परिषद के नाम पर करोड़ों खर्च करने के बाद भी नतीजा सिफर रहा है। गुणवत्ता परिषद के गठन को तीन साल पूरे होने पर ना तो टेक्निकल स्टॉफ मिला और ही निर्माण कार्यों में घटिया सामग्री के इस्तेमाल की जांच की जा रही है। बीते तीन साल के दौरान सिर्फ 13 जांच की गई।
यानि शिवराज सरकार में परिषद गठन के बाद (सीटीई) का अस्तित्व ही खत्म हो गया है। शिवराज सरकार में आईएएस अफसरों की मंशा पर मुख्य तकनीकी परीक्षक (सीटीई) को खत्म कर मप्र गुणवत्ता परिषद का गठन एक रिटायर्ड आईएएस अशोक शाह के मार्गदर्शन में किया गया। सरकार ने अशोक शाह को इसलिए महानिदेशक बनाया कि इससे प्रदेश में विभिन्न विभागों खासकर पीडब्ल्यूडी, जल संसाधन और पीएचई सहित आवास एवं पर्यावरण द्वारा कराए जाने वाले घटिया गुणवत्ता के निर्माण कार्यों की जांच हो सके, लेकिन सरकार ने जांच करने वाले टैक्नीकल स्टॉफ की पोस्टिंग नहीं की। यहां पर एक ईएनसी, तीन चीफ इंजीनियर, 4 अधीक्षण यंत्री सहित 8 कार्यपालन यंत्री और एसडीओ की पोस्टिंग प्रतिनियुक्ति पर की जाती रही है। वैसे इंजीनियरिंग विभागों में ही इंजीनियरों का टोटा पड़ गया, क्योंकि सरकार पिछले 9 साल से प्रमोशन नहीं दे रही है। इसलिए जांच करने वाला भी कोई अधिकारी परिषद में नहीं है। कार्य गुणवत्ता परिषद के गठन के बाद 6 माह में महज 13 निर्माण कार्यों की जांच हुई। उसके बाद से ढाई साल में एक भी जांच परिषद द्वारा नहीं की गई है।
परिषद ने सिर्फ इन मामलों में की जांच
परिषद के जांच अधिकारियों ने जिन मामलों की जांच की, उनमें मप्र बीडीसी द्वारा निर्मित कराया जा रहा सीएम राईज स्कूल भवन औबेदुल्लागंज, आरआरडीए द्वारा बनाया गया तामोट से एकलवाड़ा रायसेन रोड़, पीआईयू पीडब्ल्यूडी भवन द्वारा बनाया गया सीएम राईज स्कूल नरसिंहगढ़, लउनि आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सा बोर्ड कार्यालय भोपाल, मप्र सविनि बरखेड़ा नाथू में निमार्णाधीन कॉम्प्लेक्स, सीएम राईज स्कूल बैरसिया, भोपाल का बरखेड़ा नाथू हॉकी स्पोर्टस, बीडीए द्वारा निर्मित सीएम राईज स्कूल बर्रई, बीडीए भोपाल द्वारा बनाया गया आदिवासी छात्रावास भवन भोपाल, मप्र गृनिम द्वारा ईडब्ल्यूएस क्वार्टर बैरागढ़ चिचली भोपाल तथा नगर निगम द्वारा बनाए गए प्रधानमंत्री आवास योजना बाग मुगलिया और आरआरडीए ने सीएम राईज स्कूल आष्टा तथा शुजालपुर का सीएम राईज स्कूल प्रमुख है।
