अब हर ग्राम पंचायत में एक सचिव की नियुक्ति अनिवार्य

ग्राम पंचायत
  • जिला स्तर पर बनाया जाएगा पंचायत सचिवों का कॉडर

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम।  लोकतंत्र की नींव के रूप में कार्य करने वालीं ग्राम पंचायतें मानव संसाधन की कमी से जूझ रही हैं। इसका असर उनके काम के प्रदर्शन पर भी पड़ रहा है। इसको देखते हुए मप्र सरकार पंचायत सचिवों का कॉडर बनाने जा रही है। जिसमें हर ग्राम पंचायत में एक पंचायत सचिव की नियुक्ति अनिवार्य होगी। वर्तमान में औसतन दो से चार ग्राम पंचायतों पर एक सचिव नियुक्त होता है। लेकिन अब प्रदेश में पंचायत सचिवों को एक से ज्यादा ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारी नहीं मिलेगी। सरकार ने तय किया है कि प्रत्येक जिले में ग्राम पंचायतों के बराबर सचिव पदस्थ किए जाएंगे। इसके लिए पंचायत सचिव के लिए जिला स्तर पर कॉडर बनाया जाएगा।
गौरतलब है कि पिछले दिनों मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ग्राम पंचायतों और मजबूत बनाने के संकेत दिए थे। उसके बाद विभागीय मंत्री प्रहलाद पटेल ने अधिकारियों के साथ बैठक की। जिसमें निर्णय लिए गए कि राज्य सरकार पंचायत सचिवों के लिए जिला स्तर पर कॉडर तैयार करेगा। इसमें हर जिले में यहां की ग्राम पंचायतों की संख्या के आधार पर पंचायत सचिवों की नियुक्ति की जाएगी। इसके जिला जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों से उनके जिलों में आने वाली ग्रामपंचायतों को संख्या के साथ रिक्त पदों की जानकारी दी जाएगी। सभी जिलों से जानकारी मिलने के उपरांत राज्य सरकार कर्मचारी मंडल द्वारा पंचायत सचिवों की भर्ती प्रक्रिया की शुरुआत करेगी। इसके लिए सरकार ने तीन स्तरीय वेतनमान की व्यवस्था तय की है।
आधे पदों पर मिलेगी रोजगार सहायकों को प्राथमिकता
विभागीय अधिकारियों की माने तो पंचायत सचिव की शुरुआती सेवाओं के दौरान उन्हें कार्यभार ग्रहण करने से 2 साल तक 10 हजार रुपए का फिक्स (निश्चिय) वेतन दिया जाएगा। इस सेवा अवधि को पूरा करने के उपरांत सचिव सातवें वेतनमान के पात्र हो जाएंगे और उन्हें 19,500 से 62,200 तक दी जाएगें। पंचायत सचिव की सेवाएं 10 वर्ष पूरी होने के उपरांत उन्हें 23 हजार 500 से 80 हजार 500 रुपए का वेतनमान देय होगा। जानकारी के अनुसार पंचायत सचिव को कुल रिक्त पदों में से 50 प्रतिशत पदों पर रोजगार सहायकों को प्राथमिकता मिलेगी। यानि कि इतने पद रोजगार सहायकों के लिए आरक्षित किए जाएंगे। हालांकि रोजगार सहायकों को भी भर्ती प्रक्रिया का पालन करना पड़ेगा। बताया गया है कि पंचायत सचिवों के रिक्त पदों की सूचना हर वर्ष जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को 15 जनवरी तक कर्मचारी चयन मंडल को भेजनी होगी। जिसके द्वारा पात्रता परीक्षा के आधार पर अभ्यर्थियों की जिला और श्रेणीवार योग्यता सूची तैयार की जाएगी। इसमें 15 प्रतिशत अभ्यर्थियों के नाम प्रतीक्षा सूची में भी शामिल किए जाएंगे। पात्रता परीक्षा में समान अंक प्राप्त करने पर ऐसे अभ्यर्थी को प्राथमिकता   मिलेगी, जिसकी आयु अधिक और उसने कम्प्यूटर दक्षता परीक्षा में अधिक अंक प्राप्त किए हो। मध्यप्रदेश में 23 हजार 6 ग्राम पंचायतें है। जानकारों की माने तो सरकार ने तय किया है कि अब प्रत्येक ग्राम पंचायतों के लिए एक सचिव की नियुक्ति की जाएगी। जानकारों की माने तो 23 हजार 11 पंचायत सचिव पद पर भर्ती की जाएगी। अगर मौजूदा स्थिति पर नजर डाले तो राज्य की 20 प्रतिशत से ज्यादा ग्राम पंचायतें ऐसी है, जहां के माजूद, सचिवों के पास एक से ज्यादा पंचायतों की जिम्मेदारी है।
जनवरी 2026 से शुरू होगी पदों को भरने की प्रक्रिया
जानकारों की माने तो इस नए नियम के आधार पर जनवरी 2026 से पंचायत सचिवों के पदों को भरने की प्रक्रिया शुरु होगी। कर्मचारी चयन मंडल द्वारा पात्रता परीक्षा का आयोजन किया जाएगा। पात्रता परीक्षा से चयनित किसी भी अभ्यार्थी की नियुक्ति उनके गृह ग्राम में आने वाली पंचायतों के लिए नहीं की जाएगी। ऐसे में उन्हें जिले की दूसरी ग्राम पंचायतों में ही नियुक्त किया जाएगा। इसके लिए अभ्यर्थियों की काउंसलिंग भी की जाएगी और उनसे गृह पंचायत के अलावा कौन सी दूसरी पंचायत में सेवाएं देनी है, इसके बारे में पूछा जाएगा। इसी तरह महिला पंचायत सचिवों को भी नियमानुसार अवकाश सहित दूसरे पात्रता छूट मिलेगी। आकस्मिक अवकाश में जहां पुरुष सचिव एक वर्ष में 13 दिन का ले सकेंगे, तो महिला सचिव को बीस दिन का आकस्मिक अवकाश मिलेगा। इनके अलावा अन्य अवकाश की श्रेणी में एक बार में तीस दिन और एक वर्ष में 45 दिन का अवकाश जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों द्वारा स्वीकृत किए जा सकेंगे। लेकिन इसके लिए जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों की अनुशंसा आवश्यक होगी।

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