
- भाजपा में भरपूर उत्साह, कांग्रेस में निराशा का भाव
गौरव चौहान/भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। बिहार में विधानसभा चुनाव परिणाम ने भाजपा को गदगद कर दिया है। पार्टी सहित एनडीए को मिली बंपर जीत से मप्र भाजपा संगठन और सरकार में उत्साह नजर आ रहा है। वहीं कांग्रेस में मायूसी छायी हुई है। इसका असर अब मप्र की राजनीति में भी दिख सकता है। भाजपा मिशन 2028 के लिए अब बिहार की चुनावी रणनीति पर काम करेगी। वहीं कांग्रेस चुनाव परिणाम से सबक लेने की बजाय चुनाव आयोग और एसआईआर को कोसने में लगी हुई है। जानकारों का कहना है कि बिहार की जीत से निश्चित ही मध्यप्रदेश में भाजपा अति उत्साह में होगी। ऐसी स्थिति कई बार आम कार्यकर्ताओं पर भारी पड़ जाती है, जबकि पहले से हताश और निराश कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए जमीन पर काम करता चुनौतीपूर्ण होने वाला है। चुनाव नतीजों को दूसरे राज्यों में सत्ता-संगठन अपनी तरह से भुनाते हैं। मप्र में भाजपा की ताकत बढ़ेगी। कांग्रेस राष्ट्रीय मुद्दों पर जो राजनीति कर रही है, उसका खास फायदा नहीं होने वाला।
गौरतलब है कि बिहार विधानसभा चुनाव के परिणामों से मध्यप्रदेश में सत्ता-संगठन खुश है तो विपक्ष चुनाव आयोग पर लगातार आरोप दाग रहा है। इस खुशी और नाराजगी का असर मप्र में 2028 के विधानसभा चुनाव पर कितना पड़ेगा यह परिणाम बताएंगे, लेकिन उसके पहले भाजपा-कांग्रेस के लिए अलग तरह की चुनौतियों का दौर शुरू हो गया है। बिहार में एनडीए की जीत से मध्यप्रदेश के भाजपा नेताओं में खुशी की लहर के बारे में विशेषज्ञों का मानना है कि यह खुशी शत-प्रतिशत कार्यकर्ताओं तक पहुंचेगी या नहीं, यह समय बताएगा। क्योंकि जब भी कोई दल एक के बाद एक उपलब्धि हासिल करता है तो निचले पायदान के लोगों की पूछ-परख कम पड़ जाती है। हालाकि भाजपा जीत का श्रेय ही कार्यकर्ताओं को देती है। उधर, कांग्रेस नेता तो अपनी जगह, लेकिन कार्यकर्ताओं की आफत बढऩी तय है। विशेषज्ञ मानते हैं कि कार्यकर्ताओं को जमीन पर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। लगातार हार से कार्यकर्ता हताश होंगे। पूरे मनोबल से काम करना मुश्किल होगा।
महागठबंधन का एमवाय फॉर्मूला फेल
बिहार चुनाव में महागठबंधन एमवाय (मुस्लिम यादव)फॉर्मूला पर जीत की आस लगावे हुए थे। अमरकंटक, केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा है कि एनडीए सरकार जनता के विश्वास पर खरी उत्तरी, इसलिए प्रचंड बहुमत मिला। नीतीश सरकार ने जंगलराज के विरोध में चुनाव लड़ा। कांग्रेस की हार को सिंह ने गांधी परिवार पर निर्भरता का परिणाम बताया। इंडिया एलायंस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि लालू यादव ने एमवाय (मुस्लिम यादव) जातिगत समीकरण पर आधारित राजनीति की, जिसके चलते करारी हार का सामना करना पड़ा। केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि देश के मुसलमानों को बाहर से आए अवैध घुसपैठियों का संरक्षण नहीं करना चाहिए। सरकार जल्द ही रोहिंग्या घुसपैठियों की पहचान कर देश से बाहर करने की प्रक्रिया तेज करेंगी। सिंह अमरकंटक में मीडिया से चर्चा कर रहे थे। उन्होंने मं नर्मदा के उद्गम स्थल पर पूजा-अर्चना की। अधिकारियों के साथ बैठक में कहा, अमरकंटक क्षेत्र में पर्यावरण को बिना क्षति पहुंचाए 2000 लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कोसा उत्पादन व गारमेंट यूनिट स्थापन पर जोर दिया जा रहा है।
बिहार से सबक लेकर रणनीति बनाएगी भाजपा
भाजपा सूत्रों का कहना है कि मप्र के लिए पार्टी बिहार चुनाव से सबक लेते हुए रणनीति बनाएगी। वैसे तों मध्यप्रदेश भाजपा की पहली प्रयोगशाला माना जाता है, यहां के कार्यकर्ताओं की क्षमता, कार्यकुशलता का पार्टी दूसरे राज्यों में प्रयोग करती है। तब भी विशेषज्ञों की मानें तो बिहार में वोटिंग के पहले जिस तरह से एनडीए के कई नेताओं को जनता के विरोध का सामना करना पड़ा था, वह चिंता का विषय थी। हालांकि मध्यप्रदेश में ऐसी स्थिति हीं है। सत्ता पक्ष चाहेगा कि बिहार जैसी स्थिति न बने, इसके लिए अभी से जतन किए जाएंगे। विपक्ष भले ही हार के लिए चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहरा रहा हो, लेकिन मध्यप्रदेश में जीत के लिए रणनीति बदलना तय माना जा रहा है। इसके लिए जमीन पर उतरकर काम करना, आरोपों-प्रत्यारोपों से, बचना और परिणाम आधारित काम करना मुख्य हिस्सा हो सकते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि वोट चोरी और चुनाव आयोग पर आरोपों से जनता पर बहुत फर्क नहीं पडऩे वाला, इसलिए जनता के मुद्दों पर बात करनी होगी, परिणाम आधारित काम करने होंगे।
