बच्चों के अभिभावकों के अकाउंट में आएंगे स्कूल यूनिफॉर्म के रुपए

यूनिफॉर्म के रुपए
  • दो जोड़ी ड्रेस के लिए 600 रुपए मिलेंगे

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को इस बार मप्र सरकार खुद यूनिफॉर्म नहीं बांटेगी। इसके बजाय उनके अभिभावकों बैंक खातों में सीधे पैसे ट्रांसफर किए जाएंगे। योजना के तहत कक्षा 1 से 8वीं तक के लगभग 55 लाख छात्रों को यूनिफॉर्म के लिए 600 रुपए प्रति विद्यार्थी की राशि उनके अभिभावकों बैंक खातों में भेजी जाएगी, जिससे वो दो जोड़ी स्कूल यूनिफॉर्म खुद खरीद सकेंगे। ये लगातार दूसरा साल है जब सरकार बच्चों के अभिभावकों  के खाते में सीधे रुपए जमा कराने जा रही है। हालांकि पहले सरकार खुद यूनिफॉर्म खरीदी करती थी और बांटती थी लेकिन इस प्रक्रिया को बदला गया है।
दरअसल, सरकारी स्कूलों में यूनिफॉर्म (गणवेश) वितरण को लेकर बनी असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। मप्र सरकार ने यूनिफॉर्म वितरण व्यवस्था में बदलाव करने को लेकर अंतिम निर्णय ले लिया है। प्रदेश में 7 साल बाद महिला स्व सहायता समूहों से सरकारी स्कूलों में यूनिफॉर्म वितरण का काम वापस लिया जाएगा। इसके स्थान पर यूनिफॉर्म खरीदने के लिए राशि सीधे विद्यार्थियों के अभिभावकों के खाते में ट्रांसफर की जाएगी। इस संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से सीएम सचिावलय को प्रस्ताव भेजा गया था। जानकारी के अनुसार, इस संबंध में गत 25 मार्च को मुख्य सचिव अनुराग जैन ने स्कूल शिक्षा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग और वरिष्ठ सचिव समिति के सदस्यों के साथ बैठक कर यूनिफॉर्म वितरण को लेकर विस्तार से चर्चा की थी। बैठक में शामिल अधिकतर अफसरों ने यूनिफॉर्म खरीदने के लिए राशि सीधे अभिभावकों के खातों में भेजने का सुझाव दिया था। फिर स्कूल शिक्षा मंत्री के स्तर पर चर्चा के बाद यूनिफॉर्म की राशि सीधे अभिभावकों के खाते में भेजने को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा प्रस्ताव तैयार कर सीएम सचिवालय को भेजा गया।
मुख्यमंत्री ने दी प्रस्ताव को मंजूरी
आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है। इसके बाद सीएम सचिवालय ने प्रस्ताव वापस स्कूल शिक्षा विभाग को भेज दिया है। अभी यह प्रस्ताव राज्य शिक्षा केंद्र के पास है। विभाग जल्द ही यूनिफॉर्म खरीदने के लिए राशि बच्चों के अभिभावकों के खाते में ट्रांसफर करेगा। इस राशि से विद्यार्थी अपनी पसंद की यूनिफॉर्म खरीद सकेंगे। प्रति विद्यार्थी दो जोड़ी यूनिफॉर्म खरीदने के लिए 600 रुपए प्रदान किए जाएंगे। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक प्रदेश में वर्ष 2018 से प्राइमरी और मिडिल कक्षाओं के विद्यार्थियों को यूनिफॉर्म वितरण का काम महिला स्व सहायता समूहों द्वारा मप्र राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से किया जा रहा था। तत्कालीन शिवराज सरकार ने महिला स्व सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को रोजगार मुहैया कराने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया था। राज्य शिक्षा केंद्र आजीविका मिशन के माध्यम से यूनिफॉर्म का कपड़ा खरीदने के लिए महिला स्व सहायता समूहों को राशि आवंटित करता था। स्व सहायता समूह यूनिफॉर्म सिलकर स्कूलों में भेजते थे, लेकिन स्व सहायता समूहों की ओर से बीते वर्षों में एक भी साल समय पर बच्चों को यूनिफॉर्म का वितरण नहीं किया जा सका, जिससे बच्चों को कैजुअल कपड़ों में स्कूल जाना पड़ता है। साथ ही कई जिलों में बच्चों को घटिया क्वालिटी की यूनिफॉर्म वितरित किए जाने की शिकायतें समय-समय पर सामने आई। सरकार ने व्यवस्था को सुधारने के लिए काफी प्रयास किए, लेकिन वह इसमें सफल नहीं हो पाई। यही वजह है कि महिला स्व सहायता समूहों से यूनिफॉर्म वितरण का काम वापस लेने का निर्णय लिया गया।
55 लाख बच्चों को यूनिफॉर्म
स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से सरकारी स्कूलों में पढऩे वाले प्रायमरी और मिडिल कक्षाओं के विद्यार्थियों को हर साल दो जोड़ी यूनिफॉर्म वितरित की जाती है। इसके लिए प्रति विद्यार्थी 600 रुपए निर्धारित है। प्रदेश में हर साल करीब 55 लाख बच्चों को यूनिफॉर्म का वितरण किया जाता है। इस तरह यूनिफॉर्म वितरण पर हर साल करीब 350 करोड़ रुपए खर्च होते हैं। मप्र में नया शिक्षण सत्र शुरू हुए करीब ढाई महीना हो गया, लेकिन अब तक यूनिफॉर्म खरीदने के लिए राशि वितरण नहीं होने से सरकारी स्कूलों के कई छात्र-छात्राएं कैजुअल कपड़ों में स्कूल जाने को मजबूर हैं। स्कूल जून में खुले थे और अगस्त का महीना समाप्त होने को है, इसलिए सरकार जितनी जल्दी राशि ट्रांसफर करेगी, बच्चे उतने जल्दी यूनिफॉर्म में नजर आएंगे।

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