अवैध हथियारों का बाजार बना मप्र

अवैध हथियारों
  • ऑनलाइन डिमांड पर होती है अवैध हथियारों की सप्लाई

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। बिहार का मुंगेर जिला अवैध हथियार बनाने और उसे सप्लाई करने के मामले में पूरे देश में कुख्यात है। अब मप्र इसका केंद्र बन गया है। चाहे लॉरेंस बिश्नोई गैंग हो या बमबीहा या फिर खालिस्तानी आतंकी ये सभी मप्र से आने वाले अवैध हथियार का अपने जुर्म के साम्राज्य को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। मप्र के कई जिलों में घुमंतू लोग पहाड़ी और जंगलों में आदिवासी लोगों को लेबर के तौर पर हायर कर उनसे पिस्टल, रिवॉल्वर कार्बाइन आदि तैयार करवा रहे हैं। इन हथियारों को 25 से 30 और 40 से 50 हजार रुपए में दिल्ली एनसीआर, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के अपराधियों को सप्लाई किया जा रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ऑनलाइन डिमांड पर अवैध हथियारों की सप्लाई होती है। गौरतलब है कि देशभर से आ रही शिकायतों के बाद मप्र सरकार ने अवैध हथियारों के खिलाफ मुहिम छोड़ रखी है। लेकिन धार, बड़वानी, बुरहानपुर व खरगोन जिले में अवैध हथियार बनाने वाले गिरोह तमाम कोशिशों के बाद भी काबू में नहीं आ रहे हैं। स्थानीय पुलिस और जांच एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती है अवैध हथियारों के इस काले कारोबार का ऑनलाइन माध्यमों पर चले जाना है। अवैध हथियार बनाने वाले और इनकी तस्करी करने वाले बकायदा वीडियो और फोटो के साथ जानकारी सोशल मीडिया माध्यमों से भेज रहे हैं। दिल्ली के सरिता विहार क्षेत्र में बीते दिनों 10 सेमी आटोमैटिक पिस्टल व कारतूस के साथ पकड़े गए युवक ने पूछताछ में स्वीकार किया कि दो साल में आनलाइन माध्यम से ही 150 से ज्यादा यहीं के हथियार आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों को बेचे हैं। यही हाल पंजाब और उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रो में भी है। एटीएस और एसटीएफ जैसी एजेंसियों के साथ ही राज्य की पुलिस भी अवैध हथियार बनाने वाले इस नेटवर्क को तोड़ नहीं पा रही है। देश के किसी भी राज्य में बैठे संगठित गिरोह या आपराधिक प्रवृत्ति के लोग इन जिलों के अवैध हथियार बनाने वालों से आनलाइन संपर्क कर हथियारों की डिलीवरी ले लेते हैं।
लगातार कार्रवाई, फिर भी चल रहा गोरखधंधा
प्रदेश के धार, बड़वानी, बुरहानपुर व खरगोन जिले में अवैध हथियार बनाने वाले गिरोह पर पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। उसके बावजुद अवैध हथियार का गोरखधंधा चल रहा है। पुलिस अधीक्षक बुरहानपुर आशुतोष बागरी का कहना है कि पुलिस अवैध हथियारों के निर्माण और तस्करी के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है। इंटरनेट मीडिया के माध्यम से होने वाली डील पर भी साइबर सेल नजर रख रही है। इनका नेटवर्क पूरी तरह समाप्त करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्हें स्वरोजगार से भी जोड़ा जा रहा है। पुलिस अधीक्षक धार मनोज कुमार सिंह का कहना है कि धार जिले में अवैध हथियार बनाने वालों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की जा चुकी है। कुछ फैक्ट्रियां भी पकड़ी गई हैं। सिकलीगर बहुल ग्राम बारिया के 28 लोगों को रोजगार के लिए चिह्नित किया गया है। इनमें से 14 लोगों को रोजगार दिलाया जा चुका है। हमारी पूरी नजर ऐसे लोगों पर है। पुलिस अधीक्षक खरगोन धर्मराज मीना का कहना है कि पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। सिकलीगरों के खातों की जांच भी करती है। सिकलीगरों को समाज की मुख्य धारा से जोडऩे का प्रयास भी किया था। दो साल पहले कई युवाओं को रोजगार से जोड़ा था, लेकिन वे वापस लौट आए। पुलिस अधीक्षक बड़वानी जगदीश डाबर का कहना है कि बड़वानी जिले में अवैध हथियारों को लेकर निरंतर कार्रवाई की जा रही है। सिकलीगरों को समाज की मुख्य धारा में लाने के प्रयास जारी हैं। स्पेशल डीजी एसटीएफ पंकज श्रीवास्तव का कहना है कि प्रदेश के चार जिलों में अवैध रूप से हथियार बनाने के मामले सामने आते हैं। एसटीएफ सहित अन्य एजेंसियां इन पर कार्रवाई भी करती हैं। अवैध हथियार बनाने वालों के पुनर्वास के लिए भी काम किया जाता है। ये लोग अब टेलीग्राम, सिग्नल और डार्क वेब जैसे माध्यमों से हथियारों की तस्करी करने लगे हैं। इनकी ऑनलाइन सक्रियता पर भी नजर रहती है और तुरंत कार्रवाई की जाती है।
हर तरह के हथियार बना रहे गिरोह
धार, खरगोन, बड़वानी, बुरहानपुर के जंगलों में कई गिरोह अवैध हथियार बनाने में जुटे हैं। खरगोन जिले के सिगनूर, काजलपुरा, सतीफालिया, धूलकोट आदि गांवों में हथियार बनाए जाते हैं। सबसे ज्यादा सिगनूर के जंगल में अवैध हथियारों का निर्माण होता है। बुरहानपुर जिले के पाचोरी गांव में भी अवैध हथियारों का निर्माण किया जाता है। धार जिले के लालबाग, बारिया गांव के साथ बड़वानी जिले के उमर्टी, उंडी खोदरी गांव में अवैध हथियारों का निर्माण किया जाता है। यहां के गिरोह देशी कट्टों से लेकर पिस्टल और कार्बाइन तक बना रहे हैं। हथियार तस्करी में आनलाइन प्लेटफार्म का उपयोग करने वाले इसके लिए फर्जी प्रोफाइल और नकली दस्तावेज लगाकार ली गई मोबाइल सिम का इस्तेमाल करते हैं। जिलों और राज्यों की साइबर सेल जब इंटरनेट मीडिया माध्यमों पर नजर रखते हुए इन तक पहुंचती है तो उनके हाथ कुछ नहीं लगता। गुडग़ांव पुलिस ने जनवरी 2024 से इस साल जून के बीच 222 अवैध पिस्टल पकड़ी थीं जो मध्य प्रदेश में बनी थीं। इसी तरह पुणे पुलिस ने भी जुलाई-अगस्त के बीच 12 पिस्टल जब्त की जो मध्य प्रदेश में बनीं थी। जुलाई में ही उत्तराखंड एसटीएफ ने भी रुद्रपुर से 8 सेमी आटोमैटिक अवैध पिस्टल बरामद की थी जो बुरहानपुर जिले से लाई गई थी।

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