
- विदेशी निवेशकों की पसंद बना मप्र…
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मप्र विकास की नई मिसाल गढ़ रहा है। प्रदेश सरकार की इंडस्ट्री फ्रेंडली नीतियों का परिणाम यह हुआ है कि मप्र विदेशी निवेशकों की पसंद बन गया है। करीब डेढ़ साल के अंदर जिस तेजी से औद्योगिक विकास हुआ है उससे मप्र विकास का ग्लोबल हब बन रहा है।
गौरव चौहान/बिच्छू डॉट कॉम
भोपाल (डीएनएन)। मप्र के संतुलित औद्योगिक विकास और रोजगार संवर्धन के लिए संभाग स्तर पर रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव और प्रदेश के बाहर महानगरों में निवेश के लिए हुए रोड-शो से देशभर से सकारात्मक परिणाम मिले हैं। आईटी, हेल्थ, एजुकेशन, टूरिज्म, भारी उद्योग, एमएसएमई, लघु कुटीर उद्योग सहित सभी प्रकार के उद्योग धंधों के माध्यम से राज्य के लोगों के लिए अधिक से अधिक रोजगार के अवसर सृजित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का कहना है कि प्रदेश में बेहतर आर्थिक वातावरण बने, लोगों को रोजगार के बेहतर अवसर मिलें, युवाओं को अपनी बौद्धिक क्षमता के अनुरूप स्थानीय स्तर पर काम मिलें, उन्हें रोजगार के लिए बाहर नहीं जाना पड़े, इस दिशा में सरकार लगातार प्रयास कर रही है। औद्योगिक निवेश को प्रोत्सहन देने के लिये प्रदेश में सिंगल विंडो सिस्टम, निवेश प्रोत्सहन और कस्टमाइज पैकेज जैसी सुविधाएं प्रदान की गई हैं। नये निवेशकों को उद्योग मित्र नीतियों के साथ सरल और सुगम निवेश प्रक्रिया सुनिश्चित की जा रही है। उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश के प्रत्येक जिले में इन्वेस्टमेंट फैसिलिटेशन सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। कई जिलों में शुरू भी हो चुके हैं। उद्योगों को बढ़ावा देने के लिये इन सेंटर में जिला कलेक्टर्स को नोडल अधिकारी बनाया गया है।
आज जब दुनिया के कई देश अस्थिरता के दौर से गुजर रहे हैं, तब भारत आत्मविश्वास से भरा हुआ है। और भारत के इस आत्मविश्वास की सबसे मजबूत धुरी अब मप्र बन रहा है। उन्होंका कहना है कि यह राज्य अब केवल एक भौगोलिक केंद्र नहीं, बल्कि आर्थिक शक्ति के केंद्र में बदल रहा है। अंत में मुख्यमंत्री डॉ मोहन ने सभी निवेशकों और उद्यमियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि मप्र सरकार आपके साथ है। आपके हर सपने में, हर योजना में। उन्होंका कहना है कि यह समय सिर्फ भारत का नहीं, मप्र का भी है। यही वह अवसर है, जब हम सब मिलकर एक नए भविष्य की नींव रख सकते हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि मप्र सरकार जल्द ही मेट्रो, मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट हब और ई-बस प्रोजेक्ट जैसे अनेक शहरी योजनाओं को विस्तार देगी। 582 इलेक्ट्रिक बसें राज्य के विभिन्न शहरों में चलाई जाएंगी। जल आपूर्ति, बिजली और रेल कनेक्टिविटी के मोर्चे पर भी व्यापक कार्य योजनाएं बनाई गई हैं। इंदौर से मुंबई के लिए नया ट्रैक बन रहा है जो गुजरात के बजाय निमाड़ मार्ग से होकर गुजरेगा। साथ ही, इंदौर एयरपोर्ट के विस्तार और एयर कार्गो सुविधा की दिशा में भी कार्य शुरू हो चुका है। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि आने वाले पांच वर्षों में मप्र में रियल एस्टेट सेक्टर को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इंदौर में बनने जा रही एक पुरानी मिल की प्रॉपर्टी को कमर्शियल और रेजिडेंशियल दोनों रूप में विकसित करने की योजना है, जो मध्य भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक केंद्र बन सकता है। उन्होंका कहना है कि ‘बिल्डिंग सिटीज ऑफ टुमॉरो’ की थीम पर आधारित यह ग्रोथ कॉन्क्लेव सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि मप्र को भारत की विकासधारा में सबसे आगे लाने की दिशा में उठाया गया ठोस कदम है। प्रेसवार्ता के अंत में उन्होंने प्रदेशवासियों को आश्वस्त किया कि यह सिर्फ शुरुआत है, और आने वाले समय में हर जिले में इसी प्रकार के निवेश कॉन्क्लेव आयोजित होंगे ताकि हर कोना विकास की धारा से जुड़ सके।
नीतियों में पारदर्शिता और प्रक्रिया में गति
दरअसल, प्रदेश में निवेश से जुड़ी सभी नीतियां निवेशकों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं। प्रक्रियाओं को डिजिटलीकरण और फास्ट ट्रैक स्वीकृति व्यवस्था से जोड़ा गया है। लंदन में एक उद्योगपति को ऑनलाइन आवेदन के तुरंत बाद भूमि आवंटन किया जाना इसी का उदाहरण है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का कहना है कि प्रदेश में स्वास्थ्य शिक्षा के विस्तार के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। यदि कोई संस्था या निवेशक मेडिकल कॉलेज स्थापित करना चाहता है, तो सरकार 25 एकड़ जमीन मात्र एक रुपये में उपलब्ध कराएगी। इससे गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों तक पहुंच सकेंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि टूरिज्म सेक्टर को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से होटल परियोजनाओं पर सरकार 30 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता दे रही है। यह सहायता 100 करोड़ रुपये तक की लागत वाली परियोजनाओं के लिए लागू है, जिससे प्रदेश में विश्वस्तरीय पर्यटन सुविधाएं विकसित हो सकें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का कहना है कि प्रदेश में टेक्सटाइल, फार्मा, एग्रो प्रोसेसिंग और टूरिज्म जैसे क्षेत्रों में निवेश की व्यापक संभावनाएं हैं। आईटी उद्योग को छोटे शहरों तक विस्तार देने की दिशा में सरकार सक्रिय रूप से काम कर रही है। हर सेक्टर के लिए अलग-अलग नीति और सहायता संरचना मौजूद है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि राज्य सरकार ने मेडिकल शिक्षा के विस्तार को प्राथमिकता दी है। वर्तमान में 37 मेडिकल कॉलेज प्रदेश में संचालित हैं और अगले दो वर्षों में इस संख्या को 50 तक पहुंचाने का लक्ष्य है। इससे प्रदेश के युवाओं को स्थानीय स्तर पर चिकित्सा शिक्षा के अवसर मिलेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का कहना है कि ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए किसानों को 3 लाख से अधिक सोलर पंप देने का निर्णय लिया गया है। इससे सिंचाई पर बिजली की निर्भरता कम होगी और किसानों को बिजली बिल से स्थायी राहत मिलेगी। यह राज्य को ग्रीन एनर्जी की दिशा में भी आगे ले जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश अब गेहूं उत्पादन में पंजाब जैसे पारंपरिक कृषि राज्य से भी आगे निकल चुका है। कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए फूड प्रोसेसिंग इकाइयों और एग्री क्लस्टर्स की स्थापना की जा रही है। इससे किसानों की आय और औद्योगिक विकास दोनों को बल मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का कहना है कि सडक़ हादसों में घायल व्यक्ति को अस्पताल तक सुरक्षित पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। राहवीर योजना के तहत ऐसे नेक कार्य करने वालों को 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। इसके साथ ही राज्य में एयर एम्बुलेंस सेवा भी शुरू की गई है, जिससे आपात स्थिति में तेज़ी से उपचार मिल सके। साथ ही सरकार ने स्वास्थ्य सेवा को जन-जन तक पहुंचाने के लिए आयुष्मान योजना को प्रभावी रूप से लागू किया है। प्रदेश में लाखों आयुष्मान कार्ड धारकों को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिल रहा है। सरकारी और निजी अस्पतालों को इस योजना से जोड़ा गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश के छोटे शहरों को भी डिजिटल और तकनीकी विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। यहां आईटी इंडस्ट्री स्थापित करने के प्रयास जारी हैं, जिससे स्थानीय युवाओं को पलायन न करना पड़े और उन्हें अपने ही शहर में रोजगार मिल सके।
सिंगल विंडो क्लियरेंस सिस्टम
मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने नई उद्योग नीति को लागू किया है, जिससे देश-विदेश के निवेशकों को आकर्षित किया जा सके। कैबिनेट में लिए गए निर्णयों के तहत उद्योगों को सिंगल विंडो क्लियरेंस सिस्टम के तहत त्वरित मंजूरी दी जाएगी ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में सुधार के लिए नीतिगत बदलाव किए गए हैं। निवेशकों को कस्टमाइज़्ड पैकेज दिए जाएंगे, जिससे प्रदेश में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) का प्रवाह तेज होगा। मप्र खनिज संपदा और लॉजिस्टिक हब के रूप में विकसित हो रहा है। प्रदेश की समृद्ध खनिज संपदा के दोहन और लॉजिस्टिक सेक्टर में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने नई नीतियां लागू की हैं। बालाघाट में तांबा और मैंगनीज उद्योग, पन्ना में हीरा उद्योग, सतना-कटनी में सीमेंट उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए योजनाएं बनाई गई हैं। इंदौर और भोपाल को लॉजिस्टिक हब के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे व्यापार और निर्यात को गति मिलेगी। रेल, सडक़ और एयर कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए नई परियोजनाएं लाई गई हैं। मप्र अपनी ऐतिहासिक और प्राकृतिक धरोहर के लिए प्रसिद्ध है। प्रदेश सरकार ने पर्यटन को औद्योगिक विकास से जोडऩे के लिए नई योजनाएं लागू की हैं। धार्मिक पर्यटन में उज्जैन (महाकाल लोक), चित्रकूट, ओंकारेश्वर और अमरकंटक जैसे तीर्थस्थलों को विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल बनाया जा रहा है। वाइल्डलाइफ टूरिज्म में कान्हा, बांधवगढ़, सतपुड़ा और पेंच नेशनल पार्क को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा दिया जा रहा है। एडवेंचर और इको-टूरिज्म में पचमढ़ी, भीमबेटका और मांडू जैसे स्थानों में पर्यटन सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। फिल्म सिटी के तौर पर मप्र में फिल्म टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए भोपाल और उज्जैन में फिल्म सिटी निर्माण की योजना बनाई जा रही है। मप्र के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा हाल ही में 1670 करोड़ रुपये की लागत से 47 औद्योगिक इकाइयों का भूमि पूजन करना, केवल आर्थिक विकास का एक संकेत नहीं है, बल्कि यह एक गहरी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा भी है। यह कदम कई मायनों में वर्तमान सरकार के दृष्टिकोण, उसकी प्राथमिकताओं और राज्य की राजनीतिक गतिशीलता पर पडऩे वाले प्रभावों को दर्शाता है। डॉ. मोहन यादव की सरकार, जो कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल के बाद सत्ता में आई है, पर स्वाभाविक रूप से विकास और सुशासन के मोर्चे पर अपेक्षाओं का दबाव है। इतनी बड़ी संख्या में औद्योगिक इकाइयों का भूमि पूजन करके, सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि उसका ध्यान तीव्र औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन पर है। यह ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के मतदाताओं के बीच सकारात्मक संदेश देता है, जो अक्सर रोजगार के अवसरों की तलाश में रहते हैं। चुनाव से ठीक पहले या उसके बाद ऐसे बड़े विकास कार्य करना, सरकार की गंभीरता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है। 1670 करोड़ रुपये का निवेश दर्शा रहा है कि मप्र एक आकर्षक निवेश गंतव्य के रूप में उभर रहा है। सरकार की कोशिश यह दिखाना है कि राज्य में निवेश का माहौल अनुकूल है, एकल खिडक़ी प्रणाली प्रभावी है, और प्रशासनिक बाधाएं कम हो रही हैं। यह न केवल घरेलू बल्कि संभावित विदेशी निवेशकों को भी आकर्षित करने का प्रयास है, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सके। राजनीतिक रूप से, यह एक सफल और प्रगतिशील सरकार की छवि बनाने में मदद करता है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ये 47 औद्योगिक इकाइयां मप्र के किन-किन क्षेत्रों में स्थापित की जा रही हैं। यदि ये इकाइयां राज्य के विभिन्न अंचलों, विशेषकर उन क्षेत्रों में स्थापित की जाती हैं, जो अब तक औद्योगिक विकास में पिछड़ रहे थे, तो यह सरकार की समावेशी विकास की नीति को दर्शाता है। इससे क्षेत्रीय असमानता कम होगी और विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों के लोगों को लाभ होगा, जिसका सीधा राजनीतिक लाभ सरकार को मिल सकता है। मप्र ने सौर ऊर्जा नीति के तहत अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। रीवा सोलर प्लांट के बाद अब प्रदेश में ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर प्लांट स्थापित किया जा रहा है। पवन और सौर ऊर्जा में निवेश आकर्षित करने के लिए सरकार ने नई नवकरणीय ऊर्जा नीति लागू की है। राज्य सरकार वर्ष 2030 तक मप्र को ग्रीन एनर्जी हब बनाने की योजना पर कार्य कर रही है।
औद्योगिक क्रांति की नई कहानी
मप्र अब औद्योगिक विकास के नए दौर में प्रवेश कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में औद्योगीकरण को बढ़ावा देने के लिए लोकल से ग्लोबल दृष्टिकोण को अपनाया गया है। इस रणनीति के तहत रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव और रोड शो जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से निवेशकों और उद्योगपतियों को आकर्षित करने के ठोस प्रयास किए गए हैं। यह पहल न केवल राज्य की आर्थिक समृद्धि को गति दे रही हैं, बल्कि स्थानीय उद्योगों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान भी दिला रही हैं। औद्योगिक विकास की नींव तब मजबूत होती है जब स्थानीय उद्योगों को आवश्यक संसाधन, तकनीकी सहायता और निवेश का अवसर मिलता है। इसी सोच के साथ मप्र सरकार ने बीते कुछ महीनों में संभाग स्तर पर रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित किए, जिनका उद्देश्य स्थानीय व्यापारियों और उद्यमियों को निवेशकों और बड़े उद्योगपतियों से जोडऩा था। रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के कारण स्थानीय उद्योगों को राष्ट्रीय पहचान मिली। छोटे और मध्यम उद्यमों को बड़े व्यापारिक नेटवर्क से जोड़ा गया। इससे निवेशकों ने मप्र में उद्योग स्थापित करने की रुचि दिखाई। इसके साथ ही उद्योगों को और अधिक अनुकूल माहौल देने के लिए आवश्यक बदलावों पर विचार किया गया। बढ़ते उद्योगों के कारण युवाओं के लिए नए रोजगार सृजित हुए। इन कॉन्क्लेव्स के माध्यम से एमएसएमई सेक्टर को विशेष बढ़ावा मिला, जिससे छोटे और मझोले उद्योगों को नई उड़ान मिली। प्रदेशभर में रिजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के सफल आयोजन ने निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया और मप्र को निवेश के लिए एक मजबूत विकल्प के रूप में स्थापित किया। रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव और रोड शो जैसे आयोजनों के माध्यम से मप्र सरकार ने यह साबित कर दिया है कि वह न केवल स्थानीय उद्योगों को समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध है, बल्कि वैश्विक निवेश को भी आकर्षित करना चाहती है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य तेजी से औद्योगिक प्रगति की ओर बढ़ रहा है, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, आधारभूत संरचना मजबूत होगी और प्रदेश की आर्थिक स्थिति और अधिक सुदृढ़ होगी। औद्योगिक क्रांति के इस नए दौर में, मप्र सिर्फ निवेशकों के लिए एक संभावनाओं से भरा प्रदेश नहीं, बल्कि एक ऐसा हब बन गया है जहां उद्योग, व्यापार और नवाचार एक साथ विकसित हो रहे हैं। आने वाले वर्षों में इन प्रयासों का प्रभाव और अधिक स्पष्ट होगा, जिससे प्रदेश न केवल आत्मनिर्भर भारत अभियान में योगदान देगा, बल्कि औद्योगिक क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का कहना है कि मप्र न सिर्फ औद्योगिक हब बन रहा है बल्कि हर क्षेत्र में उन्नति का मार्ग भी प्रशस्त कर रहा है। प्रदेश में बेहतर कनेक्टिविटी, उद्योग अनुकूल नीतियों और मजबूत अधोसंरचना से मप्र निवेशकों की पहली पसंद बन रहा है। मप्र के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दुबई और स्पेन के एक सप्ताह के विदेश दौरे को बेहद सफल बताया है। उनका कहना है कि इस यात्रा ने प्रदेश के लिए निवेश और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के नए रास्ते खोले हैं। मुख्यमंत्री यादव का कहना है कि इस यात्रा से मप्र को वैश्विक मंच पर एक निवेश-अनुकूल राज्य के रूप में स्थापित करने में मदद मिली है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में विदेशी निवेश आकर्षित करने के उद्देश्य से अभी तक के सभी दौर कई मायनों में महत्वपूर्ण साबित हुए हैं। यादव ने जानकारी दी कि भारत सरकार ने 2026 को भारत-स्पेन ‘दोहरे वर्ष’ के रूप में घोषित किया है। इस पहल के तहत दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक, पर्यटन और कृत्रिम मेधा क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। मुख्यमंत्री का कहना है कि इस संबंध में मप्र से सांस्कृतिक टीमें स्पेन भेजी जाएंगी और स्पेन के प्रतिनिधिमंडलों को भी प्रदेश में आमंत्रित किया जाएगा।
निवेश फ्रेंडली आदर्श स्थल है मप्र
मुख्यमंत्री द्वारा प्रदेश में निवेश संवर्धन के लिए देश विदेश में कई कार्यक्रम किए गए है और अभी तक लगभग 1 लाख किलोमीटर की यात्रा की गई है। देश के केंद्र में मप्र स्थित सबसे खूबसूरत और संभावनाओं से परिपूर्ण राज्य है, जो हर प्रकार के उद्योग के लिए उपयुक्त ईको-सिस्टम उपलब्ध कराता है। राज्य में 1 लाख एकड़ से अधिक लैंड बैंक, 340 से अधिक इंडस्ट्रियल पार्क और हर सेक्टर के लिए विशेषीकृत क्लस्टर विकसित किए गए हैं – जिनमें आईटी पार्क, फूड प्रोसेसिंग, गारमेंट्स, प्लास्टिक, टेक्सटाइल और फार्मा पार्क शामिल हैं। यहाँ की इंडस्ट्रियल पॉलिसी और लॉजिस्टिक नेटवर्क देश में सर्वश्रेष्ठ हैं, जिससे न केवल मैन्युफैक्चरिंग बल्कि निर्यात के लिए भी मजबूत आधार प्राप्त होता है। राज्य की एमएसएमई नीति और लॉजिस्टिक्स पॉलिसी ने उद्यमिता को नई गति दी है। नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय एक्सप्रेस-वे कनेक्टिविटी, 1000 मिलियन क्यूबिक मीटर जल आपूर्ति क्षमता, निर्बाध पॉवर की सप्लाई और 10 से 40 प्रतिशत तक की सब्सिडी राज्य को निवेशकों के लिए आकर्षक बनाती है। गुजरात के सूरत जैसे औद्योगिक शहरों के निवेशकों ने मप्र को अपनी दूसरी कर्मभूमि के रूप में अपनाया है। लैंड अलॉटमेंट की प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी, तेज और हेजल-फ्री है, जिससे निवेशकों को बिना किसी रुकावट के प्रोजेक्ट शुरू करने का अवसर मिलता है। मप्र के धार में प्रधानमंत्री मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड अपैरल पार्क का शुभारंभ किया जाएगा। यह पार्क 2 हजार एकड़ में 2 हजार करोड़ रूपये के निवेश के साथ प्लग एंड प्ले सुविधा, सोलर प्लांट, सेंट्रलाइज्ड स्टीम बॉयलर के साथ स्थापित किया जा रहा है। गुजरात के प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों ने मप्र में अपने औद्योगिक अनुभव साझा किए हैं। मिलेनियम बेबी केयर और केयर फिट इंडस्ट्रीज के ओनर एवं फाउंडर राम प्रकाश बेरिया ने मप्र में अपने उद्योग स्थापना एवं संचालन के अनुभव को साझा करते हुए कहा कि मैं वर्ष 2016 से मप्र में कार्य कर रहा हूं और इस दौरान मैंने महसूस किया है कि यहां का औद्योगिक वातावरण बेहद सकारात्मक, सहयोगपूर्ण और नीति-समर्थ है। राज्य सरकार ने सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम को प्रभावी बनाया है। उन्होंने बताया कि कंपनी मिलेनियम बेबी केयर लिमिटेड ने इंदौर में 400 करोड़ रु. का निवेश किया है और वर्तमान में 200 करोड़ रु. की एक्सपेंशन प्रक्रिया चल रही है। इसके अतिरिक्त, हमारे ग्रुप की अन्य कंपनियां भी राज्य में 600 करोड़ रु. के नए निवेश की योजना पर कार्य कर रही हैं। वेलस्पन वल्र्ड के ग्रुप प्रेसिडेंट चिंतन ठाकर ने मप्र को उद्योग के लिए विश्वसनीय स्थान बताया और लॉजिस्टिक व एमएसएमई नीति की सराहना की। टोरेंट पावर के डायरेक्टर जिगेश भाई मेहता ने राज्य में उत्कृष्ट अधोसंरचना और प्रशासनिक सक्रियता की सराहना की। एसआरके ग्रुप के अध्यक्ष गोविन्दभाई धोलकिया का कहना है कि गुजरात के कई उद्योगपति मप्र को अपना दूसरा घर मानते हैं और यहां निवेश को लेकर उन्हें पूरी सहूलियत, पारदर्शिता और भरोसा मिलता है। सभी वक्ताओं ने मुख्यमंत्री और प्रशासन की सकारात्मक सोच को प्रदेश की औद्योगिक प्रगति का मूल आधार बताया।
अब देश का भविष्य तय करेगा मप्र
गत दिनों इंदौर में आयोजित मप्र ग्रोथ कॉन्क्लेव 2025 के मंच से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के विकास की तस्वीर रखी। उन्होंका कहना है कि आज बदलते दौर में मप्र न सिर्फ देश के नक्शे पर बल्कि दुनिया के सामने एक मजबूत और आत्मनिर्भर राज्य के रूप में खड़ा हो रहा है। पहले जहां देश की जीडीपी में मप्र का योगदान सिर्फ 3 फीसदी था, अब यह बढक़र 8.5 फीसदी हो गया है। यह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है और इसका श्रेय राज्य के मेहनतकश लोगों, निवेशकों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शिता को जाता है। ग्रोथ कॉन्क्लेव में रियल एस्टेट सेक्टर में 12,473 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों पर चर्चा हुई है, जिससे 14,000 से अधिक लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री ने रियल एस्टेट सेक्टर की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण बताया और कहा कि आज आवास सिर्फ चार दीवारी नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और भविष्य का आधार है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत देश में चार करोड़ से अधिक लोगों को छत दी गई है, वहीं मप्र में भी आठ लाख मकान दिए जा चुके हैं। अब अमृत योजना के अंतर्गत दस लाख नए मकानों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने बताया कि विभिन्न सेक्टर्स के निवेश मिलाकर कुल 30,000 करोड़ रुपये के एमओयू और भूमि पूजन कार्य आज के कार्यक्रम में शामिल रहे हैं। इसमें टेक्सटाइल, सोलर, बायो एनर्जी, एयरोस्पेस और डिफेंस जैसे विविध क्षेत्रों में निवेश प्रस्ताव आए हैं। आर्य ग्रुप ने 10,250 करोड़ रुपये का सोलर मॉड्यूल निर्माण यूनिट स्थापित करने की घोषणा की है, जिससे 2,000 लोगों को रोजगार मिलेगा। शारदा ग्रुप ने 1,600 करोड़ रुपये के फर्टिलाइजर प्लांट के लिए निवेश किया है। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदेश में रियल एस्टेट, निर्माण, बिजली और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में अपार संभावनाएं हैं। नई सोलर नीति के तहत अगर कोई टाउनशिप सोलर एनर्जी का उपयोग करती है और अपनी बिजली खुद पैदा करती है, तो सरकार उसकी हरसंभव मदद करेगी। रियल एस्टेट से जुड़ी सभी स्वीकृतियां अब सिर्फ 40 दिन में दी जाएंगी और निवेशकों को बेवजह नगर निगम या अन्य विभागों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। मुख्यमंत्री का कहना है कि अब सारी प्रक्रिया सिंगल विंडो सिस्टम के तहत होगी। उन्होंने बताया कि पहले प्रदेश में सिर्फ पांच मेडिकल कॉलेज थे, जो अब बढक़र 37 हो गए हैं। वर्षों से लंबित 5200 करोड़ रुपये के निवेश वायदे भी अब पूरे कर दिए गए हैं। बिजली, पानी, सडक़ जैसे बुनियादी ढांचे में अब प्रदेश आत्मनिर्भर बन चुका है। मुख्यमंत्री का कहना है कि आज अगर दिल्ली में मेट्रो ट्रेन चल रही है, तो उसमें मप्र की बिजली का भी योगदान है। इंदौर प्राधिकरण की तारीफ करते हुए उन्होंका कहना है कि यहां की कार्यशैली बाकी प्राधिकरणों के लिए मिसाल है। उन्होंने बताया कि आज के कार्यक्रम में 12,360 करोड़ रुपये के लोकार्पण और भूमि पूजन की सौगात दी गई है। मुख्यमंत्री ने बताया कि अब मप्र सिर्फ निवेश का केंद्र नहीं, बल्कि देश के विकास का इंजन बन रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 65,000 से अधिक हितग्राहियों को 2,079 करोड़ रुपये की सहायता राशि दी गई है। साथ ही नगरीय निकायों को 10,320 करोड़ रुपये की राशि का अनुदान भी प्रदान किया गया है। स्वच्छता, जल प्रबंधन और शहरी संरचना के विकास के लिए 5004 करोड़ रुपये के कार्यों का भूमि पूजन किया गया है। इंदौर और भोपाल जैसे शहरों में 200 हजार,784 करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश प्रस्तावों पर भी काम शुरू हो गया है। आने वाले वर्षों में इंदौर को मेट्रोपॉलिटन सिटी के रूप में तैयार करने की योजना है, जिसमें उज्जैन, देवास, धार, शाजापुर और रतलाम को जोड़ते हुए लगभग 930 किलोमीटर का महानगरीय क्षेत्र विकसित किया जाएगा।