हाइकोर्ट के जजों पर हर दिन कितना पैसा खर्च हो रहा!

हाइकोर्ट के जजों
  • सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत की तल्ख टिप्पणी…

नई दिल्ली/बिच्छू डॉट कॉम। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत ने कुछ हाईकोर्ट जजों के काम के प्रति समर्पण पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कुछ जज पूरे समर्पण से काम कर रहे हैं और न्याय के पथप्रदर्शक बनकर अपने दायित्वों को निभा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ जज ऐसे हैं, जिनका प्रदर्शन बेहद निराशाजनक है। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा जिन लोगों के समर्पण में कमी है, मैं उनसे एक विनती करना चाहता हूं- जब भी आप रात में सोने के लिए जाएं तो लेटने के बाद तकिए पर अपना सिर रखें तो अपने आप से एक सवाल पूछें कि- मुझ पर जनता का कितना पैसा हर दिन खर्च हो रहा है? जितना लोगों ने मुझ पर विश्वास किया, क्या मैं समाज को उतना लौटा पा रहा हूं? शीर्ष अदालत के न्यायाधीश ने कहा कि हमने न्याय के मंदिर बनाए हैं, लेकिन उनके दरवाजे उन्हीं लोगों के लिए संकरे होते जा रहे हैं जिनकी सेवा के लिए ये अदालतें बनाई गई थीं। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के न्याय सभी के लिए विषय पर आयोजित कार्यक्रम में अपने संबोधन में जस्टिस सूर्यकांत ने मामलों के फैसले होने में हो रही देरी, बार-बार सुनवाई स्थगित होने और जटिल मामलों की लंबी सुनवाई पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि करोड़ों लोग न सिर्फ अपने मामलों पर सुनवाई का इंतजार कर रहे हैं बल्कि वे हमें याद दिला रहे हैं कि हम न्याय देने के लिए नियुक्त हुए हैं। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई ने की और बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
न्याय तक पहुंच समृद्धि का विशेषाधिकार नहीं होना चाहिए
उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा जो बात मुझे परेशान करती है, वह है एक विरोधाभास जिसे हमने अनजाने में पैदा कर लिया है, दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में न्याय तक पहुंच लंबे समय तक समृद्ध वर्ग का विशेषाधिकार बना रहा। जब कानूनी फीस आम नागरिक को मासिक आय से कहीं अधिक हो जाए, जब अदालत की प्रक्रियाओं को समझने के लिए साक्षरता की आवश्यकता हो और लाखों लोगों में यह साक्षरता न हो, जब अदालतों के गलियारे स्वागत की जगह डराने लगें तो हम एक कठोर सच्चाई से रूबरू होते हैं।
कानून को हर भाषा और हर गांव तक पहुंचना चाहिए
(राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण) न्यायमूर्ति सूर्यकांत, जो नालसा के कार्यकारी अध्यक्ष भी है, ने कहा कि कानून को हर भाषा बोलनी चाहिए, हर गांव को सिखाना चाहिए और न्याय की हर पुकार का जवाब देना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर लोकतंत्र को जीवित रखना है तो न्याय हर व्यक्ति तक समान रूप से पहुंचना चाहिए।

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