प्राइवेट स्कूलों को टक्कर देने सरकारी स्कूलों के लिए प्लान तैयार

चंडीगढ़, बिच्छू डॉट कॉम। पंजाब में सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों की टक्कर का बनाने के लिए शिक्षा विभाग एक के बाद एक कदम उठा रहा है। अब शिक्षा विभाग इस बात की तैयारी कर रहा है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता के साथ सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जाए। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब शिक्षा विभाग इसके लिए कोई रणनीति तैयार करें। इसके लिए शिक्षा विभाग ने सभी 19 हजार 166 सरकारी स्कूलों को जोनों में बांटने का फैसला किया है। ताकि इन स्कूलों को जोन वाइज बांट कर अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जा सके। कोरोना वायरस के चलते फिलहाल सूबे में बच्चों को आन लाइन पढ़ाई ही करवाई जा रही है। लेकिन विभाग इस समय का फायदा उठाकर स्कूल के इंफ्रास्ट्रक्चर और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाना चाहता है। इसके लिए बाकायदा विभाग की ओर से एक प्लान तैयार किया गया है। जिसके तहत स्कूल खुलने के बाद इस एक्शन प्लान पर काम शुरू कर दिया जाएगा।

4 जोन में सरकारी स्कूलों को बांटने से 4 बड़े फायदे

  • टीचर्स का ट्रांसफर अभी किसी भी जिले में हो जाते हैं। अब जोन से बाहर ट्रांसफर विशेष परिस्थितियों में ही होगा।
  • डिप्टी डायरेक्टर अपने जोन वाइज फैसले ले सकेंगे। जिससे काम में तेजी आएगी और काम भी समय पर होगा।
  • किसी भी फाइल को विभाग के अधिकारी तक आने में लंबा समय नहीं लगेगा।
  • अभी फर्नीचर भी चाहिए तो फाइल स्कूल से चल कर विभाग के मुख्यालय तक आती है। जिसमें कई चैनल होते हैं। जरूरतें पूरी होने में लंबा समय लगता है।

जोन के अंदर ही होगा तबादला
स्कूलों को जोन वाइज बांटने के बाद विशेष हालातों को छोड़कर एक जोन से दूसरे जोन में शिक्षकों का तबादला नहीं होगा। इसके अलावा चपरासी से लेकर शिक्षक वर्ग तक के कर्मचारियों की प्रमोशन को लेकर जोन वाइज पॉलिसी बनेगी।

हर जोन में अलग डिप्टी डायरेक्टर
सभी सरकारी स्कूलों को 4 जोनों में बांटने के बाद हर जोन का अलग डिप्टी डायरेक्टर होगा। ये अपने जोन का दौरा करेंगे और डीईओ से पता लगाएंगे कि किस स्कूल की क्या जरूरत है। लिस्ट आने के बाद बजट का प्रबंध भी करेंगे।

आसान पाठ्यक्रम किए जाएंगे तैयार
सरकारी स्कूलों के होनहार शिक्षकों जिन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में कोई पुरस्कार प्राप्त किया हो या शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर विशेष जानकारी रखता हो ऐसे शिक्षकों से सरकारी स्कूलों के पाठ्यक्रम में सुधार के लिए मदद ली जाएगी। सरकारी स्कूलों का पाठ्यक्रम ऐसा तैयार किया जाएगा कि मैथ और अंग्रेजी सहित दूसरे मुश्किल विषयों को बच्चे आसानी से समझ सकें।

स्कूलों की अनसेफ बिल्डिंगों का होगा रिनोवेशन
जिन स्कूलों में अनसेफ कमरे या पूरी ही बिल्डिंग ही अनसेफ है उसे खाली कराया जाएगा। इसके बाद इन कमरों और भवनों को रिपेयर या नए सिरे से बनाने के लिए पीडब्ल्यूडी विभाग से एस्टीमेट बनवाया जाएगा। एस्टीमेट बनने के बाद विभाग द्वारा इन कमरों और बिल्डिंगों को बनाने के लिए सरकार की ओर से फंड जारी किए जाएंगे। जिसमें कमरों को नए सिरे से बनाए जाने से लेकर क्लासरूम में फर्नीचर तक मुहैया कराया जाएगा। ताकि बच्चों को जमीन पर बैठकर पढ़ाई नहीं करनी पड़े। इससे बच्चे भी सरकारी स्कूलों की ओर आकर्षित होंगे।

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