अब सरकारी काम में लेतलाली पड़ेगी ठेकेदारों को भारी

 मप्र सरकार

– अब तय समयसीमा में काम नहीं करने पर निर्माण संस्था को ब्लैकलिस्ट ही नहीं बल्कि विभाग से  उसका पंजीयन भी निरस्त किया जाएगा
भोपाल/राकेश व्यास/बिच्छू डॉट कॉम।
मप्र सरकार में कोई काम तय समय सीमा में होता है तो लोग आश्चर्य में पड़ जाते हैं। इसकी वजह है शायद ही कोई सरकार की योजना तय समय में पूरी हो सकी हो। अब प्रदेश की शिव सरकार चाहती है कि आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश के लिए तैयार किए गए रोडमैप का काम तय समय पर पूरा हो। इसके लिए अब निर्माण विभागों के ठेकेदारों पर सख्ती करने की तैयारी कर ली गई है। इन विभागों के तहत आने वाले लोक निर्माण विभाग में सर्वाधिक निर्माण वाले काम होते हैं। इनमें सड़कों से लेकर भवन और बड़े पुल बनाना तक शामिल है। इसकी वजह से ही अब इस विभाग के ठेकेदारों पर सबसे पहले सख्ती का कदम उठाया जा रहा है। इस सख्ती के लिए विभाग द्वारा नए नियम तय किए जा रहे हैं। इसके तहत काम में देरी करने पर न केवल उसे अब ब्लैक लिस्टेड ही नहीं किया जाएगा, बल्कि ठेकेदार का विभाग में पंजीयन भी निरस्त कर दिया जाएगा। दरअसल अब तक काम में देरी होने पर ठेकेदार अफसरों से मिलकर कोई न कोई बहाना खोजकर काम की अवधि में वृद्धि करा लेते हैं। यही नहीं अफसरों की भी ठेकेदारों पर मेहरबानी होने की वजह से उन्हें इस तरह की कार्रवाई का भी कोई डर नहीं रहता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।
अब ठेकेदारों को वर्क आर्डर मिलने के बाद तयस समय में ही निर्माण कार्य पूरा करना होगा। ऐसा नहीं करने वालों की विभाग सूची तैयार  करेगा, जिसके बाद उन्हें विभाग से काम देना बंद कर दिया जाएगा। इसके बाद विभाग द्वारा पंजीयन निरस्त कर दिया जाएगा। इससे पहले सिर्फ ठेकेदार को विभाग में केवल ब्लैक लिस्टेड किया जाता था। कुछ समय बाद ठेकेदार अफसरों से मिलकर फिर विभाग के पैनल में अपना नाम शामिल करा लेता है। इस वजह से उनमें कार्रवाई का अधिक डर नहीं रहता था।
इसलिए पड़ रही जरूरत
लोक निर्माण विभाग द्वारा आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के तहत जो रोडमैप तैयार किया गया है, उसके तहत प्रदेश में सड़कों को बेहतर बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। इसके तहत इस साल 2 हजार 441 किलोमीटर लंबाई की नई सड़कें बनाई जाना हैं। इसके अलावा 65 नए पुल बनाने का भी लक्ष्य तय किया गया है। विभाग को इसके अलावा अगले तीन सालों में केन्द्र सरकार की भागीदारी वाले 3 हजार 105 करोड़ रुपए की लागत वाले 105 रेलवे ओवरब्रिजों का भी निर्माण करना है। इससे प्रदेश में सड़कों की कनेक्टिविटी और बेहतर हो जाएगी। यही वजह है कि इस बार सरकार ने बीते साल की तुलना में अधिक बजट का प्रावधान किया है। इस बार विभाग को बीते साल की तुलना में 475 करोड़ रुपए अधिक का प्रावधान किया गया है। बीते साल विभाग को 6 हजार 866 करोड़ रुपए मिले थे , जबकि इस बार 7 हजार 341 करोड़ रुपए का इंतजाम किया गया है।
इस साल प्रदेश को नाबार्ड भी बड़े पुलों के निर्माण के लिए 3640 करोड़ देने जा रहा है। इस राशि से 244 सेतु का निर्माण किया जाना है। जिसमें 44 आरओबी और सात फ्लाईओवर भी बनाए जाना शामिल है। इसके अलावा 193 बड़े पुलों का निर्माण भी किया जाना है। इनमें से प्रदेश में दो सौ काम शुरू भी कर दिए गए हैं। गौरतलब है कि चालू वित्त वर्ष में कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन के बाद भी प्रदेश में 2 हजार 500 किलोमीटर सड़कों और 13 बड़े पुलों का निर्माण किया गया। इनमें से ज्यादातर सड़कें ग्रामीण क्षेत्रों में बनी हैं। इन पर 3 हजार 522 करोड़ से अधिक की राशि भी खर्च की गई।

Related Articles