हाईकोर्ट के आदेश से खुले पदोन्नति के रास्ते

भोपाल, बिच्छू डॉट कॉम। जबलपुर हाईकोर्ट द्वारा एक मामले की सुनवाई के बाद दिए गए आदेश से शासकीय कर्मचारियों की पदोन्नति के रास्ते खुल गए है। हाईकोर्ट ने इसम और अनारक्षित वर्ग के कर्मचारियों को अनारक्षित वर्ग के पदों पर पदोन्नति दी जा सकती है। लेकिन सरकार द्वारा पदोन्नति को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया जा रहा है। हर बार मामले में कमेटी बनाकर पदोन्नति के मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। जिससे बिना पदोन्नति के शासकीय कर्मचारी सेवानिवृत्त होने पर मजबूर हैं। स्कूल शिक्षा विभाग में संयुक्त संचालक धीरेंद्र चतुर्वेदी की अपर संचालक पद पर पदोन्नति होना थी। लेकिन विभाग ने सुप्रीम कोर्ट व सरकार के पदोन्नति पर बैन लगाने का हवाला देते हुए उन्हें पदोन्नत करने से इंकार कर दिया। इस मामले को लेकर धीरेंद्र चतुर्वेदी ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई। हाईकोर्ट जबलपुर में न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी की सिंगल बेंच ने सुनवाई के बाद उन्हें अपर संचालक के पद पर पदोन्नत किए जाने के आदेश दिए थे। इस आदेश के बाद भी पदोन्नति नहीं देने पर चतुर्वेदी द्वारा अवमानना याचिका दायर की गई। जिसे देखते हुए विभाग ने एक सप्ताह पहले उनके पदोन्नति के आदेश जारी कर दिए है। हाईकोर्ट के इस निर्णय से सभी सामान्य वर्ग के शासकीय कर्मचारियों के पदोन्नति के रास्ते खुल गए है। इससे पूर्व 16 अप्रैल 2019 को न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी ने याचिका क्रमांक 13241/2017 में आदेश पारित करते हुए फैसले की कंडिका 10 में निर्देशित किया है कि सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों की पदोन्नति में कोई बाधा नहीं है।
पदोन्नति पर सरकार नहीं ले रही निर्णय
उच्च न्यायालय जबलपुर के धीरेंद्र चतुर्वेदी विरुद्ध मध्य प्रदेश शासन याचिका में दिए इस फैसले के आधार पर अब प्रदेश के अनारक्षित संवर्ग के कर्मचारी इस फैसले को आधार बनाकर उच्च न्यायालय से ऐसे ही याचिकाएं लगाकर पदोन्नति के आदेश प्राप्त कर सकेंगे। देखना यह होगा कि या मध्यप्रदेश सरकार उसके पूर्व ही इस आशय का निर्णय ले लेंगी कि भारत सरकार के निर्देशों के अंतर्गत अनारक्षित संवर्ग के कर्मचारियों की पदोन्नति पर लगी रोक हटा दी जाए अथवा वह इन संवर्गों के कर्मचारियों को उच्च न्यायालय में जाने पर बाध्य करेगी। यदि प्रदेश सरकार ऐसा निर्णय लेती है तो अनारक्षित वर्ग के कर्मचारियों की भी अनारक्षित वर्ग के पदों पर पदोन्नति के रास्ते खुल जाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट के बहाने सरकार ने पदोन्नति पर लगाई है रोक
वर्तमान में मध्यप्रदेश सरकार ने एसएलपी ई- 395400000-2016 -आरबी राय विरुद्ध मध्य प्रदेश शासन में उच्चतम न्यायालय द्वारा यथास्थिति बनाए रखने के आदेश का हवाला देते हुए आरक्षित एवं अनारक्षित सभी वर्ग के कर्मचारियों की पदोन्नति पर रोक लगाई हुई है। जस्टिस द्विवेदी ने अपने आदेश में लिखा है कि भारत सरकार ने अपने परिपत्र दिनांक 15 जून 2018 में केंद्र शासन के सभी मंत्रालयों तथा राज्य सरकारों के मुख्य सचिव को लिखा है कि अनारक्षित श्रेणी के अधिकारियों की पदोन्नति पर उच्चतम न्यायालय से कोई रोक नहीं है। अनारक्षित श्रेणी के अधिकारियों के पदोन्नति आदेश में यह लिखा जा सकता है कि पदोन्नति उच्चतम न्यायालय के एसएलपी 31288201 सेवन में पारित होने वाले अंतिम आदेश के अधीन रहेगी। उल्लेखनीय है कि इस आदेश में उच्च न्यायालय के एसएलपी 31288201 सेवन के आदेश का उदाहरण दिया गया है। जिसमें यह निर्देश दिए हैं कि याचिका के निराकरण तक आरक्षित संवर्ग के अधिकारियों को आरक्षित संवर्ग में तथा अनारक्षित संवर्ग के अधिकारियों को अनारक्षित संवर्ग में पदोन्नत किया जा सकता है। आरबी राय प्रकरण में यथास्थिति बनाए रखने के आदेश इस दृष्टि से दिए गए थे कि मध्य प्रदेश सहित अनेक राज्य सरकारों द्वारा एम नागराज विरुद्ध केंद्र सरकार डल्यू पी 61 2002 में दिए गए सिद्धांतों के विरुद्ध अपात्र कर्मचारियों को पदोन्नति दे दी गई थी। उन्हें उनके मूल पद पर प्रत्यावर्तित करने की स्थिति न बने। नागराज मामले में 5 जजों की ही एक संविधान पीठ ने फैसला दिया था कि सरकारी नौकरियों में पदोन्नति में अनुसूचित जाति/ जनजाति वर्गों को संविधान के अंतर्गत आरक्षण दिया जा सकता है।

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