जी हां.. बंद है परियोजना, 50 करोड़ का नुकसान

Yes .. Project is closed, loss of 50 crores

भोपाल/प्रणव बजाज/बिच्छू डॉट कॉम। प्रदेश को बिजली की बड़ी स्रोत संत सिंगाजी ताप बिजली परियोजना के फेस-2 की दो यूनिटें बीते लंबे समये बंद पड़ी हुई हैं, जिससे अब तक करीब पचास करोड़ का नुकसान हो चुका है। इन यूनिटों के बंद हुए करीब साढ़े तीन माह से अधिक का समय होने के बाद भी अब तक इन्हें शुरू नहीं किया जा सका है। दरअसल इसकी जो वजह बताई गई है उसके मुताबिक 3 नंबर यूनिट टरबाइन रोटर की ब्लेड टूटने व 4 नंबर की टरबाइन में वाइब्रेशन होने के चलते बंद की गई है। अब इस मामले की जांच के लिए ऊर्जा विभाग ने दो टीमें बनाईं, लेकिन एक भी टीम इतने समय में जांच पूरी नहीं कर सकी है। खास बात यह है कि यह दोनों यूनिट ऐसे समय बंद हुई हैं, जब प्रदेश में रबी सीजन के चलते बिजली की मांग बनी हुई है। कहा जा रहा है कि इस परियोजना में परफॉर्मेंस गारंटी टेस्ट के दौरान 660 मेगावाट की 3 नंबर की सुपर क्रिटिकल यूनिट की टरबाइन में वाइबे्रशन हुआ था, जिसके चलते ही इसे तत्काल बंद करना पड़ा। खास बात यह है कि यूनिट में आयी इस गड़बडी का पता तक पॉवर जनरेशन कंपनी के इंजीनियर लगा ही नहीं सके। इसके बाद इसमें जापान के इंजीनियरों की मदद लेना पड़ी। उनकी सलाह पर जब टरबाइन को खोला गया, तब पता चला कि उसके रोटर की ब्लेड टूटी हुई है। इसके तीन-चार दिन बाद ही 660 मेगावाट की ही 4 यूनिट में भी वाइबे्रशन हो गया , जिसके चलते उसे भी बंद करना पड़ गया।
तय नहीं हो सकी अब तक लापरवाही
इस मामले में ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव संजय दुबे ने जांच के लिए अलग से एक टीम गठित की है। इसमें एनटीपीसी के इंजीनियर शामिल किए गए। अब तक हालांकि यह टीम किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी हैं, इसलिए लापरवाही किसकी है, यह अभी तक पता नहीं चल सका है।
निर्माता कंपनी पर नहीं कर रहे कार्रवाई
सिंगाजी परियोजना में फेस-2 की दोनों सुपर क्रिटिकल यूनिट का निर्माण एलएंडटी पॉवर नामक कंपनी ने किया था। खास बात यह है कि इसके निर्माण करने की अवधि पूरी होने के बाद भी कई काम अभी भी पूरे नहीं हुए हैं। इसके बाद भी इस कंपनी के अफसरों ने दबाव डालकर 3 नंबर यूनिट के पीजी टेस्ट करावाये, जिससे यह यूनिट बंद हो गई। टेस्ट के दौरान पॉवर जनरेशन कंपनी के साथ एलएंडटी पॉवर के इंजीनियर भी मौजूद थे। टरबाइन में वाइब्रेशन व रोटर खराब होने के मामले में अब तक कंपनी के अफसरों की जिम्मेदारी तय नहीं की गई है। इस मामले में एलएंडटी के अफसर दोषी होने के बाद भी सारा दोष जनरेशन कंपनी इंजीनियरों पर डालने की तैयारी कर ली गई है।

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