जी हां..अब बलात्कार में करानी होगी डीएनए जांच

Yes, now DNA investigation will have to be done in rape

भोपाल/प्रणव बजाज/बिच्छू डॉट कॉम। उच्च न्यायालय जबलपुर द्वारा दुष्कर्म के मामलों में डीएनए नहीं कराने वाले 1235 पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही के निर्देश देने की सख्ती के बाद अब पुलिस विभाग ने हर दुष्कर्म के मामले में डीएनए कराने का फैसला कर लिया है। यह बात अलग है कि हाईकोर्ट की कार्रवाई के निर्देश के बाद पुलिस मुख्यालय ने विवेचकों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगकर जायज कारण बताने वाले अधिकांश विवेचकों को अभयदान दे दिया, जबकि कुछ के ही खिलाफ विभागीय कार्यवाही की गई। दरअसल हाईकोर्ट में पेश की गई एक रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ था कि 1 जुलाई 2018 से लेकर 31 मार्च 2019 के बीच राज्य में दुष्कर्म की कुल 4359 वारदातें दर्ज हुईं। इनमें से 731 प्रकरणों में आरोपियों का डीएनए का टेस्ट ही नहीं कराया गया। जबकि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत दुष्कर्म के मामलों में आरोपियों का अनिवार्य रूप से डीएनए टेस्ट कराया जाना चाहिए। गौरतलब है कि रीवा जिले की त्योंथर तहसील के जनेह थानांतर्गत निवासी सूरजपाल आदिवासी ने बलात्कार के मामले में जमानत पाने के लिए हाईकोर्ट में अर्जी दायर की थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि इस मामले में डीएनए जांच नहीं कराई। इसके बाद कोर्ट ने डीजीपी से राज्यभर की रिपोर्ट बुलवाकर पूछा था कि ऐसे कितने दुष्कर्म के मामले हैं, जिनमें आरोपियों का डीएनए नहीं कराया गया? राज्य सरकार की ओर से हाईकोर्ट में पेश की गई रिपोर्ट में बताया गया कि करीब 2 साल के अंदर 731 दुष्कर्म के मामलों में आरोपियों के डीएनए टेस्ट नहीं कराए। इस पर न्यायालय में पेश की गई रिपोर्ट में सरकार ने बताया था इसके लिए 1235 पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की गई।
देश में मप्र में बच्चियों से दुष्कर्म सर्वाधिक
एनसीआरबी द्वारा जारी किए गए आंकड़ों में बीते साल मप्र में 214 दलित बच्चियों के साथ दुष्कर्म होना बताया गया है। इस मामले में महाराष्ट्र दूसरे नंबर पर है। वहां 181 मामले बताए गए हैं। इस मामले में 101 मामलों के साथ हरियाणा तीसरे स्थान पर है। बीते साल देशभर में दलित बच्चियों के साथ दुष्कर्म की कुल 1116 घटनाएं हुईं। इसी तरह से इस वर्ग की बच्चियों से छेड़छाड़ में भी मप्र पहले स्थान पर है। यहां 114 दलित बच्चियां छेड़छाड़ का शिकार बनी। इस मामले में 90 मामलों के साथ उप्र दूसरे (90), 81 मामलों के साथ तो महाराष्ट्र तीसरे स्थान पर है। पूरे देश में दलित बच्चियों के साथ छेड़छाड़ की 437 घटनाएं बताई गई हैं। इसी तरह से बीते साल दुष्कर्म की सबसे अधिक घटनाएं मप्र में 5600 से अधिक हुई हैं।
इन तीन सालों में 26 को फांसी की सजा
पूर्व की भाजपा सरकार में 4 दिसंबर 2017 में 12 साल से कम उम्र की बच्चियों से दुष्कर्म के मामलों में आरोपियों को फांसी की सजा का कानूनी प्रावधान किया गया था। इसके बाद से प्रदेश में विभिन्न न्यायालयों से अब तक 26 लोगों को फांसी की सजा सुनाई गई है। इन मामलों में अब ऊपरी अदालतों में अपील की गई है। इनमें से 22 अपराधों में न्यायालयों द्वारा दी गई सजा के मामलों में उच्च न्यायालय ने 6 प्रकरणों में दिए गए मृत्युदंड को यथावत रखा गया है।

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