नया अधिनियम लागू होने से बढ़ा पिछड़ा वर्ग आयोग का दायरा, हुआ पावरफुल

 मप्र पिछड़ा वर्ग आयोग

भोपाल/राजीव चतुर्वेदी/बिच्छू डॉट कॉम। प्रदेश सरकार ने अब मप्र पिछड़ा वर्ग आयोग को और अधिक पॉवरफुल बनाते हुए उसका दायरा बढ़ा दिया है। इसके लिए राज्यपाल द्वारा राज्य सरकार के संशोधन अधिनियम को मंजूरी प्रदान कर दी गई है। इसके बाद इसे लागू करने के लिए अधिसूचना जारी कर दी गई है। इसके साथ ही आयोग को अब यह अधिकार मिल गए हैं कि सरकार इससे बगैर परामर्श के इस वर्ग को लेकर कोई भी नीति या फिर किसी भी निर्णय को अंतिम रूप नहीं दे सकेगी। खास बात यह है कि नई संशोधित नियमों के तहत अब इस आयोग में गैर पिछड़ा वर्ग के दो लोगों को बतौर सदस्य बनाने का मौका मिल सकेगा।  इसकी वजह से अब इस आयोग को नए सिरे से गठित करने का भी रास्ता खुल गया है।  
इसके साथ ही आयोग को अब यह अधिकार भी मिल गया है कि अगर सरकार द्वारा कोई ऐसा निर्णय लिया जाता है या फिर कदम उठाया जाता है जिससे की पिछड़े वर्ग के हितों पर किसी तरह का प्रतिकूल असर पड़ रहा है तो आयोग इस संबंध में सरकार को पुर्ननिर्णय के साथ ही जरुरी अनुशंसाएं भी करने के लिए पात्र हो गया है। इसके साथ ही अब इसका नए सिरे से गठन करने का रास्ता खुल गया है। प्रदेश की पूर्व की भाजपा सरकार द्वारा पहले इस संशोधन अधिनियम को आम विधानसभा चुनाव से पहले इस वर्ग को लुभाने के लिए अध्यादेश के जरिए लागू कर दिया था। इसके बाद इस बजट सत्र के दौरान विधानसभा में पारित कराने के बाद राज्यपाल को भेजा गया था। हाल ही में इसे राजभवन द्वारा मंजूरी प्रदान की गई है।
इन्हें होगी सदस्य बनने की पात्रता
नए प्रावधान लागू होने के बाद पूर्व की तरह अब भी आयोग में पांच सदस्य नियुक्त हो सकेंगे। इनकी नियुक्ति पूर्व की ही तरह राज्य सरकार द्वारा की जाएगी। इन पांच सदस्यों में से एक सदस्य अध्यक्ष और एक सदस्य को उपाध्यक्ष बनाया जा सकेगा। खास बात यह है कि इनमें से तीन सदस्य पिछड़ा वर्ग के होंगे, जिसमें से एक महिला सदस्य का होना अनिवार्य कर दिया गया है। इसी तरह से अन्य दो सदस्य किसी भी वर्ग के हो सकते हैं।  

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