प्रदेश के कई जिलों के गांवों में पानी का संकट गहराया

मध्यप्रदेश

भोपाल/रवि खरे/बिच्छू डॉट कॉम।  मध्यप्रदेश में कई जिलों के गांवों में पीने के पानी की बड़ी समस्या  है। यही नहीं ग्रीष्मकाल में तो यह समस्या विकराल रूप ले लेती है। फिर चाहे शहर हो या गांव सब दूर सिर्फ और सिर्फ एक ही चिंता पानी की रहती है। वहीं शहर में विभिन्न स्रोत होने के बाद भी कई शहरी बाहरी बस्तियों में ऐसे हालात बन जाते हैं जहां दिन तो दिन रात में भी रहवासी पेयजल की व्यवस्था में ही जुटे रहते हैं। प्रदेश के 25 जिलों के करीब सवा सौ गांव में नल जल योजनाओं के बंद होने से पीने के पानी के साथ ही बिजली का संकट बना हुआ है। हालांकि ऐसा नहीं है कि सरकार पानी मुहैया कराने के इंतजाम नहीं करती है।
हर साल इसके लिए काम होता है करोड़ों रुपए पानी का इंतजाम करने में बहा दिए जाते हैं लेकिन हकीकत कुछ और ही है। दरअसल गांवों में यह समस्या ज्यादा है जहां आज भी कई किलोमीटर दूर से लोगों को पानी लाना पड़ता है। दरअसल कुछ बस्तियां ऐसी है, जहां पानी की किल्लत अधिक है। ऐसे परिवारों में कामकाज करने वाले लोग सुबह काम पर जाने से पहले पानी भरने के लिए भटकते हैं तो फिर शाम को वापस आने के बाद भी वही पानी को भरने में जुट जाते हैं।  इसके अलावा महिलाएं एवं बच्चे भी पानी की परेशानी से जूझते हुए पानी भरने के लिए भटकते देखे जाते हैं। इन बस्तियों में समय भले ही सुबह, दोपहर, शाम और रात हो हर समय पानी भरने वाले दिखाई देते हैं।
भू-जल स्तर गिरना भी कारण
प्रदेश के कई जिलों में भूजल स्तर लगातर गिरने से यह समस्या और बढ़ती जा रही है।  हैंडपंप एवं अन्य जल स्रोत दम तोड़ रहे हैं। यही नहीं इन गांवों के लोग अब जल्दी उठने लगे हैं। कारण पानी का इंतजाम करने के लिए इन्हें दूर से पानी लाना पड़ रहा है। पेयजल की व्यवस्था करने के लिए महिलाएं भी पुरुषों की जद्दोजहद में लगी हुई हैं। पीएचई विभाग के मुताबिक अकेले अशोकनगर जिले में ही 335 हैंडपंप बंद पड़े हैं। जिनमें से ढाई सौ हैंडपंप जलस्तर घटने से सूख चुके हैं। वहीं करीब साढ़े छह सौ में से 12 सिंगल फेस पंप भी बंद पड़े हुए।
इसके अलावा 155 में से 10 नल जल योजनाएं भी बंद पड़ी है। विभाग के मुताबिक बीते वित्त वर्ष 2019-20 में जिले में अब तक करीब ढाई सौ नए हैंडपंप लगाए जा चुके हैं और करीब दो हजार हैंडपंपों को सुधारा गया है। इनमें से 840 हैंडपंपों में 2300 मीटर पाइप लाइन बढ़ाई गई है, लेकिन गांव में पानी के हालात बदतर है। हालत यह है कि जिले में 350 हैंडपंप सूख चुके हैं और 150 हैंडपंपों में लाइन से नीचे पानी चला गया है। इससे जिले के करीब सवा सौ गांवों में पेयजल की समस्या विकराल हो चुकी है और ग्रामीणों को डेढ़ से दो किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ रहा है।
बड़वानी जिले में हालात गम्भीर
इसी तरह प्रदेश के बड़वानी जिले में भी पानी की किल्लत बनी है। जिले के ग्राम बलवारी की कला बाई को रोज पांच सौ मीटर से दूर से बमुश्किल पीने का पानी लाना पड़ रहा है। इसी गांव के कन्हैया को अपने कई काम छोड़ कर पाने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती है। पिंटू ग्रेवाल कहते हैं कि नल जल योजना का बिल जमा नहीं होने से कनेक्शन काट दिया है। इसलिए पानी की समस्या हो गई है। रोजगार सहायक सीताराम का भी कुछ इसी तरह का कहना है। उन्होंने बताया कि तीन चार दिन के लिए कनेक्शन जोड़ दिया गया था लेकिन बकाया पूरा जमा नहीं होने से कनेक्शन फिर काट दिया है।
बिजली बिल जमा नहीं हुए तो काट दिए नल जल कनेक्शन
बिजली बिल जमा नहीं होने से नल जल कनेक्शन काट दिए गए हैं। यही नहीं हालात यह बन गए कि बिजली बिल बकाया को लेकर बिजली अफसर पर पंचायतें आमने-सामने तक आ गए। वोल्टेज की समस्या, पाइप लाइन क्षतिग्रस्त होने, ट्रांसफार्मर का जलना, गांव में बिजली की समस्या, स्थाई कनेक्शन ना होना, लाइन विस्तार आदि नहीं होने की वजह से कई जिलों की नल जल योजनाएं बंद हो गई हैं। जिन जिलों में नल जल योजनाएं बंद हुई उनमें बड़वानी, खंडवा, झाबुआ, धार, होशंगाबाद, विदिशा शाजापुर दतिया गुना अशोकनगर, शिवपुरी, भिंड, सागर संभाग, कटनी, मंडला, भोपाल, रायसेन, राजगढ़ और विदिशा जिले शामिल है। बड़वानी जिले के एक कलवारा के ग्राम सचिव मोहन राठौर का कहना है कि साढ़े सात लाख बिजली का बिल बकाया है। दो माह से नल जल योजना बंद थी। कुछ राशि जमा करने से फिलहाल योजना चालू कर दी है। ग्राम पंचायत सुखपुरी के सचिव हरिराम का कहना है कि उन्नीस लाख रुपए जमा करना है। एक लाख अस्सी हजार रुपए जमा किया है। विभाग ने आठ दिन का अल्टीमेटम दिया है। इसी तरह धार जिले के बलवारी गांव के सचिव ने बताया कि विद्युत विभाग वाले कह रहे हैं कि 3.20 लाख बकाया है। हालांकि हमने 2.4 लाख रुपए जमा कर दिए है लेकिन विभाग हिसाब नहीं दे रहा। कनेक्शन कटा हुआ है, तीन माह से लोग परेशान हैं।

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