हाटपिपल्या में मतदाताओं ने साधी चुप्पी, बढ़ी धड़कनें

Voters in silence in Hatpipalya, increased heartbeat

भोपाल/प्रणव बजाज/बिच्छू डॉट कॉम। भाजपा व कांग्रेस के अपने-अपने जीत के दावों के बीच देवास जिले की हाटपिपल्या विधानसभा सीट पर मतदाताओं ने पूरी तरह से चुप्पी साध ली है। मतदाताओं के रुख का पता नहीं चल पाने से इस सीट पर चुनावी मैदान में उतरे भाजपा के  मनोज चौधरी और कांग्रेस के राजवीर सिंह बघेल की धड़कने बढ़ गई हैं। यह दोनों प्रत्याशी अब अपनी पूरी ताकत लगा रहे हैं।
दरअसल यहां पर कांग्रेस के टिकट पर जीते मनोज चौधरी के विधायक पद से इस्तीफा देकर भाजपा में जाने की वजह से उपचुनाव हो रहा है। यह सीट उस समय बेहद चर्चा में आयी थी, जब यहां के पूर्व विधायक और पूर्व की शिव सरकार में मंत्री रह चुके भाजपा के दिग्गज नेता रहे पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कैलाश जोशी के पुत्र दीपक जोशी ने चौधरी को प्रत्याशी बनाए जाने के विरोध में झंडा बुलंद कर लिया था। अब उपचुनाव के मतदान में कुछ ही दिन रह गए हैं, ऐसे में अब जनता अपना फैसला गुपचुप सुनाने की तैयारी कर चुकी है। जनता की खामोशी से पता चलता है कि अब वह तीन नवंबर को मतदान कर अपना फैसला देगी। ऐसे में यह अनुमान लगाया जाना कठिन हो गया है कि यहां पर भाजपा प्रत्याशी मनोज की चौधराहट बरकरार रहेगी या फिर जनता यहां की कमान कांग्रेस प्रत्याशी राजवीर सिंह बघेल को सौंप देगी। फिलहाल इस सीट पर दोनों प्रत्याशियों के बीच कांटे का मुकाबला बना हुआ है। मतदान का समय जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, सियासी सरगर्मी भी बढ़ती जा रही है।  इस सीट का गठन 1977 में हुआ था। यह सीट वर्ष 2008 के परिसीमन में यह आरक्षित से सामान्य हुई थी। इसके बाद से ही इस सीट पर दोनों प्रमुख राजनीतिक दल कांग्रेस और भाजपा का ही प्रभाव रहा है। इस सीट पर कभी भी कोई तीसरी ताकत नजर नहीं आयी है।
सीट के गठन से लेकर अब तक यहां पर दस चुनाव हो चुके हैं। इसमें चार बार कांग्रेस व छह बार भाजपा को जीत हासिल हुई है। खास बात यह है कि वर्ष 1977 और 1980 में लगातार दो बार यहां से  कांग्रेस के तेज सिंह सेंधव ने जीत दर्ज की थी, लेकिन उसके बाद से कोई भी उम्मीदवार लगातार दो बार चुनाव नहीं जीत सका था, लेकिन इस मिथक को तत्कालीन मंत्री दीपक जोशी ने तोड़ा था। दीपक पहली बार पिता की पारंपरिक देवास की बागली सीट से चुनाव जीते थे। इसके बाद यह सीट 2008 के परिसीमन में आरक्षित हो गई थी , जिसके चलते दीपक ने हाटपिपल्या सीट से चुनाव लड़कर जीत हासिल की थी। उस समय उन्होंने महज 220 मतों के अंतर से जीत हासिल की थी। इसके बाद 2013 में भी वे 6175 मतों से जीत कर यहां से लगातार दो बार चुनाव जीतने का मिथक तोड़ने में कामयाब रहे थे। इस सीट पर लगातार तीसरे चुनाव में उतरे दीपक को 2018 में कांग्रेस के मनोज चौधरी से 13 हजार 500 से अधिक मतों से हार का सामना करना पड़ा। इस सीट पर खाती, राजपूत, सेंधव, मुस्लिम व दलित मतदाताओं का दबदवा है। इस सीट पर यह पहली बार है कि जब खाती व राजपूत समाज के युवा चेहरों के बीच मुकाबला हो रहा है। खास बात यह है कि दोनों दलों के उम्मीदवारों को राजनीति विरासत में मिली है। कांग्रेस प्रत्याशी राजवीर सिंह बघेल के पिता ठाकुर राजेंद्र सिंह बघेल पूर्व में विधायक रह चुके हैं। यह राजवीर का पहला विधानसभा चुनाव हैं। उनका मुकाबला भाजपा के मनोज चौधरी से हो रहा है। चौधरी के पिता नारायण सिंह जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुके हैं। वे खातेगांव और हाटपिपल्या से एक- एक बार विधानसभा का चुनाव जरुर लड़ चुके हैं , लेकिन दोनों ही बार उन्हें जीत नसीब नहीं हो सकी थी। इस सीट पर कांग्रेस के पक्ष में पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ तो वहीं भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, राज्यसभा सदस्य ज्योतिरादित्य सिंधिया, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा प्रचार कर चुके हैं। इसके बाद भी यहां के मतदाता हार-जीत को लेकर चुप्पी तोड़ते नजर नहीं आ रहे हैं।

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