भू-स्वामी का अधिकार पाने के लिए करना होगा ग्रामीणों को लंबा इंतजार

राजस्व विभाग

-राजस्व विभाग के अमले को कोरोना महामारी से निपटने के काम में लगा दिए जाने से रुक गया काम

भोपाल/रवि खरे/बिच्छू डॉट कॉम।
मप्र के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को अभी अपनी पुश्तैनी जमीन और मकान का भू स्वामी अधिकार पाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। इसकी वजह है इसके सर्वे के काम में लगाए गए अमले को अब कोरोना महामारी से निपटने का जिम्मा दिया जाना। इस वजह से यह काम अब पूरी तरह से मंद पड़ गया है। दरअसल ग्रामीण इलाकों में आमआदमी द्वारा अपनी पुश्तैनी जमीन पर मकान आदि का निर्माण कर लिया जाता है, लेकिन उसके पास उसके दस्तावेज नहीं होते हैं, ऐसे में कानूनन  रुप से वह उस  जमीन का मालिक नहीं बन पाता है। यही वजह है कि प्रदेश की शिव सरकार ने इसके लिए सर्वे कराकर ग्रामीणों को जमीन का कानूनी हक दिलाने के लिए भू स्वामी अधिकार देने का एलान किया है। भू अधिकार मिलने की वजह से वे उस पर न केवल कर्ज लेने के लिए पत्र हो जाएंगे, बल्कि कई अन्य तरह से भी उसका उपयोग कर सकेंगे।
गौरतलब है कि मप्र में इस साल कुल 54903 गांवों में से सर्वे के लिए 22500 गांवो का लक्ष्य तय किया था, लेकिन कोरोना के चलते उसके इस साल पूरा होने के आसार नहीं हैं। इसकी वजह से शेष गांवो का सर्वे भी देर से हो सकेगा। माना जा रहा है इस बीच प्रदेश में नगरीय निकाय, पंचायत और मंडी जैसी संस्थाओं के चुनाव होने है , जिसमें राजस्व विभाग के अमले की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। चुनावी काम में इस अमले की तैनाती होने से कम से कम तीन माह की और देरी हो सकती है। इस वजह से माना जा रहा है कि प्रदेश में इतनी बड़ी संख्या में गांवों का सर्वे का काम दो साल में पूरा होना संभव नहीं है। इस बीच प्रदेश में विधानसभा के आम चुनाव भी 2023 में होने हैं। यही वजह है की माना जा रहा है कि ग्रामीणों को भू स्वामी बनने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।  इसके लिए पूर्व की शिव सरकार द्वारा प्रदेश में चुनावी आचार संहिता लगने से पहले नियम जारी किए जा चुके थे, लेकिन चुनावी परिणाम भाजपा सरकार के पक्ष में आने की वजह से प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बन गई थी। इस मामले में नाथ सरकार ने कोई रुचि नहीं ली जिसकी वजह से यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया था। दरअसल इसके लिए सरकार द्वारा मप्र भू राजस्व संहिता, भू सर्वेक्षण तथा भू अभिलेख नियम 2020 में किए गए संशोधन के आधार पर दिए जाने वाले भू अधिकार के तहत राजस्व विभाग से मिलने वाले दस्तावेजों की मान्यता ठीक उसी तरह से होगी, जैसे शहरी इलाकों में नगर एवं निवेश के तहत विकसित कालोनियों की जमीन की होती है।
गांव की सीमा का निर्धारण
वर्ष 2020 में किए गए संशोधन किए गए प्रावधानों में अब गांवो की सीमा को लेकर भी बंदिश तय कर दी गई है। इसके मुताबिक अब किसी गांव की अधिकतम सीमा 800 हेक्टेयर तक की तय कर दी गई है। अगर किसी गांव की सीमा इससे अधिक होती है तो दूसरे गांव की सीमा में शामिल करने का विकल्प तय कर दिया गया है। खास बात यह है कि सर्वे के बाद सरकार द्वारा ग्रामीणों को पहली बार भू अधिकार पुस्तिका फ्री में दी जाएगी। इसके बाद अगर किसी व्यक्ति को दूसरी बार पुस्तिका लेना होगी तो उसे उसके लिए शुल्क देना होगा। इसके अलावा नए नियमों में आबादी, कृषि और दखल रहित भूमि के नक् शे इलेक्ट्रानिक स्वरुप में करना भी तय किया गया है।

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