डेढ़ लाख के एवज में आई तीन सौ बोरियां, उपज खरीदी बंद

Three hundred sacks came in lieu of one and a half million, the produce stopped buying

भोपाल/राजीव चतुर्वेदी/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश सरकार और उसके मुखिया भले ही किसान हितैषी होने के कितने ही दावे करें , लेकिन अफसर अब भी उनके दावों को हवाहवाई बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। इसका उदाहरण है ग्वालियर चंबल अंचल। इस अंचल में किसानों से समर्थन मूल्य पर उपज खरीदी बंद पड़ी हुई है। इसकी वजह है वारदाने का न होना। दरअसल इस अंचल में अभी डेढ़ लाख वारदाने की जरुरत है और आई सिर्फ तीन सौ बोरियां। इसके चलते ज्वार, धान और बाजरा की खरीद लगभग बंद पड़ी हुई है। किसानों की यह परेशानी और बढ़ने की वजह है कृषि उपज मंडी में बैठे लायसेंसी व्यापारियों द्वारा समर्थन मूल्य पर खरीदी नहीं किए जाने से। इस पूरे मामले में अफसरों की बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। संबंधित अफसरों ने इन फसलों की खरीद के लिए पहले से वारदाने की व्यवस्था करना मुनासिब नहीं समझा, जिससे यह हालात बने हैं। गौरतलब है कि तीन दिन पहले बड़ागांव (मुरार) में खरीदी बंद होने पर परेशान किसानों ने चक्काजाम कर दिया था। इसके बाद वारदाना मंगाया गया तब उसके अगले दिन खरीदी शुरू हो पाई। खास बात यह है कि वारदाना नहीं होने से खरीदी नहीं होने की बात किसानों से छिपाकर रखी गई थी, जिसकी वजह से किसानों ने चक्काजाम कर दिया था।
500 गठान की जरूरत
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग को ज्वार, बाजरा और धान उपार्जन के लिए डेढ़ लाख बोरी यानी पांच सौ गठानों की जरुरत है। इसके एवज में महज तीन सौ बोरियों को ही मंगाया गया है। वारदाने की व्यवस्था न कर पाने के लिए संबंधित अफसरों द्वारा ट्रेन न चलने से वारदाने की व्यवस्था न हो पाने का बहाना बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि इस हालत में ट्रकों से माल मगाया जा रहा है। जिसकी वजह से यह संकट बना हुआ है।
जबलपुर में भी 23 हजार गठान वारदाना चाहिए
जबलपुर जिले में 94 केंद्र बनाए गए हैं, जिसमें चार लाख 80 हजार मैट्रिक टन धान की खरीदी का लक्ष्य अनुमानित है, वहीं जिले में 10000 गठान की व्यवस्था अभी हुई है, जिले के खरीदी केंद्रों में करीब 23 हजार गठान की आवश्यकता है। अभी साढ़े 3 हजार गठान मिली हैं। आवश्यकता की पचास फीसदी गठानें मिलर्स से ली जानी है, जबकि उतनी ही गठानों की व्यवस्था सरकार द्वारा की जाएगी। जबलपुर में सिर्फ धान की खरीदी की जा रही है।
समर्थन मूल्य पर खरीद नहीं
किसान केशव सिंह बघेल का कहना है कि मंडी से समर्थन मूल्य पर ज्वार की खरीद नहीं हो रही है। समर्थन मूल्य पर ज्वार का भाव 2620 रुपए प्रति क्विंटल है जबकि मंडी में लायसेंसी व्यापारी 2000 तक का ही भाव दे रहे हैं इसीलिए किसानों के सामने निजी वेयर हाउस पर माल बेचने नौबत आ गई है।

Related Articles