प्रदेश के करोड़ों कर्जदारों पर डिफाल्टर होने का खतरा

Threat of defaulting on crores of borrowers in the state

भोपाल/रवि खरे/बिच्छू डॉट कॉम। कोरोना संकट ने आम आदमी के साथ ही बैंकिंग सेक्टर को भी बुरी तरह से प्रभावित किया है। इसकी वजह है वे लोग जो बैंको से कर्ज लेने के बाद किस्त नहीं चुका पा रहे हैं। इसकी वजह से इन कर्ज लेने वालों पर पूरी तरह से डिफाल्टर होने का खतरा पैदा हो गया है।
इस खतरे के दायरे में आने वाले कर्ज लेने वालों की संख्या करीब तीन करोड़ से अधिक बताई जा रही है। यह हालात प्रदेश में तब हैं जबकि सरकार द्वारा इन हालातों से बाहर निकलने के लिए कई तरह के आर्थिक सुधारों के प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि इस साल के पहले छह माह में बने इन हालातों से निपटने के लिए सरकार के आर्थिक पैकेज की सफलता का सही पता बैंकों की दिसम्बर तक की इस माह आने वाली रिपोर्ट से चल सकेगा। अगर कृषि क्षेत्र की बात की जाए तो इस सेक्टर को कृषि और ग्रामीण विकास द्वारा राहत देने का काम किए जाने के बाद भी किसानों को राहत नहीं मिल सकी है। इस वजह से प्रदेश में 84.72 लाख किसान बैंकों का 110774 करोड़ रुपए का भुगतान नहीं कर सके हैं। इसी तरह से सरकार जिन कमजोर वर्गों के लिए योजनाओं के जरिये रोजगार के अवसर बढ़ाने का काम करती है, उन पर 68809 करोड़ रुपए बकाया है। प्रदेश में इस सेक्टर के तहत आने वाले करीब एक करोड़ लोग प्रभावित हुए हैं। यह बात अलग है कि अब भले ही प्रदेश की अर्थव्यवस्था में सुधार की आशा बंधने लगी है, लेकिन बैंकों की सितम्बर माह तक की रिपोर्ट से साफ हो चुका है कि प्रदेश में 582922 करोड़ रुपए आउट स्टैंडिंग में जा चुके हैं। यह बात अलग है कि अब इन खातों में सुधार की गुंजाइश दिखने से बैंकर्स को आउट स्टैंडिंग में कमी होने की उम्मीद बनने लगी है।
नई तिमाही में सुधार का इंतजार
स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी की रिपोर्ट में बताया गया है कि इस वित्त वर्ष 2020-21 के पहले छमाही में नॉन प्रियॉरिटी सेक्टर, वीकर सेक्टर, प्रियॉरिटी सेक्टर, एमएसएमई और एग्रीकल्चर सेक्टर में आउट स्टैंडिंग 582922 करोड़ रुपए के आंकड़े को छू चुका है। इसका असर 3 करोड़ 50 लाख 32 हजार खातों पर पड़ा। सितम्बर से केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा दी गई सभी सेक्टरों में कामकाज की छूट से अब दिसम्बर की तिमाही में सुधार की आशा जागी है।
आत्मनिर्भर पैकेज से राहत
कोरोना काल में लाकडाउन की वजह से पूरी तरह से ठप हुई अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए उठाए कदमों के बीच आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत राज्य सरकार ने आत्मनिर्भर मप्र के कांसेप्ट पर काम शुरू कर दिया है। इसके तहत किसानों को राहत देने के साथ ही स्ट्रीट वेंडर योजना के तहत रोजगार के लिए दस हजार रुपए का कर्ज दिया जा रहा है। इससे गरीब वर्ग को राहत मिलने के बाद भी अभी यह वर्ग बैंकों का कर्ज चुकाने की स्थिति में नहीं आया है।

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