शहरी क्षेत्र में जमीन खरीदने वालों की रजिस्ट्री के बहाने काटी जाएगी जेब

Those who buy land in the urban area will be deducted on the pretext of registry

– रजिस्ट्री में मकान की निर्माण लागत शामिल किए जाने की वजह से बड़ा अंतर

भोपाल/राजीव चतुर्वेदी/बिच्छू डॉट कॉम। कोरोना संकट के बीच लॉकडाउन रहने से समूचा आर्थिक तंत्र बेहद खराब स्थिति में पहुंच चुका है। अब स्थिति में धीरे -धीरे सुधार हो रहा है, लेकिन अब सरकार अपनी आय वृद्धि के लिए शहरी इलाकों में क्षेत्र में प्लॉटों की रजिस्ट्री में उस पर होने वाले निर्माण लागत को भी शामिल करने जा रही है, जिसकी वजह से रजिस्ट्री कराना महंगा होना तय है। खास बात यह है कि रजिस्ट्री में मकान की निर्माण लागत (कंस्ट्रक्शन कास्ट) 800 से 1200 रुपए वर्गफीट जोड़ने की वजह से खरीददारों की जेब कटना तय है। यही नहीं आम लोग निर्माण लागत से कम कीमत पर प्लाट खरीदते हैं, ऐसे में उनके लिए अब खुद का घर का सपना सपना ही रहने वाला है। नई गाइडलाइन तय करने के पहले इस वर्ष खाली प्लॉट की जानकारी भी जुटाई जाएगी। जिससे पता चलेगा कि किस क्षेत्र में कहां और कितने प्लॉट खाली हैं, इनकी रजिस्ट्री करते समय उस स्थान की कलेक्टर गाइडलाइन और निर्माण कॉस्ट की दरों को शामिल किया जाएगा। ऐसे में शहर के कई इलाकों में तो प्लाटों की रजिस्ट्री बेहद महंगी होना तय है।
अगले माह तय की जानी है नई गाइडलाइन
अगले वित्त वर्ष के लिए दिसंबर माह के अंत तक नई कलेक्टर गाइडलाइन में प्लॉट की नए सिरे से तय की जाएंगी। कुछ माह पूर्व ही निर्माण कॉस्ट में आरसीसी, कच्चे निर्माण की दरें अलग से तय की जा चुकी हैंंं। इसका असर रजिस्ट्री के दौरान शुल्क पर पहले से ही पड़ने लगा है। पहले चुनाव और फिर आम लोगों के विरोध के बाद बीते दो सालों से कलेक्टर गाइडलाइन में जमीनों की दरों में वृद्धि नहीं की जा सकती है। बाजार की स्थिति को देखते हुए दरें यथावत रहने के बाद भी कई जगहों पर तय दर से अधिक कीमत पर रजिस्ट्री हुईं। इसकी वजह से अब प्रशासन ने कहां कितना विकास हुआ। इन सबको लेकर  रजिस्ट्रियां निकलवाकर जांच कराए जाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए आरआई और पटवारी, पटवारी हल्के में जाकर जमीनों का भौतिक सत्यापन कर रिपोर्ट तैयार करने के बाद उसे उप जिला मूल्यांकन समिति के अध्यक्ष और एसडीएम हुजूर को सौंपेंगे।
निर्माण कॉस्ट कम रहने की वजह से राजस्व में कमी  
दो साल पहले कलेक्टर गाइडलाइन में जमीनों की कॉस्ट 20 फीसदी कम करने से निर्माण कॉस्ट की दर एक हजार रुपए से 800 रुपए प्रतिवर्ग फीट हो गई थी , जिसकी वजह से सरकार को मिलने वाले राजस्व में भी कमी आयी है। अब इसमें वृद्धि कर उसे 1200 रुपए प्रतिवर्ग फीट कर दिया गया है। अभी तक यह सिर्फ ये बने हुए भवन पर ली जा रही थी, लेकिन वर्ष 2021-22  की कलेक्टर गाइडलाइन में इसे शामिल कर खाली प्लॉट पर भी लगाने की तैयारी की जा रही है।
फिलहाल ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण कॉस्ट 900 से बढ़ाकर 1100 रुपए, नगर पालिका क्षेत्र में 800 से 980 रुपए और नगर परिषद में 500 से बढ़कर 600 रुपए प्रतिवर्गफीट के हिसाब से कर दी गई है।
डायवर्जन शुल्क न देने वाले बड़े बकायादारों से होगी दो सौ करोड़ की वसूली  
इसके बाद उन बड़े बकायादारों से दो सौ करोड़ की वसूली की जाएगी जो डायवर्जन का सालाना शुल्क अदा नहीं कर रहे हैं। इनसे इसकी वसूली के लिए सख्ती करने की तैयारी है। इसके लिए पहले नोटिस जारी किए जाएंगे , लेकिन उसके बाद भी राशि जमा नहीं की जाती है तो फिर प्रॉपर्टी की कुर्की की जाएगी। इस वसूली के लिए कलेक्टर अविनाश लवानिया ने सभी एसडीएम और तहसीलदारों को डायवर्सन और भू-फाटक और अन्य वसूली के बड़े डिफाल्टरों की सूची बनाकर वसूली के लिए कहा गया है। 

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