बिजली कंपनियों पर होगा निजी क्षेत्र का पूरा कब्जा

The power companies will be in full possession of the private sector

भोपाल/प्रणव बजाज/बिच्छू डॉट कॉम। केंद्र सरकार के इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल के प्रदेश में लागू होने से बिजली कंपनियों पर पूरी तरह से निजि क्षेत्र का कब्जा होना तय है। इसकी वजह से प्रदेश में बिजली क्षेत्र में सरकारी नौकरियों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लग जाएगा। यह बात अलग है कि इस बिल को लेकर विवाद की स्थिति बनी हुई है, लेकिन माना जा रहा है कि प्रदेश में देर सबेर इसका लागू होना तय है। इस बिल के लागू होने से उसमें किए गए प्रावधानों की वजह से बिजली क्षेत्र में निजी क्षेत्र का पूरी तरह से दबदबा हो जाएगा। इसकी वजह है बिजली वितरण कंपनियों का अधिकांश कामकाज निजी क्षेत्रों के जिम्मे हो जाना। इसके बाद कंपनियों के पास केवल निगरानी का काम ही रह जाएगा। यही नहीं इस बिल में बिजली वितरण कंपनियों को बिजली वितरण के लिए सब लाइसेंसी की नियुक्ति का अधिकार भी दिया गया है। सब लायसेंसी भी फ्रेंचाइजी की नियुक्त कर सकता है और पेटी कॉन्टैक्टर की तर्ज पर दूसरे को फ्रेंचाइजी के रुप में काम देने का काम कर सकेगा। वह एक क्षेत्र विशेष में बिजली वितरण के लिए पूरी तरह से जिम्मेदार होगा। यह पूरा खेल बिजली क्षेत्र में सुधार के नाम पर किया जा रहा है। दरअसल केंद्र सरकार इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल-2020 में किए गए इन प्रावधानों को लागू करने के लिए प्रदेश में विद्युत अधिनियम-2003 में संशोधन कर यह नये प्रावधान किए जाएंगे। बिजली वितरण क्षेत्र में सब लाइसेंसी और फें्रचाइजी की नियुक्ति के बाद बिजली कंपनियों के पास काम ही नहीं रहेगा, जिसकी वजह से उन्हें नियमित कर्मचारियों और अधिकारियों की भी कम ही आवश्यकता रह जाएगी।

नियमित कर्मचारियों की भर्ती होगी बंद
इस बिल के लागू होने के बाद कंपनियों को कर्मचारियों की जरुरत नहीं रह जाएगी जिसकी वजह से कंपनियों में कर्मचारियों की भर्ती पूरी तरह से बंद कर दी जाएगी। फिलहाल प्रदेश की तीनों ही कंपनियों में 35 हजार से अधिक अधिकारी – कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें सर्वाधिक कर्मचारी पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में हैं। नई व्यवस्था लागू होने से कम मेन पॉवर की जरूरत रहेगी। इसे कम करने के लिए नियमित अमले के रिटायर होने पर उनकी जगह नई भर्तियां नहीं की जाएंगी। इससे धीरे -धीरे अमला कम होने से बिजली कंपनियों का वेतन – भत्तों पर होने वाला खर्च कम हो जाएगा।

बिलों की वसूली भी रहेगी निजी कंपनियों के जिम्मे
नई व्यवस्था के तहत कंपनियों द्वारा सब लाइसेंसी को बिलों की वसूली का ठेका देने का अधिकार मिल जाएगा। इसके लिए पहले कंपनियों द्वारा पहले संबंधित क्षेत्र से रिकवरी का आंकलन किया जाएगा और उसके बाद वूसली के ठेके के लिए नीलामी की राशि तय की जाएगी। तय राशि देने वाले सब लाइसेंसी को संबंधित क्षेत्र की बिजली वितरण का ठेका प्रदान कर दिया जाएगा। प्रदेश के एक बड़े इलाके में वसूली 65 से 70 फीसदी तक है। ग्रामीण क्षेत्रों के साथ ही ग्वालियर, चंबल और विंध्य क्षेत्र में भी वसूली बेहद कम है। ऐसे में लाइसेंसी को इन क्षेत्रों में मौजूदा वसूली को बढ़ाने और बेहतर बिजली आपूर्ति की गांरटी लेनी होगी। यही काम फ्रेंचाइजी सब लाइसेंसी के लिये भी कर सकेगी। इसमें भी लाइसेंसी को छोटे – छोटे क्षेत्रों के लिये फ्रेंचाइजी नियुक्त करने का अधिकार रहेगा , जो सब लायसेंसी के प्रति जवाबदेह होगी।

बिजली के लिए सौर ऊर्जा पर बढ़ रही निर्भरता
प्रदेश में लगातार होती मंहगी बिजली की वजह से घरों के साथ ही उद्योगों में अब सौर ऊर्जा को लेकर लोगों का रुझान तेजी से बढ़ रहा है। दरअसल मप्र ऐसा राज्य है, जहां पर अन्य पड़ौसी राज्यों की तुलना में सर्वाधिक महंगी बिजली है। यही नहीं मप्र में बीते एक दशक में बिजली की दरें दोगुनी हो चुकी हैं। यही वजह है कि अब प्रदेश के लोगों द्वारा सोलर पैनल लगवाने में रूचि दिखने लगी है। यही वजह है कि अब ऊर्जा विकास निगम भी जल्द ही औद्योगिक क्षेत्र के लिए टेंडर जारी करने की तैयारी मे है। ऊर्जा विकास निगम के पदाधिकारियों के मुताबिक प्रदेश में 2010-11 से अब तक 40 मेगावॉट क्षमता के संयंत्र बिल्डिगों पर लगाए जा चुके हैं। वहीं अब सरकार रैस्को मॉडल के तहत सोलर पैनल लगवा रही है। इसकी खास बात यह है कि पूर्व की निविदाओं में टैरिफ की दर 1.38 रुपए प्रति यूनिट दर आई है। इस मॉडल में पूरा खर्च कंपनी वहन करती है। अब व्यवसायिक संस्थाओं और फैक्ट्रियों में भी इस मॉडल पर सोलर पैनल लगाने की तैयारी है। इसके लिए जल्द ही गोविंदपुरा, मंडीदीप, पीलूखेड़ी, पीथमपुर, मालनपुर, ग्वालियर के लिए टेंडर निकाले जा रहे हैं।

इस तरह से हर साल हुई दर वृद्धि
मध्यप्रदेश में एक दशक में बिजली की दरें दोगुनी हो गई हैं। 2010-11 में घरेलू बिजली की दरें 3.92 और इंडस्ट्री की दरें 5.10 रुपए प्रति यूनिट थी, जो अब बढ़कर दो गुनी हो चुकी है। 2020 में इंडस्ट्री की बिजली दरें 8.71 रुपए प्रति यूनिट और घरेलू दरें 6.55 निर्धारित की गई हैं। यह वृद्धि बिजली कंपनियों के घाटे की भरपाई के लिए की जाती है, हालांकि अधिकारियों के मिस मैनेजमेंट और लापरवाही के चलते ही कंपनियों का घाटा बढ़ रहा है।

सोलर ऊर्जा कई गुना सस्ती
ऊर्जा विकास निगम के मुताबिक उद्योगों को जहां बिजली की दरें 8 रुपए से भी ज्यादा देनी पड़ रही है, वहीं सोलर ऊर्जा उन्हें इससे कई गुना सस्ती पड़ेगी। पिछले दरें सिर्फ 1रुपए 38 पैसा प्रति यूनिट आई है।

पांच साल में हो जाती है लागत की वूसली
सोलर पैनल को अब सीधे ग्रिड से जोड़ा जा रहा है, इसलिए अब घरों के रूफ टॉप सोलर पैनल की जिम्मेदारी पिछले कुछ समय से विद्युत वितरण कंपनियों को सौंप दी गई है। सोलर पैनल से बिजली 25 सालों तक मिलती है और इसके लगाने के खर्च 4 से 5 सालों में बराबर हो जाएगा। एक किलोवॉट सौर ऊर्जा के लिए करीब 10 वर्ग मीटर की जरूरत होगी। 3 किलो वॉट तक के सोलर प्लांट पर 40 फीसदी की सब्सिडी और 3 किलोवॉट के बाद 10 किलोवॉट तक 20 प्रतिशत की सब्सिडी दी जा रही है।
यह मिलती है सरकार से सब्सिडी: 1 किलोवॉट से ऊपर 3 किलोवॉट तक 37000 रुपए प्रति किलोवॉट, 3 किलोवॉट से ऊपर 10 किलोवॉट तक 39800 रुपए प्रति किलोवॉट का खर्च आता है। इसी तरह 10 किलोवॉट से ऊपर 100 किलोवॉट तक 36500 रुपए प्रति किलोवॉट और 100 किलोवॉट से ऊपर 500 किलोवॉट तक 34900 रुपए प्रति किलोवॉट तक खर्च आता है। इस पर सरकार द्वारा सब्सिडी दी जाती है।

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