नए भारत का नया मप्र

आत्मनिर्भर भारत

-कोरोना काल में मप्र में सबसे तेज गति से हुआ विकास
-आज निवेशकों की पहली पसंद बना है मप्र
-आत्मनिर्भर भारत का सपना साकार कर रहा मप्र


देश में कोरोना संक्रमण काल में विकास का पहिया थम सा गया था। लेकिन केंद्र से लेकर राज्य सरकारों ने विकास के प्रयास जारी रखे। पिछले एक साल में राज्यों में हुए विकास कार्यों का आकलन करें तो हम पाते हैं कि कोरोना काल में मप्र में सबसे तेज गति से विकास हुआ है। आज मप्र निवेशकों की पहली पसंद बना हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आत्मनिर्भर भारत का जो अभियान शुरू किया है उसे मप्र साकार कर रहा है।

विनोद उपाध्याय/भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। कोविड-19 की विभीषिका से संघर्ष का एक वर्ष बीत चुका है। इस विभीषिका से लडऩे के लिए सभी राज्यों की सरकारों ने पूरा दम खम लगा दिया था। इस एक साल में राज्यों की परफॉर्मेंस को 9 पैमानों कानून व्यवस्था, किसान की हालत, बुनियादी सुविधाओं, शिक्षा की स्थिति, स्वास्थ्य सेवाओं, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, महिला सुरक्षा, जरूरतमंदों की सरकार तक पहुंच, रोजगार और आस्था पर आंका गया तो इनमें मप्र ने सिद्ध किया कि दृढ़ विश्वास, साफ नीयत और नेक इरादे से काम किया जाए तो सफलता मिलना तय है। मप्र ने इस आपदा में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। कोरोना संक्रमणकाल के एक साल में मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जन-आकांक्षाओं पर खरे उतरे हैं। उन्होंने सक्षम नेतृत्व का परिचय दिया है। शिवराज सुशासन के हिमायती हैं। उन्होंने वित्तीय कमियों की बात न करते हुए आवश्यक कार्यों के लिए बजट व्यवस्था कर समाधान का मार्ग निकाला यही सुशासन है मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने प्राथमिकताएं तय कर आमजन से जुड़ी समस्याओं को तत्परता से हल किया है। चौथी बार मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने मप्र को माफियामुक्त और एक विकसित प्रदेश के निर्माण के साथ नागरिकों को सुशासन देने का संकल्प लिया है। इस संकल्प की पूर्ति के लिए मध्य प्रदेश को कानून-व्यवस्था की दृष्टि से भी मजबूत बनाने के कदम उन्होंने उठाए हैं। इसकी नियमित समीक्षा करते हुए वे खुद इस कार्य में जुट गए हैं।सभी तरह के माफिया के विरुद्ध उनका अभियान तेजी से चल रहा है। चाहे किसी भी तरह के अपराध हों या खनिजों का उत्खनन अथवा अतिक्रमण और मिलावट की शिकायतें,पूरे प्रदेश में अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने का अभियान चल रहा है। प्रदेश की जनता भी यही चाहती है कि कानून-व्यवस्था की स्थिति मजबूत रहे। निर्दोष व्यक्ति को कोई न सताए। परस्पर सद्भाव का वातावरण रहे। असामाजिक तत्व नियंत्रण में रहें। महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण रहे। इन सभी के प्रति मुख्यमंत्री गंभीर हैं। इस तरह वे जन-आकांक्षाओं के अनुरूप शासन संचालन कर रहे हैं।

विकास की राह पर आगे बढ़ता मप्र
विकास की राह पर आगे बढ़ता हुआ यह वही मप्र है, जहां कांग्रेस के 15 माह के शासनकाल के दौरान विकास लगभग ठप पड़ गया था। लेकिन प्रदेश का चौथी बार मुख्यमंत्री बनते ही शिवराज ने विकास को प्राथमिकता में लिया। इस कारण मप्र को ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में देश में चौथा स्थान हासिल हुआ है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के मामले में पहले, दूसरे और तीसरे स्थान पर क्रमश: आन्ध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश व तेलंगाना आए हैं। मप्र ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में तीन पायदान ऊपर छलांग लगाई है। इस रैंकिंग से राज्य में कारोबार करने की संभावना व सहूलियत और ज्यादा बढ़ गई है। देश में कारोबार के माहौल को बेहतर आयाम देने के लिए यह रैंकिंग दी जाती है। कारोबार सुधार की दिशा में की गई सरकारी पहल के आधार पर ही मूल्यांकन होता है। मप्र ने इस दिशा में लगातार तरक्की है। वर्ष 2017-2018 में 22वें स्थान से छलांग लगाकर मप्र सातवें नंबर पर आया था यानी प्रदेश में कारोबारी माहौल बनाने में लगातार सुधार हुआ है। उसके बाद किए कार्यों के आधार पर मप्र ने जबरदस्त सुधार दिखाया है। राज्य ने क्रियान्वयन में सौ प्रतिशत का स्कोर हासिल किया है। इसे शिवराज सरकार की सबसे अहम उपलब्धि माना जा रहा है। बदलते वातावरण का परिणाम है कि आज निवेशकों की पहली पसंद मप्र है।
मुख्यमंत्री ने मप्र में पिछले तीन कार्यकाल और वर्तमान एक वर्षीय कार्यकाल में अनेक नवाचार भी किए हैं। इनमें निर्धारित समय में नागरिक सेवाएं उपलब्ध करवाना, आनंद संस्थान का गठन, बुजुर्गों के लिएतीर्थ-दर्शन योजना का विस्तार, पर्यटन को बढ़ावा, औद्योगिक निवेश में तेजी शामिल है। बिजली-सडक़-पानी जैसे मूलभूत विषयों पर मुख्यमंत्री की गंभीरता साफ तौर पर नजर आती है। उन्होंने समर्थ नेतृत्व का परिचय देते हुए नागरिक सुविधाओं के विकास और विस्तार पर भी विशेष ध्यान दिया है। मुख्यमंत्री ने निरंतर निरीक्षण कर विकास कार्यो को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए हैं। शहरों और ग्रामों में निर्माण कार्य समय-सीमा में और गुणवत्ता के साथ पूरे हो, इसकी चिंता करते हुए मुख्यमंत्री द्वारा प्रतिमास कलेक्टर-कमिश्नर से संवाद प्रारंभ किया गया है।

मप्र में किए गए आर्थिक सुधार
राज्यों को विकास के पैमाने पर आकलन करने पर यह तथ्य सामने आया है कि मप्र में एक साल के दौरान आर्थिक सुधार के क्रांतिकारी प्रयास किए गए। मप्र में मंडी अधिनियम में बदलाव और श्रम कानूनों में परिवर्तन से निवेश को बढ़ाने के ठोस प्रयास हुए हैं। नए वित्तीय संसाधन जुटाएंगे निरंतर मंथन चल रहा है। अधोसंरचना मजबूत करने नए उपाय लागू किए जा रहे हैं ताकि अर्थव्यवस्था का पहिया लगातार चलता रहे। लघु और कुटीर उद्योगों का जाल बिछाया जा रहा है। अभी राज्य के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में गतिविधियां चलने लगी हैं। कृषि क्षेत्र में व्यवस्थाएं मजबूत की गई है। जहां किसान कृषि उपज मंडी जाकर किसान लंबी-लंबी लाइनों में लगते थे, अब किसानों को सौदा पत्रक व्यवस्था के माध्यम से भी फसल बेचने की व्यवस्था सुविधा उपलब्ध हो रही है। ई ट्रेडिंग की सुविधा भी दी जा रही है। वेयर हाउस को क्रय केंद्र घोषित करने और खरीदी केंद्र बढ़ाने की व्यवस्थाओं की किसानों ने सराहना की है। श्रम कानूनों में ऑनलाइन पंजीयन की व्यवस्था की गई। जहां पहले 63 रजिस्टर थे, अब उनके स्थान पर एक ही रजिस्टर की व्यवस्था की गई है। लेबर इंस्पेक्टर के निरीक्षण को समाप्त करने, श्रमिकों को आठ घंटे की जगह 12 घंटे कार्य की सुविधा देकर दोगुना मेहनताना देने और अन्य प्रावधानों से श्रमिक को लाभान्वित करने का कार्य मप्र में किया गया। आर्थिक गतिविधियां आवश्यक हैं।

किसानों की खुशहाली सर्वोच्च प्राथमिकता
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता किसानों की खुशहाली है। मप्र कृषि क्षेत्र में अग्रणी रहे, इसके लिए किसानों को उनकी फसल के उत्पादन का पूरा मूल्य दिलवाने, बिना ब्याज के ऋण दिलवाने और बीमा योजनाओं का लाभ दिलवाने का कार्य भी सतत रूप से चल रहा है। प्रशासनिक अमला इन कार्यो पर नजर रखकर किसान वर्ग के कल्याण के लिए सक्रिय है। प्रदेश सरकार ने दशकों से लंबित पड़ीं सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करने का कार्य किया है।
प्रदेश के किसानों को ओला-बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदा की स्थिति में राहत देने और प्रधानमंत्री फसल बीमा का लाभ दिलाने के लिए शिवराज सरकार ने बजट सत्र में पारित किए गए अनुपूरक बजट में 5500 करोड़ रुपए को मंजूरी दी है। अलग-अलग मदों में यह राशि किसानों के हित से जुड़ी है जिसे कैबिनेट की मंजूरी के बाद अनुपूरक बजट से भी मंजूरी मिल गई है। सरकार द्वारा बजट में किए गए प्रावधानों के चलते पिछले कुछ दिनों में हुई ओलावृष्टि और फसल आड़ी तिरछी होने की स्थिति में किसानों का सर्वे करके राहत राशि देने का काम किया जाएगा। अनुपूरक बजट में किसानों के लिए खासतौर पर जो प्रावधान किए गए हैं, उसमें प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत अलग-अलग तीन मदों में 1415 करोड़ रुपए का प्रावधान शामिल है। इसके अलावा ट्रेक्टर और कृषि उपकरणों पर अनुदान के लिए दो मदों में 13 करोड़ मंजूर किए गए हैं। बाढ़ तथा ओला पीडि़तों को राहत अंतर्गत सहायक अनुदान के लिए 250 करोड़ और प्राकृतिक आपदा अनखर्चि मार्जिन धन निधि, अकाल राहत निधि में 1204 करोड़ व राष्ट्रीय आकस्मिक आपदा राहत निधि में 1892 करोड़ रुपए का प्रावधान मंजूर किया जा चुका है। साथ ही आरबीसी 6 (4) में आर्थिक सहायता देने के लिए 100 करोड़ रुपए तथा कीट प्रकोप में फसल क्षति योजना अंतर्गत 606 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा आपदा प्रबंधन योजनाओं को बनाने के लिए पूंजीगत मद में वृहद निर्माण के लिए 484 करोड़ के खर्च के मद्देनजर राशि का प्रावधान किया गया है। नदी जोड़ो के लिए भी इंतजाम अनुपूरक बजट में 31 मार्च के पहले किए जाने वाले खर्च के लिए नदी जोड़ो परियोजनाओं के लिए भी राशि मंजूर की गई है। इसमें नर्मदा मालवा गंभीर लिंक उद्वहन योजना के लिए 40 करोड़, कालीसिंध लिंक परियोजना के फेस 1 के लिए 100 रुपए तथा नर्मदा (आईएसपी) पार्वती लिंक योजना के लिए 150 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं।

विभीषिका में गढ़े नए प्रतिमान
मार्च 2020 में मध्यप्रदेश के चौथी बार मुख्यमंत्री बनने के बाद पिछले 11-12 माह न सिर्फ मप्र के लिए बल्कि पूरे देश और विश्व के लिए भी कुछ अर्थों में महत्वपूर्ण रहे हैं। कोरोना महामारी ने जब पैर फैलाए, तब इस संकट के समय नेतृत्व की परीक्षा भी हुई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साहस के साथ इस महामारी के आने के बाद आवश्यक फैसले लिए, उसका ही प्रतिरूप शिवराज भी बने। महामारी के नियंत्रण, संक्रमित लोगों के उपचार, महामारी से बचने के लिए उपयोगी उपायों पर अमल, भावी कार्य-योजना और मनोवैज्ञानिक रूप से नागरिकों को संबल प्रदान करके बहुत मायने रहे। मुख्यमंत्री शिवराज ने स्वयं न घबराते हुए कोरोना संकट को समाधान में बदलने का प्रयास किया। आपदा को अवसर में बदला। अनेक वर्गों के लिए सरकार का खजाना खोल दिया। कई तरह की राहत दी गईं। किसानों, विद्यार्थियों और श्रमिकों को योजनाओं का पैसा ऑनलाइन अंतरित किया गया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का संकल्प एक-एक नागरिक की जीवन रक्षा करने और लडख़ड़ाई अर्थ-व्यवस्था को संभालने का था। इसके लिए जिस मजबूत संकल्प की आवश्यकता थी, उसका परिचय शिवराज ने दिया। जहां पर्याप्त राशि की व्यवस्था नहीं थी, वहाँ उपायों पर क्रियान्वयन करते हुए रास्ता निकाला। सुशासन की सोच ने इन प्रयासों को सफल बनाया। अस्पतालों में कोरोना संक्रमित नागरिकों के उपचार के लिए बेहतर व्यवस्थाओं को सुनिश्चित किया। वैकल्पिक चिकित्सा के रूप में आयुर्वेदिक काढ़ा पूरे राज्य में वितरित किया गया। जनता को कोरोना से बचाव के प्रति जागरूक करने का कार्य भी वे एक वर्ष से निरंतर कर रहे हैं। स्वयं भी मास्क के उपयोग और सोशल डिस्टेसिंग के पालन का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। मप्र में रोग संक्रमण की नियमित समीक्षा के समय उन्होंने विभिन्न नगरों और कस्बों के मोहल्लों के नाम तक याद कर लिए थे। मप्र देश के मध्य में स्थित है। इस नाते अनेक अवसरों पर मप्र के नैतिक दायित्व बढ़ जाते हैं। मिसाल के तौर पर जब कोरोना फैलना शुरू हुआ तो अन्य राज्यों से आने वाले श्रमिक मप्र से होकर अपने गृह प्रांतों की ओर जा रहे थे। तब उनके लिए आश्रय, भोजन और परिवहन की सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए मप्र सरकार ने अच्छा कार्य कर दिखाया। मानवता की दृष्टि से इन कार्यों की सराहना भी हुई। इस कार्य की प्रतिदिन मुख्यमंत्री द्वारा समीक्षा की जाती थी। कोरोना काल में उन्होंने करीब 350 घंटे, वीडियो कॉन्फ्रेंस करते हुए कोरोना महामारी के नियंत्रण, रोगियों के उपचार और रोकथाम संबंधी प्रयासों की सतत समीक्षा में दिए। इस समीक्षा का ही असर था कि कोरोना प्रदेश में ज्यादा पांव नहीं पसार पाया। इसी अवधि में श्रमिकों को रोजगार की जरूरत थी। मनरेगा को इसका माध्यम बनाया गया। पूरे प्रदेश में बड़े पैमाने पर राहत कार्यों और अन्य निर्माण कार्यों से श्रमिकों को संलग्न किया गया। इसके फलस्वरूप पूरे देश में मप्र क्षेत्र में श्रेष्ठ कार्य करने वाला राज्य बना। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा भी मुख्यमंत्री और मध्यप्रदेश के इन प्रयासों की प्रशंसा की गई।

2022 तक हर परिवार को अपना घर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2022 तक हर सिर पर छत का जो लक्ष्य निर्धारित किया है उसमें मप्र पूरा करता दिख रहा है। खुद केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2022 तक देश के सभी आवासहीन परिवारों को मकान देने का वादा किया है और इसके लिए हमने 2.95 करोड़ आवास बनाने का लक्ष्य रखा है। मप्र इस दिशा में सबसे अच्छा काम कर रहा है। मप्र को केंद्र सरकार ने 26.28 लाख आवासों का आवंटन किया है। पूर्ववर्ती सरकार की आवास बनाने में कोई इच्छा नहीं थी, लेकिन शिवराज सिंह चौहान का दोबारा नेतृत्व मप्र को प्राप्त हुआ है और कार्यों में गति आई है। अब तक मप्र में 18.26 लाख आवास बन चुके हैं। आवास योजना के तहत 16,528 करोड़ रुपए केंद्र ने जारी किए हैं और मप्र इसका सदुपयोग कर रहा है। तोमर ने कहते हैं कि आवास योजना के तहत के पिछले इतिहास में देखे तो सप्रंग सरकार के कार्यकाल में एक साल में सिर्फ 6 लाख आवास बनते थे, लेकिन अब हमारी सरकार में 29 लाख मकान प्रतिवर्ष बनाकर गरीबों को दिए जा रहे हैं। मप्र में संप्रग शासनकाल में एक साल में औसतन 16,000 मकान बनते थे। अब आवासों का आवंटन और पैसा बढ़ा तो मप्र में एक वर्ष में 3.25 लाख मकान बन रहे हैं। मप्र देश में आवास योजना की प्रगति में देश में दूसरे नंबर पर आकर खड़ा हो गया है।

प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में अव्वल
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में मप्र को वर्ष 2020-21 में योजना क्रियान्वयन में देशभर में पहला स्थान प्राप्त हुआ है। मप्र ने योजना में 152 प्रतिशत उपलब्धि अर्जित की है। केन्द्र सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा 15 मार्च 2021 को वीडियो कान्फ्रेंस के माध्यम से समीक्षा बैठक सह क्षमता संवर्धन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में भारत सरकार की टीम द्वारा अवगत कराया गया कि मध्यप्रदेश में योजना प्रारंभ से वर्तमान तक 22 लाख 2 हजार 258 आवेदन-पत्रों पर हितग्राहियों को राशि रूपये 942 करोड़ का मातृत्व लाभ वितरण किया गया, जो राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम है। समीक्षा बैठक में योजना के सफल एवं सुचारू क्रियान्वयन के लिय आगर मालवा, छिंदवाड़ा, शहडोल, सीहोर एवं अलीराजपुर जिले को उत्कृष्ट कार्य करने वाले जिलों एवं प्रदेश द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना और राज्य की टीम को भी बधाई दी गई।
मप्र को विगत वर्ष भी योजना क्रियान्वयन में राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने पर पुरस्कृत किया गया था। भारत सरकार द्वारा एक जनवरी 2017 से प्रांरभ की गई प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना प्रदेश के समस्त जिलों में च्राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के तहत लागू की गयी है। योजना का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को मजदूरी की हानि की आंशिक क्षतिपूर्ति के रूप में नकद प्रोत्साहन प्रदान करना है, जिससे महिलाओं को प्रथम बच्चे के प्रसव के पूर्व एवं पश्चात पर्याप्त आराम मिल सके। नकद प्रोत्साहन के माध्यम से गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी व्यवहारों में सुधार लाना भी योजना का उद्देश्य है। योजना अन्तर्गत समस्त गर्भवती महिलाएं और धात्री माताएं को प्रथम जीवित जन्मे बच्चे पर निर्धारित शर्तों की पूर्ति उपरान्त प्रति हितग्राही 5 हजार रूपये तीन किस्तों में दिए जाते है। प्रथम किस्त 1000 आंगनवाड़ी केन्द्र पर गर्भावस्था का शीघ्र पंजीयन कराने पर, द्वितीय किस्त 2000 रूपये कम से कम एक प्रसव पूर्व जांच कराने एवं गर्भावस्था के 6 माह पूर्ण होने पर और तृतीय किरत 2000 रूपए बच्चे के जन्म का पंजीकरण एवं बच्चे के प्रथम चक्र का टीकाकरण पूर्ण होने पर डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके आधार लिंक्ड बैंक या पोस्ट आफिस खाते में प्रदान करने का प्रावधान है।

माफिया और अपराध मुक्त मप्र
मप्र की छवि एक शांतिप्रिय लोगों के राज्य की रही है। इस शांति में खलल पहुंचाने वाले तत्वों के विरुद्ध भी मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक अस्त्र का इस्तेमाल किया है। प्रशासनिक और पुलिस अमले द्वारा पूरे प्रदेश में बड़े अतिक्रमणकारियों, मिलावट करने वालों को मिलावट के स्रोत स्थल सहित पकड़ कर कारावास में पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है। यही नहीं बेटियों के विरुद्ध आपराधिक कृत्य को अंजाम देने वालों को कड़ी सजा देने के साफ निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए विवेचना के स्तर पर भी बिना विलंब के कार्रवाई करने की व्यवस्था बनाई गई है। मुख्यमंत्री द्वारा मप्र में आम जनता से जुड़े कार्यों को तत्परता से संपादित करने के लिए जिला स्तर पर लोक सेवा केंद्रों की प्रभावी व्यवस्था स्थापित की गई है। इन केंद्रों पर प्राप्त शिकायतों का त्वरित हल निकाला जाता है। विभिन्न तरह के प्रमाण पत्र एक ही दिन में उपलब्ध हो रहे हैं। डीम्ड सेवाओं की शुरुआत कर उनका विस्तार भी किया जा रहा है। अब किसी नागरिक को मोबाइल पर ही वांछित प्रमाण-पत्र देने की व्यवस्था प्रारंभ हो चुकी है।

सरकार के सामने चुनौतियां
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उनकी सरकार के प्रयासों के बाद भी कई क्षेत्रों में कोरोना का प्रभाव पड़ा है। विधानसभा के बजट सत्र में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, मप्र आर्थिक-सामाजिक, हर सूचकांक में पिछड़ रहा है। आर्थिक सर्वेक्षण में सरकार ने पिछले साल के मुकाबले सकल घरेलू उत्पाद में कमी का अंदेशा जताया। वित्तीय वर्ष 2019-20 की तुलना में वित्तीय वर्ष 2020-21 में इसमें 3.37 फीसदी की कमी आई है। सात साल में राज्य में पहली बार सभी की आमदनी घटी है, विकास दर भी 3.37 गिरी है। कोरोना काल में हर नागरिक की कमाई में 405 रुपये महीने की कमी आई है। सर्वेक्षण में माना गया है कि कि राज्यों को केंद्रीय करों में दी जाने वाली हिस्सेदारी को कम किया गया है, जिस वजह से राज्य की वित्तीय स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में 3.37 प्रतिशत की कमी आई है, वहीं प्रति व्यक्ति शुद्ध आय में भी 6.12 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। राजस्व प्राप्तियां भी पिछले वर्ष की तुलना में 8. 05 प्रतिशत कम हैं। वर्ष 2019-20 में राज्य का प्राथमिक घाटा 18,942 करोड़ रुपए था, जो अगले वर्ष 2020-21 में बढक़र 30,899 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। राज्य के खनन राजस्व में 15.85 प्रतिशत कमी दर्ज की गई। राज्य में साक्षरता दर 69.3 प्रतिशत है जो राष्ट्रीय औसत 73 प्रतिशत से कम है। वहीं प्रदेश में प्रति हजार शिशु मृत्यु दर 48 है, जबकि राष्ट्रीय स्तर 32 है। मातृत्व मृत्यु दर 173, राष्ट्रीय स्तर पर ये आंकड़ा 130 है। प्राकृतिक आपदाओं के कारण फसल नष्ट होने पर किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से सहायता देने के लिए 2020-21 में 799.00 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। जिसमें से 620.83 करोड़ रुपए व्यय किए जा चुके हैं। 179.17 करोड़ रुपये बांटे नहीं जा सके।

कोरोना ने मारा, मनरेगा ने संभाला
मध्य प्रदेश की आर्थिक सेहत पर कोरोना ने चौतरफा मार की है। प्रदेश में प्रति व्यक्ति सालाना आय में 4.71 फीसदी की कमी आई है। यानि हर व्यक्ति की आय में 4,870 रुपये की कमी आई है। 2019-20 में प्रति व्यक्ति आय 1 लाख 03 हजरा 288 रुपए थी, जो 2020-21 में घटकर 98 हजरा 418 हो गई। राज्य सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण में ये निराशाजनक आंकड़े सामने आए हैं। शिवराज सरकार ने 2020-21 का आर्थिक सर्वेक्षण विधानसभा में पेश किया । सर्वेक्षण के मुताबिक राज्य की जीडीपी 2020-21 में पिछले वित्तीय वर्ष 2019-20 की तुलना में 3.37 प्रतिशत कम हो गई है। सरकार को अनुमान है कि मौजूदा वित्तीय वर्ष में प्रदेश की जीडीपी 5 लाख 60 हजार 845 करोड़ रुपए रहेगी। इसी तरह 2020 की स्थिति में बेरोजगारों की संख्या 24.72 लाख हो गई। रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश की विकास दर में पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 3.9 प्रतिशत की कमी हो सकती है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग के रजिस्ट्रेशन में 2019-20 में 3.35 प्रतिशत की कमी आई है। आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग द्वारा तैयार रिपोर्ट में बताया गया है, कि मध्य प्रदेश 2004-05 से राजस्व आधिक्य प्रदेश रहा है, लेकिन अब घाटे की स्थिति है। राज्य के रोजगार कार्यालयों में शिक्षित बेरोजगारों की संख्या 2019 के अंत में 29.33 लाख थी, जो 2020 के अंत में घटकर 23.08 लाख रह गई। 2019 में 360 आवेदकों को रोजगार दिया गया था। इस साल 3,605 को रोजगार दिलाया गया। मनरेगा में 45.77 लाख परिवारों के 84.19 लाख श्रमिकों को रोजगार मिला था। इनमें 1.35 लाख परिवारों को सौ दिन का काम मिला। लॉकडाउन के दौरान 15.50 करोड़ रुपये से ज्यादा खातों में सीधे जमा करावाए गए। रेल से श्रमिकों को वापस लाने पर सात करोड़ रुपये खर्च किए। आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में बताया कि समर्थन मूल्य पर रबी और खरीफ फसलों की खरीद लगातार बढ़ रही है। 2019-20 में जहां 73.70 लाख टन गेहूं खरीदा गया था। वो बढक़र 2020-21 में 129.42 लाख टन हो गया। 15.81 लाख किसानों से ये खरीद की गई। इन किसानों को 24,806 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया। ये पिछले साल से 11, 246 करोड़ रूपए ज्यादा है।

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