अब भी प्रदेश में चालू नहीं हो सके 750 गेहूं खरीदी केन्द्र

गेहूं खरीदी केन्द्र

भोपाल/राजीव चतुर्वेदी/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश में गेहूं उपार्जन का काम शुरू हुए अब लगभग एक पखवाड़े से अधिक समय हो गया है, लेकिन अब भी करीब साढ़े सात सौ केन्द्र ऐसे हैं जहां पर खरीदी का काम शुरू ही नहीं हो सका है। यही वजह है कि प्रदेश में गेहूं खरीदी का काम तेज नहीं हो पा रहा है। हालत यह है कि अगर सरकारी आंकड़ों को देखें तो प्रदेश में शुरूआती तेरह दिनों में महज 16 लाख टन गेहूं की ही खरीदी हो सकी है।
यह हाल तब है जब प्रदेश में 90 फीसदी फसल किसानों के घरों पर पहुंच चुकी है। दरअसल इस साल प्रदेश में 4614 उपार्जन केन्द्र तय किए गए हैं। इनमें से अधिकांश केन्द्रों में भी अब तक अधिकांश रसूखदार और बड़े किसानों के गेहूं का उपार्जन किए जाने के आरोप लग रहे हैं। प्रदेश में अभी जिस गति से गेहूं की खरीदी की जा रही है, उसकी वजह से लग रहा है कि इस बार बारिस के मौसम तक ही पूरी खरीदी हो सकेगी।
इसकी वजह है इस बार प्रदेश सरकार ने बीते साल में खरीदे गए एक करोड़ 29 लाख मीट्रिक टन गेहूं की जगह इस साल उससे पांच लाख मिट्रिक टन अधिक गेहूं की खरीद का लक्ष्य तय किया जाना।  सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस बार अब तक सर्वाधिक गेहूं की खरीदी प्रदेश के मालवा अंचल में हुई है। मालवा अंचल में अब तक आठ लाख टन गेहूं का उपार्जन किया जा चुका है। सरकार का दावा है कि इस बार कोरोना संक्रमण के हिसाब से इस बार पूरी तैयारी की गई है। लॉकडाउन में किसानों को गेहूं बेचने के लिए जाने पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। हालांकि सरकारी अमले का तर्क है कि कोरोना की वजह से मजदूर नहीं मिल पा रहे हैं और किसान भी कम निकल रहे हैं।

परिवहन राशि को लेकर विवाद सुलझा
उपार्जित गेहूं के परिवहन को लेकर चल रहा विवाद अब सुलझ गया है। यही वजह है कि हाल ही में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम ने एक दर्जन जिलों में परिवहनकर्ताओं से अनुबंध कर लिया है। दरअसल विभाग और परिवहनकर्ताओं के बीच परिवहन राशि को लेकर बीते साल से विवाद चल रहा था।

सिर्फ दस फीसद किसानों का गेहूं बिका
मप्र में लगभग 24 लाख से अधिक किसानों ने गेहूं बेचने के लिए पंजीयन करा रखा है। इनमें से अब तक महज दो लाख तीन हजार से अधिक लोगों का ही गेहूं बिक सका है। अच्छी बात यह है कि इस बार अब तक खरीदे गए गेहूं का 3251 लाख रुपए का भुगतान भी किया जा चुका है। गेहूं खरीदी की सबसे खराब स्थिति अनूपपुर और सीधी जैसे जिलों में बनी हुई है। हद तो यह है कि कई जिलों में तो अब दर्जन -दो दर्जन किसानों ने ही गेहूं बेचने में रुचि ली है। 

Related Articles