मैनेजमेंट गुरु साबित हुए शिव, आत्मनिर्भर मप्र के लिए ले सकेंगे ज्यादा कर्ज

Shiva proved to be management guru, will be able to get more loan for self-reliant MP

भोपाल/राजीव चतुर्वेदी/बिच्छू डॉट कॉम। प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान वित्तीय सुशासन और प्रबंधन के मामले में मैनेजमेंट गुरु बनकर उभरे हैं। यही नहीं उनके सुधारवादी प्रयासों से मप्र की रैंकिंग बढ़ गई है। उनकी सूझ-बूझ से ही प्रदेश कोविड महामारी की आर्थिक चुनौतियों से जूझता हुआ अब दूसरे राज्यों से आगे हो गया है। विकास के चार महत्वपूर्ण क्षेत्र खाद्य, नगरीय प्रशासन, उद्योग और ऊर्जा में तेज गति से आवश्यक सुधार लाने से मध्य प्रदेश को अब अट्ठारह हजार 134 करोड़ रुपए के अतिरिक्त वित्तीय संसाधन कर्ज लेने के सहूलियत मिल गई है। दरअसल मुख्यमंत्री ने कोरोना काल में लगातार कोशिशें कर सुशासन और वित्तीय अनुशासन का पालन करते हुए मध्य प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उद्योग, ऊर्जा, खाद्य और नगरीय प्रशासन क्षेत्रों में लोगों को राहत देने वाले सुधार के साथ ही नवीनीकरण के कार्य किए हैं। देश में मध्यप्रदेश पहला राज्य है जिसने इन चारों क्षेत्रों में केंद्र सरकार की अपेक्षा के अनुरूप सुधार किए हैं। बता दें कि भारत सरकार ने पूंजीगत कार्यों के लिए सभी राज्यों के लिए दो हजार करोड़ रूपए की अतिरिक्त सहायता देने का प्रावधान किया है। इसका लाभ उन राज्यों को मिलेगा जिन्होंने यह चार महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सुधार लागू कर दिए हैं। अब मध्य प्रदेश इस प्रावधान का आसानी से लाभ उठा सकता है।
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने सभी राज्यों के लिए अपनी जीएसडीपी के दो प्रतिशत राशि के बराबर अतिरिक्त बाजार ऋण लेने की अनुमति दी है इसमें एक प्रतिशत बिना शर्त अनुमति दी है शेष एक प्रतिशत बाजार ऋण प्राप्त करने के लिए राज्यों को चार क्षेत्रों में सुधार करने की करने हैं मध्यप्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य है जिसे विकास के चार महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सुधार के कार्य कल एक प्रतिशत अतिरिक्त ऋण लेने की सुविधा मिलेगी।

कोरोना महामारी में चरमराई प्रदेश की अर्थव्यवस्था
कोरोना संक्रमण की वजह से देश और प्रदेश में आर्थिक गतिविधियां प्रभावित रही हैं। प्रदेश को केंद्र सरकार से पर्याप्त आर्थिक सहायता नहीं मिल पाई और लॉकडाउन के दौरान राज्य सरकार के टैक्स कलेक्शन में भी भारी कमीं रही। पेट्रोल-डीजल बिके नहीं। शराब की दुकानें बंद रहीं, इसके अलावा जीएसटी कलेक्शन भी काफी बड़े स्तर पर प्रभावित हुआ। हेल्थ सेक्टर में राज्य सरकार के खर्चे बढ़े और इसके उलट आमदनी घट गई। इसे देखते हुए राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से अतिरिक्त ऋण लेने की अनुमति मांगी थी, जिसे केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने सशर्त मंजूरी दी थी।

इन प्रयासों से मिली अर्थ व्यवस्था को सुधारने में मदद
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा प्रदेश में व्यापार को बढ़ावा देने औपचारिकताओं और प्रक्रियाओं को ज्यादा से ज्यादा सरल बनाने के लिए लगभग 200 से ज्यादा सिफारिशें की गई थी, उन्हें उद्योग विभाग में लागू किया है। इसके साथ ही नवीनीकरण की व्यवस्था में जबरदस्त सुधार हुआ है। साथ ही केंद्रीयकृत निरीक्षण प्रणाली की शुरूआत हुई है। नगरीय प्रशासन में भी फ्लोर रेट पर कर का निर्धारण कर अनूठी पहल की गई है। जिन शहरों में अमृत परियोजना लागू है वहां जल प्रदाय, ड्रेनेज और सीवेज संबंधी पूरी व्यवस्था में सुधार किया गया है। इनकी दरों का निर्धारण हुआ है। इसी तरह ऊर्जा क्षेत्र में उपभोक्ताओं के बैंक खातों में बिजली की सब्सिडी जा रही है। ट्रांसमिशन की हानि कम करने और बिजली प्रदाय की औसत लागत के अंतर को कम किया गया है। यही वजह है कि इन सुधारों के कारण मध्य प्रदेश को अपनी अर्थव्यवस्था को सुधारने में मदद मिली है।

सरकार को बार बार लेना पड़ा कर्ज
प्रदेश में कोरोना महामारी ने लोगों के स्वास्थ्य के साथ सरकार की आर्थिक स्थिति को भी पलीता लगा रखा है। इस ग्लोबल पैनडेमिक के बीच राज्य की सत्ता संभालने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सामने सरकारी खजाने की स्थिति को बेहतर करना सबसे बड़ी चुनौती था। जरूरी कार्य, सेवाओं और लोकहित की योजनाओं को सुचारू रखने के लिए राज्य सरकार को बार-बार कर्ज लेना पड़ रहा है।

वन नेशन वन राशन कार्ड योजना लागू
प्रदेश में खाद्य क्षेत्र में वन नेशन वन कार्ड राशन कार्ड योजना में सभी उचित मूल्य की दुकानों पर आॅटोमेशन करने और 95 प्रतिशत दुकानों का डाटाबेस तैयार कर इसे आधार कार्ड के साथ जोड़ने की महत्वपूर्ण पहल हुई है। इसके तहत लाखों हितग्राहियों को इसका योजना का लाभ मिला है जो पहले इससे वंचित रह गए थे। प्रदेश के इस सुधार कार्य की पूरे देशभर में व्यापक सराहना हुई है। दरअसल यह सभी सुधार कार्य मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के विवेक पूर्ण निर्णयों से ही संभव हो सके हैं।

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