शिव सरकार पीछे हटी, समीक्षा के लिए गठित समिति निरस्त

Shiv government backtracks, committee set up for review canceled

भोपाल (दीपेश मिश्रा /बिच्छू डॉट कॉम)। मध्य प्रदेश की सत्ता में वापसी करते ही पूर्व की कमलनाथ सरकार के निर्णयों की समीक्षा करने की जिस घोषणा के बाद लंबे समय तक सुर्खियां बटोरती रही है। अब उसी घोषणा से कदम पीछे खींच चुकी है। इस समीक्षा के लिए गठित की गई तीन सदस्यीय मंत्रिमंडल की समिति को भी अब गुपचुप तरीके से निरस्त कर दिया गया है। खास बात यह है कि इस समिति की तीन-चार बैठकें भी हो चुकी थी। इन बैठकों में विभिन्न विभागों से जुड़े निर्माण कार्यो की निविदा, कर्जमाफी सहित अन्य मुद्दों पर विचार कर जानकारियां भी तलब की गई थीं, लेकिन उन पर क्या हुआ किसी को पता नहीं। अब इस समिति का निरस्त किया जाना सभी को चौंका रहा है। दरअसल सरकार बनने के बाद उस समय मंत्रियों की बैठक में गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सामने सरकार गिरने के ठीक पहले कमल नाथ सरकार के फैसलों पर सवाल उठाए थे, जिसके बाद मुख्यमंत्री द्वारा तीन मंत्रियों की समिति का गठन कर दिया था। इसमें डॉ. मिश्रा सहित जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट और कृषि मंत्री कमल पटेल को शामिल किया था। इस समिति को 20 मार्च से छह माह पहले तक नाथ सरकार द्वारा किए गए फैसलों की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए थे। समिति ने काम शुरु करते ही विभिन्न विभागों द्वारा निर्माण कार्यो के टेंडर और कर्जमाफी को लेकर अधिकारियों से जानकारी तलब की। इस दौरान ही गृह और कृषि मंत्री ने कांग्रेस सरकार पर किसानों को कर्जमाफी के नाम पर धोखा देने के आरोप लगाए। कृषि मंत्री ने तो किसानों से यह अपील भी की कि वे तत्कालीन मुख्यमंत्री कमल नाथ के खिलाफ पुलिस थानों में एफआईआर दर्ज कराएं। इसके साथ ही वेयर हाउस स्तर पर हुई गेहूं की खरीद में गड़बड़ी के आरोप भी लगाए गए। कृषि मंत्री ने कहा कि इस मामले की जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी पर इस मामले में भी अब तक कुछ भी नहीं हुआ। अब इस पूरे मामले को राजनीतिक तौर पर देखा जा रहा है।

अलग-अलग समितियां होगीं गठित
सूत्रों की माने तो समिति के सामने जो भी नीतिगत मामले आए थे, उसकी जानकारी मुख्यमंत्री को दी जा चुकी है। अब इनसे जुड़े मामलोंं को देखने के लिए अलग-अलग मंत्रिमंडलीय समितियां गठित हो गई हैं। सामान्य प्रशासन विभाग के अफसरों का कहना है कि नई समितियों के गठन की वजह से अब इस समिति की जरूरत नहीं है, इसलिए पूर्व की एक मात्र समिति को निरस्त कर दिया गया है। इसके साथ ही आर्थिक मामलों को देखने के लिए गठित समिति भी निरस्त कर दी गई है। इसे आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ राजस्व बढ़ाने के उपाय सुझाने का जिम्मा दिया गया था। इसमें डॉ. मिश्रा के अलावा तत्कालीन खाद्य नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत और आदिम जाति कल्याण मंत्री मीना सिंह को सदस्य बनाया था।

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