देश और समाज दोनों की है फिक्र: रोहन सक्सेना

Both country and society are worried: Rohan Saxena

इंदौर जिला पंचायत सीईओ रोहन सक्सेना से पॉक्षिक बिच्छू डॉट कॉम के संयुक्त संपादक प्रणव बजाज की विशेष बातचीत…

इंदौर जिला पंचायत सीईओ रोहन सक्सेना की गिनती ऐसे अफसरों में होती है, जो परिणाममूलक होते हैं। बात चाहे देश सेवा की हो या फिर जनसेवा की, उन्होंने अपनी भूमिका अच्छे ढंग से निभाई और सबके चहते बन गए। रोहन सक्सेना स्वभाव के बहुत ही धनी व्यक्ति हैं हमेशा हर एक की मदद करते हैं और कोई भी योजना बनाते हैं तो उसे अंजाम तक पहुंचाते हैं। उनका यही कार्य लोगों को अच्छा लगता है। वह किसी में भी भेदभाव नहीं करते हैं उनका कहना है हर व्यक्ति मेरे लिए समान है। उनका मानना है कि काम ऐसा होना चाहिए, जिससे देश और समाज का भला हो सके।

बिच्छू डॉट कॉम: पंचायत स्तर पर कोरोना संकट से निपटने की क्या योजना है?
रोहन सक्सेना: पंचायत स्तर पर अभी सबसे बड़ी प्राथमिकता कोरोना का संक्रमण रोकना है। अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी कोरोना वायरस फैलना शुरू हुआ है तो इस वजह से हमारी पूरी टीम संक्रमण को गांव में पहुंचने से रोकने के प्रयास में लगी हुई है। हम लगातार काम कर रहे हैं जिसमें सभी ग्राम पंचायतों को मैंने कहा है कि बेहतर तरीके से सैनिटाइजर किया जाए और गांव में सभी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करवाया जाए। सभी लोगों को मास्क लगाने के लिए प्रेरित किया जाए। सबसे पहले इस ऐप के जरिए स्क्रीनिंग और सर्वे का काम किया गया। इसके बाद सभी आंगनवाड़ी आशा कार्यकर्ताओं के मोबाइल में ये एप डाउनलोड कर दिया गया, जिसे सीधे कंट्रोल रूम से जोड़ा गया है। शहर के सभी घरों पर जाकर करीब 35 लाख लोगों का सर्वे कर उनका डाटा इस एप में सेव हो गया। साथ ही कोविड पॉजिटिव के संपर्क में आए लोगों का डेटा इसमें दर्ज हो गया। जिससे ये साफ हो गया है कि होम क्वारेंटाइन किसे करना है। इसके जरिए इसकी बकायदा मॉनिटरिंग की गई। मोबाइल जीपीएस से ये पता चल जाता है कि जो व्यक्ति होम क्वारेंटाइन है वो और कही तो नहीं जा रहा है। उसकी लोकेशन पता लग जाती है। उसका अलर्ट रैपिड रिस्पोंस टीम तक पहुंच जाता है। होम आइसोलेशन में जिन्हें रखा गया उन्हें हर रोज चार बार डेटा अपलोड करना होता है और उन पर कंट्रोल रूम से बकायदा नजर रखी जाती है।

बिच्छू डॉट कॉम: कोरोना काल में बहुत सारे लोगों का काम बंद है, इसकी भरपाई कैसे कर रहे हैं?
रोहन सक्सेना: यह सही है कि बहुत सारे लोगों का काम बंद हो गया है। इसे ध्यान में रखते हए मनरेगा के तहत काम दिया जा रहा है। मनरेगा योजना से 15000 लोगों को काम दिया गया है। यह जिले का रिकॉर्ड है। अब तक इतनी बड़ी संख्या में रोजगार नहीं दिया गया था। इसके साथ हम वृक्षारोपण पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। गांव में जितने भी मजदूर हैं उन सभी को काम दिया गया, इससे पौधों के लिए गड्ढे खोदने का काम आसान हो गया।

बिच्छू डॉट कॉम: गांव को लेकर और क्या योजनाएं हैं?
रोहन सक्सेना: जिले में नंदन फलोद्यान की योजना भी शुरू की गई है। इसके तहत खाली पड़ी जमीनों पर फलों के वृक्ष लगाए जा रहे हैं जिससे फलों का बागान वहां पर विकसित किया जाए और वह एक लंबे समय के लिए अच्छा रिटर्न मिले। अब तक 550 हेक्टेयर में यह काम हो चुका है। प्रधानमंत्री आवास योजना में भी हमें नया लक्ष्य प्राप्त हुआ है जिसमें आवास का कार्य भी जल्द शुरू किया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्र में हमारा मुख्य फोकस जल संरक्षण को लेकर है, जिसमें स्पॉट डैम, कई तालाब बनाने हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जो महिलाएं हैं उनके समूह है। उनको हमने एक्टिव किया है और रोजगार के अवसर दिला रहे हैं। इसमें जो समूह हमने बनाया है उसमें आयुष विभाग द्वारा सैनिटाइजर बनाने का काम दिलवाया है। इसके अलावा सवा दो लाख यूनिफार्म बनाने का काम भी ग्रामीण समूह को देने जा रहे हैं और इसके अलावा भी हम और कई समूह बनाकर उनको रोजगार प्रदान करवा रहे हैं, जिसमें बैंकों द्वारा उन्हें लोन भी दिलवाया जाएगा। इसके अलावा लगभग हमारी अभी 12 गौशाला ही बनकर तैयार हो रही हैं और यह सारी गौशालाएं हम महिलाओं को ही दे रहे हैं इन्हीं के द्वारा यह गौशालाएं संचालित की जाएंगी।

बिच्छू डॉट कॉम: अब तक के कार्यकाल में सबसे अच्छा अनुभव कहां रहा?
रोहन सक्सेना: प्रोफेशनल लाइफ की शुरुआत मुरैना से हुई। 3 साल मुरैना में रहा। वहां पर मैं एसडीएम जिला प्रोटोकॉल ऑफिसर रहा। उसके बाद फिर एक साल भोपाल में गृह मंत्रालय में ओएसडी रहा। उसके बाद मैंने 4 साल एसडीएम, सिटी मजिस्ट्रेट के रूप में उज्जैन में काम किया। उस दौरान सिंहस्थ के लैंड एक्विजिशन ऑफिसर के रूप में भी कार्य किया फिर महाकाल मंदिर के प्रशासक के रूप में भी कार्य किया। सिंहस्थ में डेवलपमेंट का जो काम हुआ था उसे करने का मौका मिला। वह मेरे लिए बहुत अच्छा एक्सपीरियंस भी रहा।

बिच्छू डॉट कॉम: क्या आपने भी जीवन में संघर्ष किया, उसके बारे में बताइए?
रोहन सक्सेना: संघर्ष हर व्यक्ति के जीवन में अलग-अलग रूप में होते हैं। जब मैंने इंडियन एयर फोर्स ज्वाइन किया था, तब कुछ पारिवारिक कारणों से रिजाइन देना पड़ा। उसके बाद यूपीएससी की तैयारी कर रहा था तब इंटरव्यू के दौरान दो बार मेरा सिलेक्शन नहीं हुआ। तब मैं नर्वस हो गया था फिर उसके बाद मैंने एमपीपीएससी की तैयारी की और एमपीपीएससी में फस्र्ट टाइम में मेरा सिलेक्शन हो गया था। कहने का आशय जब भी सफलता मिलती है तो संघर्ष करके ही मिलती है।

बिच्छू डॉट कॉम: आप परियोजना, स्कीम आदि पर पंचायतों का प्रशासनिक नियंत्रण किस तरह रखते हैं?
रोहन सक्सेना: मॉनिटरिंग के जरिए नियंत्रण रखा जाता है। मैं दो तरह से मॉनिटरिंग करता हूं एक तो सोशल मीडिया व्हाट्सएप ग्रुप और दूसरा आईटी टूल्स के द्वारा। फिजिकल चेक करके और दौरे करके भी मॉनिटरिंग करता हूं। कुछ गड़बड़ी पाई जाती है तो तुरंत उस पर कार्यवाही भी करता हूं।

बिच्छू डॉट कॉम: इंदौर के आसपास ग्रामीण क्षेत्रों में कई जगह सडक़ नहीं हैं, मगर दावे खूब हैं, आपका क्या कहना है?
रोहन सक्सेना: जैसा कि मैंने बताया, रूलर जितना भी है वह अभी डेवलपमेंट फेस में है। अभी मैंने सभी पंचायतों में विलेज डेवलपमेंट प्लान बनाया है जिसमें सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। जितनी भी बेसिक रोड है उनको स्वीकृति कर दी गई है। कई जगह कार्य प्रारंभ हो चुका है। जल्द ही हालात बदले नजर आएंगे।

बिच्छू डॉट कॉम: जिला पंचायत में इस बार वर्ष 2020-21 में कितने बजट की मंजूरी है?
रोहन सक्सेना: पंचायत को उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करते हुए आर्थिक विकास एवं सामाजिक न्याय के लिए ग्राम पंचायतों को ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) तैयार करने हेतु अधिदेशित किया गया है। जीपीडीपी आयोजना प्रक्रिया व्यापक तथा भागीदारीपूर्ण प्रक्रिया पर आधारित होनी चाहिए जो संविधान की 11वीं अनुसूची में सूचीबद्ध 29 विषयों से संबंधित सभी केंद्रीय मंत्रालयों/संबद्ध विभागों की योजनाओं के साथ पूरे अभिसरण के साथ शामिल है। पंचायतों की ग्रामीण भारत के परिवर्तन में राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर प्रमुख योजनाओं के प्रभावी और कुशल कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका है। वर्ष 2020-21 के लिए जीपीडीपी तैयार करने हेतु जन योजना अभियान (पीपुल्स प्लान कैंपेन) 01 मई से 15 जून, 2020 तक चलेगा। ‘सबकी योजना, सबका विकास’ के तहत प्रारंभ अभियान पंचायती राज संस्थाओं (पीआरआई) तथा राज्यों के संबद्ध विभागों के बीच अभिसरण के माध्यम से ग्राम सभा स्तर पर योजना हेतु एक गहन संरचित कार्य होगा।

बिच्छू डॉट कॉम: इंदौर सफाई में नंबर वन है, लेकिन गांव में आज भी गंदगी है इसके लिए आप के पास क्या योजना है?
रोहन सक्सेना: हमारी टीम वर्क कर रही है और ग्रामीण क्षेत्र में भी नंबर वन बनाने की तैयारी चल रही है। व्यवस्था में सुधार करने में समय लगता है। इंदौर शहर इसलिए स्वच्छ है क्योंकि लोगों ने इसे समझा। गांव स्तर पर भी जागरूकता का संचार किया जा रहा है। जल्द ही ग्रामीण इलाके भी स्वच्छ दिखेंगे।

बिच्छू डॉट कॉम: ग्राम पंचायत सचिवों के मनमाने तबादले हो रहे हैं, क्या एक पंचायत सचिव के पास कितनी पंचायतों का प्रभार हो सकता है?
रोहन सक्सेना: तबादले तो प्रशासन की नीति से जुड़े होते हैं। तबादले प्रशासनिक व्यवस्थाओं को देखकर किए जाते हैं। दूसरा अभी सचिवों के रिक्त पदों के लिए मध्य प्रदेश शासन की ओर से नियुक्ति बंद है। जिस कारण कुछ जगह सचिव 2 ग्राम पंचायतों का प्रभाव देखते हैं। उन पर पूरी निगरानी रहती है। इसलिए गड़बड़ी की बात नहीं रह जाती।

बिच्छू डॉट कॉम: ग्राम पंचायतों में सबसे ज्यादा घोटाले होते हैं, अधिकतर निर्माण कागजों पर दिखाए जाते हैं, आपका क्या कहना है?
रोहन सक्सेना: ऐसी कई शिकायतें हमें मिलती हैं तो उनकी जांच की जाती है। जांच के दौरान अगर कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो तुरंत कार्रवाई होती है। कोई भी निर्माण कार्य जनता के पैसे से होता है, जनता के पैसे की बर्बादी करने का अधिकार किसी को नहीं है।

बिच्छू डॉट कॉम: आपकी अब तक की सफलता के पीछे किसका योगदान है?
रोहन सक्सेना: अभी हमें बहुत सारा काम करना है। सफलता हासिल करनी बाकी है। फिर भी आज मैं जहां हूं उसमें मम्मी, पापा, बहन और पत्नी का भरपूर योगदान है। जिन्होंने हर समय मेरा साथ दिया है। प्रोफेशनली मेरी पूरी टीम है जिनका सहयोग मुझे मिलता है। इन सबके साथ मिलकर सभी काम अच्छे से करने की पूरी कोशिश होती है।

बिच्छू डॉट कॉम: आप फिल्में देखते हैं? किस तरह की फिल्में पसंद हैं?
रोहन सक्सेना: फिल्में देखने का शौक है लेकिन अब काम की जिम्मेदारी के चलते ऐसा कम ही हो पाता है। फिर भी जब कभी भी समय मिलता है तो मैं फिल्में देखना पसंद करता हूं। रियल लाइफ की फिल्म देखना पसंद करता हूं।

बिच्छू डॉट कॉम: आपने अपना सफर कहां से शुरू किया, शिक्षा कहां हुई?
रोहन सक्सेना: मैंने स्कूली शिक्षा केंद्रीय विद्यालय भोपाल से पूरी की। उसके बाद मेरा सिलेक्शन इंजीनियरिंग में हो गया। 4 साल इलेक्ट्रॉनिक टेलीकम्युनिकेशन से बीटेक किया। उसके बाद चयन इंडियन एयरफोर्स में हो गया, तो मैंने इंडियन एयरफोर्स ज्वाइन किया था। यहां देश के लिए सेवा देने के बाद लौट आया और सिविल सर्विसेज की तैयारी की। यूपीएससी के लिए भी मैंने इंटरव्यू फेस किया था लेकिन सिलेक्शन नहीं हुआ। फिर एमपीपीएससी में मेरा फस्र्ट टाइम सिलेक्शन हो गया। 2007 में मुझे पहली पोस्टिंग मिली। आज दायित्व निभाते 13 साल हो गए हैं। काम के दौरान मुरैना में 3 साल, भोपाल में एक साल, उज्जैन में 4 साल रहा। उसके बाद मेरा इंदौर में ट्रांसफर हुआ। एडीशनल कमिश्नर के पद पर यहां पर भी मैंने 4 साल काम किया। उसके बाद 1 साल सीईओ जिला पंचायत बुरहानपुर और अब इंदौर सीईओ जिला पंचायत के पद पर सेवाएं दे रहा हूं।

बिच्छू डॉट कॉम: आपके जीवन का लक्ष्य क्या है?
रोहन सक्सेना: मेरा लक्ष्य एक ही है अच्छे से अच्छा कार्य करो और जिस रोल में हम काम कर रहे हैं उसमें अच्छे से अच्छा करने की सोचें और पूरी टीम के साथ मिलकर समाज की सेवा कर सकें। मैंने ऐसा करने का प्रयास किया है। जब मैं इंदौर नगर निगम में था तब स्वच्छ भारत अभियान के तहत हमने कार्य किए थे। कमिश्नर के साथ मिलकर हमने 3 सालों में स्वच्छ भारत मिशन के तहत एक मॉडल बनाया, जिससे स्वच्छता में इंदौर नंबर वन आया था और फिर लगातार तीन वर्षों तक इंदौर स्वच्छता में नंबर वन आता रहा और इंदौर का नाम पूरे भारत देश में हुआ। मेरा लक्ष्य हमेशा इसी तरह से है और अब ग्रामीण क्षेत्र को लेकर भी मेरा यही लक्ष्य है कि मैं इसी तरह का कुछ काम रूलर डेवलपमेंट में भी करूं।

बिच्छू डॉट कॉम: काम में इतने व्यस्त होने के बाद परिवार को कैसे टाइम देते हैं?
रोहन सक्सेना: मेरे मम्मी पापा भोपाल में रहते हैं तो जब भी मुझे समय मिलता है तो मैं भोपाल जाता हूं और मम्मी-पापा के साथ समय निकालता हूं। मेरी सिस्टर असिस्टेंट कमिश्नर जीएसटी भोपाल में पदस्थ हैं। वह भी बहुत बिजी रहती हैं तो जब भी हमारा भोपाल जाना होता है तब हम मिलते हैं। इंदौर में पत्नी और मेरा बेटा साथ रहते हैं। जब भी ऑफिस का काम खत्म होने के बाद समय मिलता है तो मैं बेटे और पत्नी के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताने की कोशिश करता हूं।

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