राजस्थान ने की 1200 क्यूविक पानी की कटौती, तीन जिलों की फसलों पर संकट

Rajasthan cuts 1200 cuvic water, crisis on crops of three districts

भोपाल/हृदेश धारवार/बिच्छू डॉट कॉम। चंबल नदी के पानी को लेकर मप्र और राजस्थान के बीच फिर विवाद खड़ा हो गया है। इस विवाद की वजह है राजस्थान की मनमानी। दरअसल राजस्थान ने एक बार फिर मप्र को तय कोटे से कम पानी देना शुरू कर दिया है जिसकी वजह से मप्र के तीन जिलों में फसल सिंचाई के लिए पानी का संकट खड़ा हो गया है। अब फसल तैयार होने को है, ऐसे में उसे भरपूर पानी नहीं मिला तो किसानों की पूरी मेहनत पर पानी फिर जाएगा।
राजस्थान के चंबल बैराज से मप्र को 3900 क्यूविक पानी मिलने का करार है, लेकिन राजस्थान इस करार की शर्त के मुताबिक 1200 क्यूविक कम पानी दे रहा है। मप्र को अभी सिर्फ 2700 क्यूविक ही पानी मिल पा रहा है। कम पानी मिलने की वजह से चंबल अंचल के तहत आने वाले भिंड, मुरैना और श्योपुर जिले में लगी गेंहू की फसल पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है।  यहसंकट भी इन तीन जिलों की 25 हजार हेक्टयर की फसल पर है। अगर समय रहते पर्याप्त पानी नहीं मिला तो फसल कमजोर होकर बर्बाद हो जाएगी।
इस मामले में हाल ही में पांच दिन पहले चंबल संभाग के विभागीय अफसरों की भोपाल में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट के साथ बैठक हुई थी, तब राजस्थान के सीएम से बात कर मामले का हल निकालने की बात कही गई थी, लेकिन आजतक सरकार स्तर पर बातचीत नहीं होने से पानी की मात्रा नहीं बढ़ सकी है। हालांकि मप्र के जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता आरपी झा इस मामले में 6 फरवरी को कोटा में कमिश्नर कैलाश चंद मीणा व कोटा बैराज के अधिकारियों से चंबल नहर में 3900 क्यूविक पानी छोड़ने का आग्रह कर चुके हैं, तब कमिश्नर कोटा और बैराज के एसई लखन लाल गुप्ता से 3 दिन में पानी की मात्रा वृद्धि का आश्वासन दिया था , लेकिन एक पखवाड़े बाद भी कोटा बैराज से 2700 क्यूविक पानी ही दिया जा रहा है।  
चिंता में किसान
कम मात्रा में पानी सप्लाई होने की वजह से भिंड के ऊपरी इलाके के किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है। अंबाह ब्रांच कैनाल को फुल क्षमता पर चलाने के बाद भी अटेर इलाके के किसान सिंचाई के लिए परेशान हैं। कम पानी होने की वजह से उसकी गति बेहद धीमी है, जिसकी वजह से नहर अटेर तक भरकर नहीं चल पा रही है। समय पर सिंचाई नहीं  होने से अकेले अटेर इलाके के 5500 हेक्टेयर एरिया के किसान सिंचाई को लेकर परेशान हैं।  कम पानी मिलने की वजह से श्योपुर और सबलगढ़ इलाके में पानी देने के लिए अंबाह  की लोअर मैन कैनाल व मुरैना ब्रांच कैनाल को बंद करना पड़ा।
मेंटेनेंस की रकम कर चुका है वसूल
खास बात यह है कि नहर से पानी देने के लिए कोटा प्रशासन द्वारा मध्य प्रदेश से नहर के रखरखाव के नाम पर पहले ही सवा तीन करोड़ रुपए मप्र के जल संसाधन विभाग से राजस्थान सरकार द्वारा खाते में जमा करा लिया गया है। इसके बाद भी राजस्थान सरकार मध्य प्रदेश को करार के मुताबिक पानी नहीं दे रहा है।

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