बगैर बजट के करोड़ों के स्पीड रडार खरीदने की तैयारी

Preparation to buy crores of speed radars without budget

भोपाल/मनोज विजयवर्गीय/बिच्छू डॉट कॉम। एक तरफ सरकार तमाम तरह की खरीददारी पर अंकुश लगा रही है, तो वहीं प्रदेश का पुलिस महकमा बगैर बजट के साढ़े तीन करोड़ की लागत से स्पीड रडार खरीदने की तैयारी कर चुका है। इसमें भी खास बात यह है कि इसकी खरीदी के लिए विभाग के पास बजट तक नहीं है। विभाग के तहत यह खरीदी सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए वाहनों की स्पीड पर अंकुश लगाने के नाम पर करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए पर्याप्त बजट के अभाव के बाद भी 3.5 करोड़ का टेंडर जारी कर दिया गया। अब इस मामले में टेंडर जारी करने वाली कंपनी परेशान हैं। गौरतलब है कि प्रदेश के लगभग सभी बड़े शहरों में सभी मार्गों पर वाहनों की स्पीड का पहले से ही निर्धारण है। इसके लिए मार्गों पर जगह-जगह संकेत लगे हुए हैं। वाहनों की गति पर नियंत्रण करने की जबावदेही यातायात पुलिस की होती है, लेकिन जब भी पुलिस द्वारा तेज वाहनों को रोकने का प्रयास किया जाता है तो वाहन चालक पुलिस को चकमा देकर भाग निकलते हैं। इसी वजह के बहाने बड़े शहरों में वाहनों की गति निर्धारण के लिए स्पीड बे्रकर खरीदने की योजना तैयार कर ली गई थी। इसके लिए टेंडर तक जारी कर दिए गए थे। खास बात यह है कि यह टेंडर ऐसे समय जारी कर दिए गए थे जब इस मद के लिए बजट तक का इंतजाम नहीं थे। अब इस मामले में टेंडर जारी करने वाली फर्म परेशान बनी हुई है।

इस तरह से करते हैं नियंत्रण
पुलिस कर्मचारी चौराहा या तिराहे पर मौजूद रह कर स्पीड रडार से वाहन की गति का पता करते हैं। इसके लिए वाहन को स्पीड रडार के निशाने पर लिया जाता है। इससे वाहन की स्पीड के साथ ही वाहन मालिक की पूरी जानकारी के साथ ही वाहन का नंबर भी पता चल जाता है। इस दौरान अगर वाहन चालक चकमा देकर भागता है तो पुलिस के पास उसका पूरा डाटा होने से उस पर कार्रवाई करना संभव हो जाता है। गौरतलब है कि भोपाल सहित अन्य बड़े शहरों के व्यस्ततम मार्गों पर अधिकतम 30 से 40 किमी प्रति घंटा की रफ्तार तय की गई है, लेकिन वाहन चालक तेज गति से निकलते हैं, जिसकी वजह से कई बार गंभीर हादसे होते हैं। इसी तरह से हाईवे पर भी वाहनों की गति पर स्पीड रडार से नजर रखी जा सकती है। उधर, शहरी क्षेत्रों में मिनी बसें, आॅटो, मैजिक आदि की गति निधारित करने के लिए उनमें स्पीड गवर्नर का भी उपयोग किया जाता है। यह व्यवस्था पूर्व में जारी थी, लेकिन इसमें भी बजट आड़े आ चुका है।

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