लोगों को रास नहीं आ रहा कैब से सफर करना

People do not like traveling by cab

भोपाल/गीत दीक्षित/बिच्छू डॉट कॉम। कोरोना महामारी के चलते अब तक पब्लिक ट्रांसपोर्ट भले ही शुरू नहीं हो पाया हो , लेकिन अब भी आमजन को कैब (टैक्सी) में सफर करना पसंद नही आ रहा है। यही वजह है कि अब भी शहर में 70 फीसदी कैब के पहिए थमे हुए हैं। लोगों द्वारा बेहद मजबूरी में ही कैब का उपयोग किए जाने की वजह से महज 30 फीसद कैब ही सड़कों पर चल पा रही हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक शहर में विभिन्न कंपनियों द्वारा करीब तीन हजार कैब का संचालन किया जा रहा है। इनमें से महज 800 कैब ही यात्रियों की कमी की वजह से चल पा रही हैं। पहले जहां मोबाइल एप से एक कैब को दिनभर में 16 से 18 बुकिंग आसानी से मिल जाती थीं , लेकिन अब महज 3 से 4 बुकिंग ही मिल पा रही है। दरअसल, इसकी वजह है लोगों में कोरोना की चपेट में आने का डर। यात्रियों को लगता है कि एक बार यात्रियों को बैठाने के बाद कैब कंपनियां या मालिक कैब को सैनिटाइज कराते भी हैं या नहीं। यही डर है कि लोग शहर में यात्रा करने में कैब का उपयोग करने से परहेज कर रहे हैं। कैब को यात्री नहीं मिल पाने की वजह से उसके मालिकों की आय में बुरी तरह से गिरावट आयी है। इसकी वजह से कर्ज लेकर कैब खरदने वाले कैब मालिक बीते पांच महीने से अपनी गाडिय़ों की ईएमआई तक नहीं चुका पा रहे हैं। इसके चलते कैब चालक अब तो रोजी रोटी की जुगाड़ में सब्जी व फल के ठेले तक लगाने लगे हैं।

सैनिटाइज की खानापूर्ति
कोरोना काल में कंपनियां कैब से एक बार सवारी गंतव्य स्थान पर छोड़ने के बाद कैब को सैनिटाइज करने में सिर्फ खानापूर्ति कर रही हैं। वहीं, कैब मालिक भी ध्यान नहीं दे रहे हैं। कैब में यात्रियों के लिए मास्क व सैनिटाइजर भी उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं।
एक नजर में कैब सेवा
3000 कैब शहर में हैं।
800 कैब चल पा रही हैं।
2200 कैब को सवारी नहीं मिल रही हैं।
2500 रुपये पहले एक कैब मालिक
कमा लेता था।
500 से 600 रुपये तक ही मिल पा रहे हैं।
30 फीसद कमीशन कैब मालिक को संबंधित कैब कंपनी को देना पड़ता है।


कैब सेवा क्यों तोड़ रही है दम
– कंपनियों ने कैब मालिकों से कमीशन लेना कम नहीं किया।
– सामान्य दिनों की तरह ट्रेन नहीं चलने से यात्री नहीं मिल रहे।
– बसों का संचालन कम होने से शहर के आईएसबीटी, नादरा, हलालपुर व पुतलीघर बस स्टैंड से यात्री नहीं मिल रहे।
– कैब में बार-बार यात्री बैठते हैं, इसलिए कोरोना फैलने का डर लोगों में बना रहता है।
– कैब में महिलाओं की सुरक्षा के पैनिक बटन की व्यवस्था नहीं।

कैब से यात्रा करने वाले बाहर के लोग ज्यादा होते थे। पहले सभी ट्रेन व बसें चल रही थीं। ऐसे में कैब की बुकिंग खूब होती थी। 100 फीसद कैब संचालित होती थीं। कोरोना के कारण लोग कैब में बैठना पसंद नहीं कर रहे हैं। जल्द ही किराया बढ़ाने की मांग करेंगे।

  • सादिक अली, अध्यक्ष टैक्सी चालक व मालिक कल्याण वर्कर्स एसोसिएशन

कोरोना काल में गाड़िय़ों का संचालन कम हुआ है। यदि कैब कंपनी व मालिक कोरोना से बचाव के लिए तय गाइडलाइन का पालन नहीं कर रहे हैं तो जल्द ही चेकिंग अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।

  • संजय तिवारी, आरटीओ

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