अब अगर होगी वृद्धि तो दो साल पुराने बजट बराबर हो सकता है नया बजट

Now if there is an increase, then the new budget can be equal to the two-year old budget

भोपाल/राकेश व्यास/बिच्छू डॉट कॉम। कोराना महामारी के चलते प्रदेश में सर्वाधिक संकट स्वास्थ्य और आर्थिक क्षेत्र पर आया है। इसका असर राज्य के बजट पर भी पड़ा है। यही वजह है कि इस वित्त वर्ष के बजट में सरकार को 28208 करोड़ रुपए से अधिक की कटौती करनी पड़ी थी। अभी कोरोना पर काबू नहीं हो पाने से यह तय है कि अगले वित्त वर्ष का बजट भी कोराना संकट के बीच ही आना है। अच्छी बात यह है कि अब प्रदेश में आर्थिक रफ्तार को अर्थव्यवस्था ने पकड़ लिया है। इसके चलते इस बजट में राशि का प्रावधन बीते दो साल पहले के स्तर पर आना संभव हो गया है। बजट में होने वाली वृद्धि को लेकर अभी से वित्त विभाग में मंथन का दौर शुरू हो गया है। हालांकि बजट के आकार को पुन: हासिल करना बड़ी चुनौती माना जा रहा है। गौरतलब है कि इस वित्त वर्ष के लिए पूर्व की कांग्रेस की नाथ सरकार में लगभग दो लाख 40 हजार करोड़ रुपए का बजट तैयार किया गया था। इस बजट का आकार बीते साल की तुलना में करीब 9 हजार करोड़ रुपए अधिक था। सामान्य स्थिति में बजट में लगभग 15 फीसदी तक की वृद्धि की जाती है, लेकिन इस बजट में इतनी वृद्धि नहीं की गई थी। वे इस बजट को पेश कर पाते इसके पहले ही प्रदेश में राजनीतिक और आर्थिक मोर्चे पर हालात बेहद खराब हो गए। इसके चलते नाथ सरकार 20 मार्च को गिर गई। इसके साथ ही प्रदेश में कोरोना का संक्रमण शुरू हो गया और देश के साथ प्रदेश में भी 25 मार्च के बाद से लॉकडाउन लागू कर दिया गया , जिससे व्यावसायिक और औद्योगिक गतिविधियां पूरी तरह से बंद हो गर्इं। इससे प्रदेश में बेहद खराब हालात हो गए , जिसकी वजह से उससे निपटने की चुनौती खड़ी हो गई। इसका असर इस साल के बजट पर भी पड़ा है।

बार-बार कम करना पड़ा आय का अनुमान
बीते साल की अवधि के लिए सरकार ने पूर्व में करों से होने वाली आय का अनुमान एक लाख 79 करोड़ 353 करोड़ रुपए लगाया था , जिसे बाद में कम कर एक लाख 48 हजार 561 करोड़ 30 लाख रुपए कर दिया गया था। इसी के चलते मौजूदा वित्त वर्ष में भी करों से होने वाली आय का अनुमान कम कर एक लाख 36 हजार 596 करोड़ रुपए कर दिया गया। इस तरह से राज्य को सभी तरह से होने वाली आय में 42 हजार 757 करोड़ 39 लाख रुपए की कमी का अनुमान लगाया गया है। इस अवधि में राज्य सरकार को मिलने वाले राज्य कर में ही 16 हजार 472 करोड़ 6 9 लाख रुपए की कमी हो गई। इसी तरह केंद्रीय करों में राज्य को मिलने वाला हिस्सा भी 17 हजार 725 करोड़ 81 लाख रुपए तक कम हो गया। जिसकी वजह से केंद्र और राज्य के करों से होने वाली आय में ही लगभग 34 हजार 198 करोड़ 5 लाख रुपए की कटौती हो गई है। यह राज्य सरकार की आमदनी का सबसे बड़ा जरिया है। पहले केंद्र और राज्य सरकार को होने वाली आय में लगभग 26 हजार करोड़ रुपए की ही कमी संभावित है। इसका असर अधिकांश विभागों के बजट पर पड़ा है। यही वजह है कि अधिकांश विभागों के बजट में 10 से लेकर 60 फीसदी तक की कटौती करनी पड़ी है। इसके चलते ही कई योजनाओं के मद में केवल सांकेतिक बजट का प्रावधान किया गया तो कुछ को बजट की कमी के चलते बंद ही कर दिया गया। इसी तरह अन्य योजनाओं के लिए राशि के प्रावधान में बड़ी कटौती की गई।

विभागों से मांगे जाएंगे प्रस्ताव
वित्त विभाग इस वित्त वर्ष के अनुपूरक बजट के लिए विभागों से प्रस्ताव मांगने की तैयारी में है। इस संबंध में शीघ्र ही विभागों को औपचारिक पत्र जारी किया जाएगा। जिसमें विभागों को निर्देशित किया जाएगा कि उन्हें किस तरह से बजट प्रस्ताव तैयार करना है और अधिकतम कितने प्रतिशत तक योजनाओं के बजट में इजाफा या कमी करना है। इस बीच प्रदेश में राजस्व संग्रहण की ताजा स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री वित्त सहित अन्य राजस्व वसूली से जुड़े विभागों के अफसरों से फीडबैक लेंगे। इसके बाद अनुपूरक और फिर वर्ष 2021-22 के प्रस्तावित बजट आंकड़ो पर भी चर्चा करेंगे।

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