नाथ जुटे छवि बदलने के प्रयासों में, बढ़ा रहे हैं मेलजोल

In the efforts to change Nath's converged image, social gatherings are increasing

प्रदेश में नगरीय निकाय चुनावों की  चुनौती के पहले बदला स्वभाव
भोपाल/हृदेश धारवार/बिच्छू डॉट कॉम।
कमलनाथ प्रदेश के ऐसे पहले मुख्यमंत्री रहे हैं , जो कार्यकर्ता और आम आदमी तो ठीक अपने ही मंत्रियों और विधायकों से नहीं मिलते थे। इस तरह के आरोप उन पर सरकार के मुखिया रहते उनके ही लोग खुलकर लगाते रहते थे। सरकार गई तो प्रदेशाध्यक्ष व नेता प्रतिपक्ष रहते भी वे अधिकांश समय मप्र की जगह दिल्ली में ही गुजारते हैं। इसकी वजह से न केवल वे विपक्ष के निशाने पर रहते हैं , बल्कि पार्टी के ही नेता व कार्यकर्ता भी परेशान रहते हैं। अब प्रदेश में नगरीय निकाय चुनावों की आहट मिल रही है , ऐसे में उनके सामने बड़ी चुनौती इसमें पार्टी की जीत की है। यही वजह है कि अब नाथ ने अपनी छवि बदलने की कवायद शुरू कर दी है। इसकी वजह से अब नाथ ने अपने घर के दरवाजे नेताओं के साथ ही पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए खोल दिए हैं। यही नहीं अब उनके द्वारा लगातार पार्टी विधायकों के साथ बैठकेंभी की जा रही हैं। इसके साथ ही उन्होंने कार्यकर्तओं से भी नजदीकी बढ़ानी शुरू कर दी है। गौरतलब है कि उनकी कार्य प्रणाली से नाराज होकर पहले श्रीमंत और उनके समर्थक विधायकों ने पार्टी छोड़ दी थी, लेकिन इसके बाद भी यह सिलसिला नही थमा और बाद में कई अन्य विधायकों ने एक-एक कर पार्टी को अलविदा  कह दिया था।
जनता व संगठन में बढ़ाई जा रही है पैठ
सत्ता जाने के सदमें से उबरने के बाद अब विपक्षी दल कांग्रेस के कई नेता एक बार फिर अपनी सियासी जमावट की तैयारियों में लग गए हैं। यह वे नेता है जिन्होंने पार्टी की 15 महीने की सरकार में जनता व कार्यकर्ताओं से दूरी बना ली थी। इसे कांग्रेस में बदल रहे राजनीतिक हालातों से जोड़कर देखा जा रहा है। यही वजह है कि अब प्रदेश के दिग्गज नेताओं को जनता और संगठन दोनों में अपनी पैठ बढ़ाते हुए देखा जा सकता है।
ई -मेल से मिलेगा समय
कमलनाथ मेल मुलाकात न करने वाली अपनी छवि में बदलाव के लिए पूरी तरह से तैयारी कर चुके हैं। यही वजह है कि उनके द्वारा अब साफ कर दिया गया है कि कार्यकर्ता से लेकर मीडिया के लोग तक उनसे निवास पर आकर मुलाकात कर सकते हैं। इसके लिए उनके द्वारा मुलाकात का समय तय करने के लिए एक ईमेल सुविधा भी शुरू की गई है। मुलाकात के लिए ईमेल कर कमलनाथ से समय तय कर सकता है।
अरुण यादव बना रहे किसान नेता की छवि
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष अरुण यादव ने अपनी छवि किसान नेता के रुप में बनाने की शुरूआत कर दी है। यह पूरी कवायद उनके द्वारा पार्टी में अपनी अहमियत बढ़ाने के लिए की जा रही है। यही वजह है कि वे इसकी शुरूआत भी वे सिरोंज, नसरूल्लागंज और मंदसौर में ट्रेक्टर पर बैठकर किसान आंदोलन की अगुवाई करने के साथ कर चुके हैं। गौरतलब है कि उनके पिता सुभाष यादव की प्रदेश में एक बड़े किसान नेता के रुप में रही है। यादव यह अच्छी तरह से जानते हैं कि किसानों के जरिए वे प्रदेश की सियासत पर मजबूत पकड़ बना सकते हैं। यदि इस पकड़ को बनाने में सफल रहे तो उन्हें पार्टी फिर से बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है। उधर पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह भी कह चुके हैं कि अरुण यादव को प्रदेश में किसानों का नेतृत्व करना चाहिए।

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