पानी संरक्षण में मप्र अब सिर्फ राजस्थान से पीछे

MP now behind only Rajasthan in water conservation

भोपाल/राकेश व्यास/बिच्छू डॉट कॉम। मप्र सरकार द्वारा लगातार किए जा रहे प्रयासों की बदौलत अब मप्र ने देश के कई राज्यों को पानी संरक्षण के मामलों में पीछे छोड़ दिया है। अब इस मामले में मप्र से आगे महज राजस्थान ही रह गया है। वह दिन दूर नहीं जब इसी गति से काम करने की वजह से मप्र राजस्थान को भी पीछे छोड़ सकता है। दरअसल ग्रामीण अंचलों में भू-जल स्तर बढ़ाने के लिए नदी पुनर्जीवन और वाटरशेड मिशन के तहत बड़े पैमाने पर प्रदेश में चेक डेम, स्टाप डेम बनाने का काम किया जा रहा है। इस पर अब तक प्रदेश में 315 करोड़ 62 लाख रुपए खर्च किए जा चुके हैं, जबकि इस काम में पहले स्थान पर मौजूद राजस्थान में 345 करोड़ 90 लाख रुपए खर्च किए गए हैं। मप्र द्वारा खर्च की गई इस साल की रकम बीते साल की तुलना में 141 करोड़ 31 लाख रुपए अधिक है। इस काम में बीते साल प्रदेश में 174 करोड़ 31 लाख रुपए खर्च किए गए थे। फिलहाल प्रदेश की शिव सरकार द्वारा चालीस नदियों को पुनर्जीवित करने का काम किया जा रहा है। खास बात यह है कि खंडवा में किए गए कामों को लेकर तो मध्यप्रदेश को नदी पुनर्जीवन में देश में पहले स्थान पर रहने का पुरस्कार भी मिल चुका है। वाटरशेड मिशन के कामों में मध्यप्रदेश नदियों, जलस्रोतों को पुनर्जीवित करने में लगा है। इसके लिए जलस्रोतों की सफाई करने और जलस्तर वृद्धि के लिए जगह-जगह चेक डैम, स्टाप डेम तो बनाए ही जा रहे हैं साथ ही नदियों की गाद मिट्टी हटाने का काम भी किया जा रहा है।

पुराने कामों को पूरा करने में भी मारी बाजी  
चालू वित्त वर्ष 20-21 के लिए वाटरशेड मिशन में मप्र को केन्द्र सरकार द्वारा 84 करोड़ 90 लाख रुपए आवंटित किए गए है। इसमें राज्य की हिस्सेदारी 56 करोड़ 60 लाख रुपए की है। इसकी वजह से इस साल कुल फंड 141 करोड़ 50 लाख रुपए रहा है लेकिन, राज्य सरकार द्वारा अब तक प्रदेश में इस तरह के कामों पर  कुल 315 करोड़ 62 लाख रुपए खर्च किए गए है। खास बात यह है कि इस साल पुराने लंबित कामों को भी तेजी से पूरा किया गया है। मप्र की तुलना में इस साल इन कामों के लिए राजस्थान को केन्द्र सरकार से 449 करोड़ 90 लाख रुपए आवंटित किए गए थे। राजस्थान ने 299 करोड़ 93 लाख रुपए की हिस्सेदारी की है , जिसकी वजह से उसका बजट इस साल कुल 749 करोड़ 83 लाख रुपए हो गया था। इसमें से उसके द्वारा 350 करोड़ 90 लाख रुपए के काम राजस्थान में किए गए हैं। अगर बजट की तुलना में खर्च की गई रकम के आंकड़े को देखें तो इस मामले में मप्र पहले स्थान पर है।

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