मप्र में लागू होगा आदर्श किराएदारी अधिनियम

Model tenancy act will be applicable in MP

भोपाल/अनिरुद्ध सोनोने/बिच्छू डॉट कॉम। केन्द्र सरकार द्वारा लागू किए जा रहे आदर्श किराएदारी अधिनियम के बाद मकान मालिक और किराएदार के बीच किराएदारी पर विवाद होने पर उसके जल्द निराकरण के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई की जाएगी। इस अधिनियम को लागे करने में दो तरह के प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत प्रदेश में या तो वह इस अधिनियाम को पूरी तरह से लागू करना होगा या फिर इस अधिनियम के आधार पर किराया कानून को प्रभावी करना होगा। किराएदारी को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने आदर्श किराएदारी अधिनियम का प्रारूप तैयार किया है, जिसमें फास्ट ट्रैक अर्ध न्यायिक तंत्र विकसित करने का प्रावधान किया गया है , जिससे दोनों पक्षों के बीच विवादों का जल्द निराकरण किया जा सके।

परिसर किराए पर देने के लिए करार जरुरी
नए अधिनियम में किए गए प्रावधान के तहत इसके प्रभावी होने के बाद परस्पर शर्तों के आधार पर लिखित रूप से करार करना आवश्यक होगा। यह अधिनियम रिहायशी ओर व्यवसायिक किराएदारों पर शहरों के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में भी प्रभावी होगा। जिसमें किराया भू-स्वामी तथा किराएदार के बीच किए गए पारस्परिक करार द्वारा तय किया जाएगा। यही नहीं इसके लिए आमदनी का कोई बंधन नहीं रखा गया है, जिसकी वजह से यह सभी पर लागू होगा। किराएदारी की बकाया अवधि के लिए किराएदारी करार की शर्तें भू स्वामी के उत्तराधिकारियों के साथ-साथ किराएदार पर भी बाध्यकारी होंगी। प्रावधान के मुताबिक भू-स्वामी और किराएदार के बीच अनुपूरक करार किए बिना उप अवधि के समाप्त होते समय किसी क्षेत्र में जहां किराए के परिसर स्थित हैं, अनिवार्य बाध्यता की स्थिति हो तो भू स्वामी अनिवार्य बाध्यता की समाप्ति के एक महीने बाद तक किराएदार को परिसर में मौजूदा किराया करार शर्तों के अनुसार ही रहने की अनुमति होगी। व्यावसायिक किरएदारी के मामलों में प्राय: पगड़ी के नाम पर मोटी रकम किराएदारों से ली जाती है। यह राशि मकान मालिक और किराएदार के बीच समझौते से तय होती है, लेकिन नया अधिनियम प्रभावी होने से आवासीय परिसर के लिए सुरक्षा जमा राशि जमा दो महीने के किराए से अधिक नहीं होगा।

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