इंदौर और छिंदवाड़ा में बनेंगे जेल कॉम्प्लेक्स, जिसमें होंगी विशेष सुविधाएं

Jail complexes to be built in Indore and Chhindwara, which will have special facilities

-प्रदेश की जेलों में क्षमता से ज्यादा और ठसाठस भरे कैदियों और बंदियों  को मिलेगी राहत


भोपाल/प्रणव बजाज/बिच्छू डॉट कॉम।

प्रदेश में जेलों की स्थिति ठीक नहीं है। ठसाठस भरे कैदियों से जेलों की हालत यह है कि अन्य जेलों में इन्हें रखा जा रहा है। बहरहाल इस समस्या से जल्द राहत मिलने वाली है। प्रदेश में पांच हजार से अधिक कैदी-बंदियों के लिए तीन जिलों में नई जेल बनकर तैयार हो रही रही हैं। बढ़ते अपराधों को ध्यान में रखते हुए जहां इंदौर में केंद्रीय जेल का निर्माण कार्य चल रहा है। वहीं छिंदवाड़ा में एक ऐसा जेल परिसर बनाया जा रहा जिसमें सेंट्रल जेल, जिला जेल और ओपन जेल एक ही काम्प्लेक्स में हैं। यह प्रदेश का अपने तरह का पहला ऐसा परिसर होगा। उल्लेखनीय है कि छिंदवाड़ा जिले के शिकारपुर में लगभग 90 एकड़ जमीन जेल कॉम्प्लेक्स के लिए आवंटित की गई थी जिस पर लोक निर्माण विभाग द्वारा निर्माण कराया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो साल के अंत तक इसका काम पूरा हो जाने की उम्मीद है। पिछली कांग्रेस की नाथ सरकार ने इस जेल कॉम्प्लेक्स के लिए 224 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया था।
हजारों कैदियों की क्षमता वाले परिसर में होगी सख्त सुरक्षा
छिंदवाड़ा के नव निर्मित जेल कॉम्प्लेक्स में हजारों कैदियों की सुरक्षा भी सख्त होगी। यहां की सेंट्रल जेल में एक हजार कैदी, जिला जेल में सात सौ कैदी और ओपन जेल में 20 से ज्यादा बंदी और उनके परिजन रहेंगे। खास बात यह है कि तीनों जेल भवन एक ही परिसर में होंगे। यही नहीं जेल के भीतर ही अस्पताल, आॅडिटोरियम, किचन, खेल मैदान भी रहेंगे। जेल की बाउंड्री भी डबल रखी गई है। जिससे इसमें सेंध लगा पाना संभव नहीं होगा। दीवारों की ऊंचाई छह मीटर रखी गई है।
इसमें इलेक्ट्रिक फेंसिंग, सीसीटीवी कैमरे, अंडा सेल हाई-सिक्योरिटी बैरक और जैमर आदि लगाए जायेंगे। बंदियों की पेशी के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग हॉल बनाया जाएगा। परिसर में स्टाफ के लिए 300 क्वार्टर बनाए जाएंगे जेल परिसर बनने के बाद इस जेल में सालों पुरानी नेशनल हाईवे पर बनी सेंट्रल जेल में बंद कैदियों और बंदियों को शिफ्ट करने के बाद उक्त जेल की जमीन को सरेंडर कर दिया जाएगा। इन दोनों जेलों में करीब 17 सौ बंदी और कैदी रखे जाएंगे। वर्तमान जेल में बंद कैदी और बंदियों के अलावा आसपास की जिला जेलों में आजीवन कारावास की सजा से दंडित कैदियों को केंद्रीय जेल में शिफ्ट कर दिया जाएगा।
इंदौर केंद्रीय जेल की यह है खासियत
इंदौर में सांवेर रोड पर एक और सेंट्रल जेल बनाई जा रही है। उल्लेखनीय है कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद मालवा एवं निमाड़ क्षेत्र में किसी भी केंद्रीय जेल भवन का निर्माण नहीं किया गया है। इंदौर शहर में वर्तमान में एक केंद्रीय और एक जिला जेल है। जिनमें अधिकृत आवास क्षमता 1650 कैदियों को रखने की है। जबकि दोनों जिलों में तीन हजार कैदी-बंदी भरे हुए हैं।  चूंकि इंदौर शहर जनसंख्या के आधार पर प्रदेश का सबसे बड़ा शहर है तथा अपराधों की दृष्टि से भी यह शहर प्रदेश में पहले स्थान पर है। वर्तमान में इंदौर के सांवेर रोड पर नवीन केंद्रीय जेल बनाने का काम निमार्णाधीन है। जेल भवन निर्माण पर 200 करोड़ रुपए का व्यय अनुमानित है, जिसके प्रथम चरण में साठ करोड़ रुपये मिलेंगे। करीब 51 एकड़ जमीन पर जेल भवन बनाए जाना है। प्रथम चरण का निर्माण कार्य चल रहा है। बता दें, कि इस जेल के बनने के बाद इंदौर की केंद्रीय तथा जिला जेल में वर्तमान ओवर क्राउड से राहत मिलेगी। वर्ष 2002 में हाउसिंग बोर्ड ने इसके निर्माण का काम हाथ में लिया था लेकिन कुछ काम करने के बाद ही राज्य शासन ने इस जेल भवन निर्माण का काम लोक निर्माण विभाग को सौंप दिया था।  तीन मंजिला जेल भवन और कैदियों की बैरक ऐसी बनाई जाएगी कि सड़क से नजर नहीं आएंगी। बंदियों की गोपनीयता और सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जाएंगी। जेल की मजबूत चहारदीवारी को 6 मीटर ऊंचा बनाया जाएगा। पहले चरण में कैदियों की बैरक, महिला कारागार, अस्पताल, अनाज गोदाम, झूला घर, स्कूल, रिसेप्शन बैरक, ट्रेनिंग सेंटर, एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लॉक और मल्टीपरपज हॉल का निर्माण प्रस्तावित है। आधुनिकता से लैस इस पूरे परिसर के लिए एक दर्जन से ज्यादा टावर बनाए जाएंगे। यही नहीं इसका कंट्रोल रूम भी अलग बनाया जाएगा। जहां से सीसीटीवी कैमरा के माध्यम से पूरी व्यवस्था की निगरानी रखी जाएगी। सीसीटीवी कैमरे, इलेक्ट्रिक फेंसिंग, अंडा सेल, हाई सिक्योरिटी और जैमर भी लगाए जाएंगे। पेशी के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग हॉल बनाया जाएगा। सांवेर रोड पर पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन द्वारा जेल की बाहरी दीवार प्रशासकीय भवन गार्डरूम एवं 21 आवास निर्मित किए गए हैं।
इस तरह कैदियों का क्राउड होगा कम
प्रदेश की इन तीनों जेलों में करीब पांच हजार चार सौ से ज्यादा कैदी और बंदियों को शिफ्ट किए जाने से काफी हद तक जेलों में ओवर क्राउड कम हो जाएगा। वर्तमान में 131 जेलों में 46 हजार से ज्यादा बंदी और कैदी रह रहे हैं, जबकि जेलों में 29 हजार बंदी-कैदियों को रखने की क्षमता है। भिंड जिले में उप जेल को ही जिला जेल में तब्दील किया जा रहा है। जिसका भवन निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। फिलहाल दूसरी जेलों के सजायाफ्ता कैदियों को इस जेल में शिफ्ट किया जाएगा। प्रशासन द्वारा इस जेल भवन की जल्द ही शुरूआत करने की तैयारी है।

Related Articles