सरकार ने औद्योगिक स्थापनाओं में श्रमिकों को दिए अधिकार

श्रमिकों

भोपाल/राजीव चतुर्वेदी/बिच्छू डॉट कॉम। प्रदेश सरकार ने मध्य प्रदेश औद्योगिक संबंध नियम 2020 जारी कर दिए हैं। इसके तहत जहां औद्योगिक स्थापनाओं में कार्यरत श्रमिकों को सुरक्षा के अधिकार दिए गए हैं वहीं नियोक्ताओं को छंटनी करने के अधिकार पर कुछ बंदिशें लगाई गई हैं। यानी अब कोई भी प्रतिष्ठान कभी भी श्रमिकों की छंटनी नहीं कर सकेगा। यही नहीं अब औद्योगिक स्थापना में कामबंदी के लिए नियोक्ता को राज्य सरकार अथवा प्राधिकृत अधिकारी से अनुमति लेना होगी। यदि किसी औद्योगिक प्रतिष्ठान में श्रमिकों की छंटनी के लिए नए प्रावधान तय किए गए तो फिर इसी तरह छंटनी किए गए श्रमिकों को फिर से काम पर लेने के लिए भी नियम बनाए गए हैं। छंटनी करने से पहले नियोक्ता को राज्य सरकार के साथ ही श्रमायुक्त और केंद्र सरकार को भी सूचित करना होगा। उसके बाद ही प्रतिष्ठान छंटनी की प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकेगा।

श्रमिकों को भर्तियों में ऐसे मिलेगी वरीयता
प्रदेश में हाल ही में जारी किए गए नए औद्योगिक संबंध नियम -2020  के अंतर्गत अब यदि किसी औद्योगिक स्थापना में श्रमिकों के लिए रिक्तियां उपलब्ध होती हैं तो उस रिक्ति को भरने के लिए प्रस्ताव से पहले एक वर्ष की अवधि के भीतर छंटनी किए गए संबंधित औद्योगिक स्थापना के कामगार मौजूद हों तो संबंधित औद्योगिक स्थापना को नियोजक राज्य के छंटनी किए गए कामगारों को प्राथमिकता देना होगी। इसके लिए ऐसे छंटनी किए गए कामगारों को पंजीकृत डाक, स्पीड पोस्ट के द्वारा तथा ईमेल के माध्यम से कम से कम 10 दिन पहले श्रम आयुक्त की कंसेंट  की प्रति के साथ अवसर उपलब्ध कराए जाने का प्रस्ताव करना होगा। यदि वे कामगार नियोजन के लिए अपनी रजामंदी देते हैं तो नियोजक इस रिक्ति को भरने के लिए अन्य व्यक्तियों पर उन्हें वरीयता देगा। उल्लेखनीय है कि ऐसे औद्योगिक प्रतिष्ठान जहां पूर्व में छंटनी की गई हो वहां नई भर्तियों में उन श्रमिकों को वरीयता दी जाएगी जिनको पहले छंटनी के नाम पर हटा दिया गया है। हालांकि इसमें विशेष यह भी है कि इस संबंध में औद्योगिक प्रतिष्ठान की ही जिम्मेदारी होगी कि वह नई भर्तियों के संबंध में छंटनी किए गए श्रमिकों को सूचित करे। यदि छंटनी किए गए श्रमिक फिर से काम करने की सहमति देते हैं तो फिर औद्योगिक प्रतिष्ठान के लिए यह जरूरी होगा कि भर्तियों में छंटनी किए गए कर्मचारियों को वह प्राथमिकता दे।

प्राधिकृत अधिकारी जानेंगे कामबंदी का कारण
नए नियमों के तहत प्राधिकृत अधिकारी प्रतिष्ठान में जाकर कामबंदी का विधिवत कारण जानेंगे। उसके बाद ही कामबंदी के लिए अनुमति दी जाएगी। यानी अब ऐसा नहीं होगा कि औद्योगिक संस्थान कभी भी काम बंद कर देंगे और अपना कारोबार समेट लेंगे। अब नियोक्ता श्रमिकों के भविष्य को अनिश्चय के भंवर में छोड़कर कभी भी ऐसा नहीं कर सकेंगे। राज्य सरकार ने नए नियमों में प्रावधान किया है कि यदि कोई औद्योगिक प्रतिष्ठान अपना कामबंदी करना ही चाहते हैं तो उससे पहले उन्हें राज्य सरकार को लिखित में इस बात का प्रस्ताव देना होगा। साथ ही यह बताना होगा कि वह कामबंदी क्यों करना चाहते हैं। कामबंदी के संबंध में उन्हें सिलसिलेवार कारणों का जिक्र करना होगा। कारणों का उल्लेख करते हुए कामबंदी करने का आग्रह प्राधिकृत अधिकारी से किया जाएगा। साथ ही आवेदन की एक प्रति सुलह अधिकारी को भी देना होगी। औद्योगिक स्थापना  के नियोक्ता द्वारा कामबंदी का आवेदन करने पर राज्य सरकार या उसके द्वारा नियुक्त प्राधिकृत अधिकारी 30 दिन के भीतर इस संबंध में निर्णय ले सकेंगे। यदि वे आवेदक के तर्क से सहमत नहीं होंगे तो कामबंदी के निर्णय की समीक्षा कर सकते हैं। यही नहीं तर्कों से संतुष्ट नहीं होने पर प्राधिकृत अधिकारी अनुमति देने से इन्कार भी कर सकते हैं।

राज्य सरकार को सूचित करना होगा
राज्य सरकार द्वारा मप्र औद्योगिक संबंध नियम 2020 के अंतर्गत जो नियम औद्योगिक स्थापना बंद करने के लिए तय किए गए हैं उसमें अब औद्योगिक अधिनियम के अंतर्गत उद्योग स्थापना को बंद करने के लिए नियोजक प्रस्ताव रखता है तो वह बंदी से पहले इस संबंध में राज्य सरकार को नोटिस देगा। विधिवत नोटिस देने के बाद इस संबंध में श्रम आयुक्त और सुलह अधिकारी को भी सूचित करेगा।

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