कांग्रेस में डैमेज अनकंट्रोल

Damage control uncontrolled in Congress

अब तक 24 विधायक पाला बदल चुके हैं, कई कतार में….

मजरूह सुल्तानपुरी का यह शेर-मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंजिल मगर, लोग साथ आते गए और कारवां बनता गया, मप्र की राजनीति में सटीक साबित हो रहा है। कांग्रेस से ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भाजपा का रूख क्या किया, उनके पीछे कांग्रेसियों की कतार लग गई है। अब तक 24 कांग्रेसी विधायक इस्तीफा देकर भगवाधारी हो चुके हैं और कई अन्य कतार में हैं। कांग्रेस डैमेट कंट्रोल का जितना प्रयास कर रही है वह उतना अनकंट्रोल होता जा रहा है।

विनोद कुमार उपाध्याय/बिच्छू डॉट कॉम
भोपाल (डीएनएन)।
चुनाव आयोग ने मप्र की 26 विधानसभा सीटों सहित देशभर की 45 सीटों पर सितंबर में उपचुनाव कराने की तैयारी शुरू कर दी है। लेकिन मप्र में कांग्रेस के विधायक जिस तरह भाजपा की ओर आकर्षित हो रहे हैं, उससे सीटों का आंकड़ा और बढऩे की संभावना है। भाजपा सूत्रों की मानें तो मप्र में संभवत: 30 से 35 सीटों पर उपचुनाव हो सकते हैं। यानी कांग्रेस के 4 से 9 और विधायक अपनी विधायकी छोडक़र भाजपा में आ सकते हैं। मप्र के राजनीतिक इतिहास में यह पहला अवसर है जब किसी एक राजनीतिक दल के विधायकों ने इतनी बड़ी संख्या में अपनी पार्टी नेतृत्व के प्रति अविश्वास दिखाया है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थन में 22 विधायकों द्वारा कांग्रेस छोडऩे के बाद से शुरु हुई भगदड़ थमने का नाम नहीं ले रही है। अर्थात उपचुनाव से पहले मप्र की राजनीति में उथल-पुथल का सिलसिला जारी है। हाल ही में दो कांग्रेसी बड़ामलहरा विधायक प्रद्युम्र सिंह लोधी और नेपानगर विधायक सुनीता देवी कासेडकर ने अपनी विधायकी छोडक़र भाजपा का दामन थाम लिया है। वहीं भाजपा नेताओं का दावा है कि उपचुनाव से पहले अभी कई और कांग्रेसी विधायक हैं जो भाजपा में शामिल होने की इच्छा रखते हैं।
अब तक 24 ने थामा भाजपा का दामन: इस साल होली के दौरान कांग्रेस में शुरू हुई भगदड़ इस कदर जारी है कि अब तक 24 कांग्रेस विधायक भाजपा की सदस्यता ले चुके हैं। होली के दौरान पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके साथ 22 विधायकों ने बगावत करके कांग्रेस से इस्तीफे दे दिया था और कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ गई और गिर गई थी। इसके बाद भाजपा ने सरकार बना ली थी। अब जुलाई में प्रद्युम्र सिंह लोधी और सुमित्रा देवी कासेडकर के पार्टी छोडऩे के बाद मप्र में कांग्रेस विधायकों की संख्या 90 रह गई है। वहीं भाजपा विधायकों की संख्या 107 है, अब 24 की जगह 26 सीटों पर उपचुनाव होंगे। यही चुनाव तय करेंगे कि कांग्रेस मप्र में वापसी करेगी या फिर भाजपा सरकार बचाने में कामयाब होगी। वहीं कई और कांग्रेस विधायकों के भाजपा में संपर्क में होने की खबरें प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में चल रही हैं। अब कुछ दिन से प्रदेश की राजनीति में ये हलचल है कि कांग्रेस के कई विधायक बड़ा झटका दे सकते हैं। इनके भाजपा में शामिल होने का दावा किया जा रहा है।
उधर मप्र और राजस्थान में राजनीतिक उठापटक के माहौल के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक केपी सिंह की प्रदेश के गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की मुलाकात ने प्रदेश की राजनीति में सरगर्मी बढ़ा दी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व शिवपुरी की पिछोर सीट से विधायक केपी सिंह ने 20 जुलाई को गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच करीब आधे घंटे की चर्चा हुई। इस मुलाकात के सोशल मीडिया पर वायरल होते ही कांग्रेस और भाजपा नेताओं के बीच कई तरह की चर्चाएं होने लगीं। हालांकि सिंह ने कहा कि उनकी मुलाकात का कोई राजनीतिक उद्देश्य नहीं था बल्कि वे अपने क्षेत्र के विकास के लिए डॉ. मिश्रा से मिलने गए थे। वे सरकार में हैं और हमारे क्षेत्र के हैं तो उनसे अपने क्षेत्र के कामों के बारे में बताने गया था। सिंह ने कहा कि उनकी कांग्रेस संगठन से कोई नाराजगी नहीं है।

दो विधायक जाते-जाते बचे
गत दिनों कांग्रेस के दो और विधायक भाजपा में जाते-जाते बचे। सूत्रों का कहना है कि विगत दिनों कांग्रेस के दो विधायकों के इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल होने की खबर आने से सियासी गलियारों में हलचल मची रही। बाद में खबर आई कि कांग्रेस आलाकमान के निर्देश पर दोनों नाराज विधायकों को मना लिया गया है। इसके पीछे की कहानी यह बताई जा रही है कि 14 जुलाई को कांग्रेस को दो विधायक पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ से मिलने उनके आवास पर पहुंचे, लेकिन वहां उनकी कमलनाथ से कहासुनी हुई। जिसके बाद राजधानी के राजनीतिक गलियारों में कांग्रेस विधायक राहुल लोधी और तरवर लोधी के भाजपा में शामिल होने की खबरों ने जोर पकड़ लिया। दो विधायकों के भाजपा में जाने की खबरों की जानकारी मिलते ही कांग्रेस में खलबली मच गई। दिल्ली से कांग्रेस के प्रभारी महासचिव मुकुल वासनिक ने तुरत-फुरत कमलनाथ से चर्चाकर विधायकों को भाजपा में जाने से रोकने को कहा। जिसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने दोनों विधायकों से बात कर डैमेज कंट्रोल की कवायद शुरु की। जिसके लिए पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति और पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा को जिम्मेदारी दी गई। करीब तीन घण्टे से अधिक समय तक दोनों नाराज विधायकों को मनाने का क्रम चला और अंत में दोनों विधायकों को मीडिया के सामने लाकर बयान दिलाया गया कि वह कांग्रेस नही छोड़ रहे हैं।

हाथ छोड़ सकते है और 10 विधायक….
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री ऐदल सिंह कंषाना और भाजपा नेताओं की मानें तो कांग्रेस के कम से कम 10 और विधायक उपचुनाव से पहले भाजपा में आ सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो निश्चित रूप से यह कांग्रेस के लिए जोर का झटका लगने वाली बात हो जाएगी। बताया जाता है कि भाजपा के रणनीतिकार 30 से 35 सीटों पर उपचुनाव के लिए रणनीति बनाने में जुट गए हैं। गौरतलब है कि प्रदेश में पहले 2 विधानसभा सीटों जौरा और आगर में विधायकों के निधन के बाद उपचुनाव होने थे। इसी दौरान 22 कांग्रेसी विधायकों ने त्यागपत्र देकर भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। इस कारण 24 सीटों पर उपचुनाव की तैयारी हो गई है। लेकिन इसी बीच बड़ामलहरा के कांग्रेसी विधायक प्रद्युम्र सिंह लोधी और नपानगर विधायक सुनीता देवी कासेडकर भी भाजपा में शामिल हो गई और अपनी विधायकी से इस्तीफा दे दिया। इस तरह अभी तक 26 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होना है। भाजपा सूत्रों का कहना है कि पार्टी जिन 10 विधायकों को भाजपा में लाने की तैयारी कर रही है, उनमें से 7 विधायक पहले से ही संपर्क में हैं। ये विधायक मंत्रिमंडल गठन और विभागों के बंटवारे का इंतजार कर रहे थे। सूत्रों का कहना है कि यह भी एक वजह है कि कांग्रेस छोडक़र आए 14 पूर्व विधायकों को मंत्री बनाया गया है और कईयों को महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी दी गई है। भाजपा सूत्रों का कहना है कि जिन कांग्रेसी विधायकों को भाजपा में लाने की कोशिश चल रही है उनमें से अधिकांश मालवा और निमाड़ क्षेत्र के हैं। वहीं कुछ विधायक मध्यभारत के भी संपर्क में हैं। ये वे विधायक हैं जिनका सिंधिया से दूर तक का नाता नहीं है। सूत्र बताते हैं कि संघ के कुछ पदाधिकारियों के साथ ही भाजपा के नेता इस अभियान को पूरा करने में जुटे हुए हैं। वहीं संघ के एक सूत्र का कहना है कि मंत्रिमंडल विस्तार से लेकर विभागों के बंटवारे तक में जिस तरह ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके समर्थकों ने भाजपा पर दबाव बनाया है, उससे पार्टी आलाकमान चिंतित है। इसलिए पार्टी के रणनीतिकार इस कोशिश में लगे हुए हैं कि कम से कम 10 कांग्रेसी विधायकों को किसी तरह भाजपा में शामिल किया जाए। इसके लिए विधायकों के साथ समझौते पर चर्चा हो रही है। प्रद्युम्र सिंह लोधी और सुनीता देवी कासेडकर का भाजपा में आना भी इसी रणनीति का एक हिस्सा है। यही नहीं भाजपा ने कांग्रेसी विधायकों को अपनी पार्टी ने आकर्षित करने के लिए हाल ही में कांग्रेस से आए प्रद्युम्र सिंह लोधी को नागरिक आपूर्ति निगम का अध्यक्ष बनाने के साथ ही निर्दलीय विधायक प्रदीप जायसवाल को खनिज निगम का अध्यक्ष बनाकर कैबिनेट मंत्री का दर्जा दे दिया है। इससे यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि जो भी कांग्रेस का विधायक भाजपा में शामिल होगा, उसे उचित पद और प्रतिष्ठा मिलेगी।

आलाकमान के निशाने पर कमलनाथ
मप्र कांग्रेस के मुखिया कमलनाथ ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस को अलविदा कहने के बाद भले इस बात का दावा कर रहे हैं कि किसी के पार्टी छोडऩे से कांग्रेस को कोई फर्क नही पड़ रहा है। लेकिन खुद कमलनाथ द्वारा प्रदेश के पार्टी जिलों अध्यक्षों को लिखी गई एक चिी ने न केवल उनके इस दावे की पोल खोल दी है, बल्कि उनकी घबराहट को भी उजागर कर दिया है। दरअसल पिछले दिनों जिस तरह कांग्रेस नेताओं का पार्टी से पलायन शुरु हुआ है, उसके बाद से प्रदेश कांग्रेस मुखिया कमलनाथ पर आलाकमान का दबाव बढ़ गया है कि किसी भी सूरत में इस पलायन को रोकें। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव और प्रदेश प्रभारी मुकुल वासनिक ने भी भोपाल प्रवास के दौरान इस बात को लेकर प्रदेश के सभी विधायकों और जिलाध्यक्षों की क्लास लेते हुए अपने-अपने जिलों में पलायन को रोकने की बात कही थी। इसके बाद कमलनाथ की चिी सामने आने पर यह बात प्रमाणित हो गई है कि कांग्रेस में सिंधिया के बढ़ रहे प्रभाव को लेकर घबराहट है। प्रदेश कांग्रेस मुखिया कमलनाथ ने एक चि_ी लिखी है जिसमें प्रदेश के सभी जिलों में कांग्रेस जिला अध्यक्ष को हिदायत दी गई है कि जो कांग्रेस कार्यकर्ता सिंधिया या भाजपा के साथ जा सकते हैं, उनसे सिंधिया के विरोध में बयान जारी कराएं, यदि यह कार्यकर्ता बयान जारी करने से मना करें, तो तत्काल इनके खिलाफ पार्टी से निष्कासन की कार्यवाही करें।

वादा करो हमेशा कांग्रेस में ही रहोगे
सब कुछ लुटा के होश में आए तो क्या हुआ। यही हाल मप्र में कांग्रेस का है। 22 विधायकों के टूटने के कारण सरकार जाने के बाद भी कांग्रेस का नेतृत्व नहीं जागा। इसका परिणाम यह हुआ कि दो और विधायक टूट गए। 24 विधायकों के टूटने के बाद कांग्रेस का नेतृत्व कुछ हद तक संभला है और कांग्रेस पार्टी के विधायकों की भाजपा-दौड़ रोकने के लिए प्रयास शुरू कर दिया है। दरअसल प्रदेश में कुछ दिनों में विधानसभा उपचुनाव भी हैं। ऐसे में कांग्रेस ने अपने विधायकों को पार्टी में बनाए रखने की कवायद शुरू कर दी है। प्रदेश कांग्रेस प्रमुख और पूर्व सीएम कमलनाथ ने पार्टी विधायकों को शपथ दिलवाई है कि वादा करो हमेशा कांग्रेस पार्टी में ही रहोगे। पीसीसी चीफ कमलनाथ ने विधायकों से कहा अब कोई भी पार्टी से नहीं टूटेगा। पूरी शिद्दत से कांग्रेस सरकार की वापसी में एकजुटता से सारे विधायक जुटेंगे। सभी को कांग्रेस को मजबूत करने की दिशा में काम करना होगा। अपने चीफ के कहे अनुसार सभी विधायकों ने हाथ ऊपर कर कांग्रेस में रहने की शपथ ली है। गौरतलब है कि उपचुनाव से पहले कांग्रेस खेमे के विधायक पाला बदल रहे हैं। हाल ही में कांग्रेस छोडक़र प्रद्युम्न लोधी और सुमित्रा देवी कासेडकर ने भाजपा की सदस्यता ली है। विधायकों के कांग्रेस छोड़ भाजपा में जाने के बाद कांग्रेस अब डैमेज कंट्रोल करने में जुटी हुई है। यही वजह है कि पूर्व सीएम कमलनाथ ने कांग्रेस विधायकों की बैठक बुलाई। इसमें विधायकों की मन की थाह लेने की कोशिश की गई। पूर्व सीएम कमलनाथ ने विधायकों से वन-टू-वन चर्चा भी की। पूर्व सीएम ने विधायकों से कहा कि भाजपा के छलावे में मत आना। भाजपा के पद और पैसे के लालच में किसी को नहीं आना चाहिए। कांग्रेस विधायकों से संपर्क करने वाले सभी भाजपा नेताओं के नाम उजागर करेगी। पूर्व सीएम कमलनाथ ने कहा- मेरा उद्देश्य सिर्फ कांग्रेस पार्टी को मजबूत करना है। इसीलिए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद फैसला किया कि मैं आप लोगों के बीच रहूंगा और जनता के बीच भाजपा सरकार के धोखे को पहुंचाया जाएगा। छिंदवाड़ा तक नहीं गया और 24 विधानसभा सीटों के उपचुनाव की रूपरेखा बनाना शुरू कर दिया। कमलनाथ ने सभी विधायकों से कहा कि आप सभी हौसला बनाए रखें। कांग्रेस ने 1977 का दौर भी देखा। उसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे, उनको हराकर सोनिया गांधी ने धमाकेदार वापसी की थी। कांग्रेस विधायकों को निराश नहीं होना है, बल्कि जीत के लिए मजबूती से आगे बढऩा है।

पलायन रोकने खोला नियुक्तियों का पिटारा
सिंधिया के भाजपा में आने से कांग्रेस में शुरु हुए पलायन के दौर को थामने के लिए कमलनाथ ने प्रदेश पदाधिकारियों से लेकर जिला स्तर और ब्लॉक के स्तर तक नियुक्तियों का पिटारा खुल गया है। प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से हर दिन 50 से 100 नियुक्तियों के आदेश जारी हो रहे हैं। सबसे ज्यादा नियुक्तियां उपचुनाव वाले जिलों में हो रही हैं। ग्वालियर-चंबल इलाके में सिंधिया के समर्थन में पाला बदलकर भाजपा में जा रहे नेताओं को रोकने की कवायद में जुटी कांग्रेस ताबड़तोड़ नियुक्तियां कर कांग्रेस का कुनबा बढ़ाने में जुटी हुई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी में पहली बार सबसे ज्यादा पदाधिकारियों की नियुक्ति के आदेश जारी हो रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस कमेटी में ही अब तक 35 से ज्यादा सचिव, सहसचिव और महामंत्री पद के नियुक्ति के आदेश जारी हो चुके हैं। ग्वालियर-चंबल इलाके में ही जिला संगठन को मजबूत बनाने के लिए 500 से ज्यादा नियुक्तियां हो चुकी है। 200 से ज्यादा पदाधिकारियों की नियुक्तियां अकेले ग्वालियर-चम्बल के भिण्ड जिले और ग्वालियर में चार जिला कार्यकारी अध्यक्षों की नियुक्ति की गई है। मध्यप्रदेश कांग्रेस में भी कार्यकारी अध्यक्षों की नियुक्ति बढ़ाने की तैयारी है। अभी तक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर कमलनाथ के साथ चार कार्यकारी अध्यक्ष काम कर रहे हैं, जिसमें रामनिवास रावत, बाला बच्चन, जीतू पटवारी और सुरेंद्र चौधरी शामिल हैं, लेकिन उपचुनाव के मद्देनजर इस संख्या को बढ़ाने की कवायद तेज हो गई है। उपचुनाव में भाजपा को संगठन के मुकाबले टक्कर देने के लिए कांग्रेस पार्टी में नियुक्तियों के जरिए कार्यकर्ताओं को खुश करने में जुटी हुई है। सिर्फ इतना ही नहीं कमलनाथ के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद हाशिए पर गए अरुण यादव के समर्थकों को भी अब प्रदेश कांग्रेस में पदाधिकारी नियुक्त किया जा रहा है।

कांग्रेस तलाशेगी भाजपा की लोकप्रियता का पैमाना
प्रदेश में उपचुनाव में उम्मीदवार चयन को लेकर कमलनाथ के आवास पर लगभग हर दूसरे दिन मंथन बैठक हो रही है। विगत दिनों यह निर्णय लिया गया कि अब कांग्रेस यह पता करेगी कि प्रदेश की जिन सीटों पर उपचुनाव होना है वहां भाजपा की लोकप्रियता का पैमाना क्या है। बैठक में विधानसभावार कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से अभिमत लिया गया। इसके अलावा पार्टी नेताओं का पलायन रोकने, संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने, स्थानीय, जातीय, क्षेत्रीय समीकरणों, संभावित उम्मीदवारों और चुनावी मुद्दों पर चर्चा की गई। कमलनाथ ने सभी मौजूद जिला अध्यक्षों और पूर्व विधायकों से कहा पार्टी के लिए यह संक्रमण का समय है, इस समय आपसी मतभेद भुलाकर केवल और केवल पार्टी के लिए संगठित होने की जरुरत है। भूल जाएं कि आप किस गुट या नेता के साथ हैं। इस समय केवल कांग्रेस है और पार्टी जिस उम्मीदवार को भी चुनावी रण में उतारे उसके साथ खड़े होकर कांग्रेस की जीत सुनिश्चित करने के लिए काम करना है। उपचुनाव वाले जिलों के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के साथ मंथन में उपचुनाव के मद्देनजर संगठन को मजबूत करने और जो संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने पर जोर दिया गया। साथ ही उपचुनाव वाले क्षेत्रों में नियुक्त किए गए प्रभारियों को प्रशिक्षित करने के काम में तेजी लाने की बात कही गई।
कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि कमलनाथ ने पार्टी जिला अध्यक्षों और पूर्व विधायकों से कहा कि पिछले 3 महीने से हम उपचुनाव वाले इलाकों में कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों के जरिए अभिमत ले रहे हैं और माहौल का पता लगा रहे हैं। जितनी महत्वपूर्ण जानकारी की जरूरत होती है और जो सबसे बेहतर सर्वे होता है, वो पार्टी कार्यकर्ताओं का ही होता है। उन्होंने कहा कि 26 सीटों पर भाजपा के उम्मीदवार लगभग तय हैं। जिन्होंने कांग्रेस के साथ गद्दारी करके हमारी सरकार गिराई है, भाजपा उन्हें आश्वासन दे चुकी है कि उन्हें उम्मीदवार बनाएगी, ज्यादातर उन्हीं लोगों को मंत्रिमंडल में भी शामिल किया गया है। इसलिए इन लोगों को हराना हमारा नैतिक कर्तव्य भी है।

उपचुनाव से पहले कमजोर पड़ रही कांग्रेस
कांग्रेस के एक पदाधिकारी कहते हैं कि कांग्रेस लगातार कमजोर पड़ती जा रही है। इसका प्रभाव उपचुनाव वाले क्षेत्रों नेपानगर, बड़ामलहरा, डबरा, बदवावर, भांडेर, बमौरी, मेहगांव, गोहद, सुरखी, ग्वालियर, मुरैना, दिमनी, ग्वालियर पूर्व, करेरा, हाटपिपल्या, सुमावली, अनूपपुर, सांची, अशोकनगर, पोहरी, अंबाह, सांवेर, मुंगावली, सुवासरा, जौरा, आगर-मालवा में भी देखा जा रहा है। ऐसे में पार्टी के लिए आगे की राह कांटों भरी है। वहीं, कांग्रेस पार्टी में विधायकों के दल बदल करने पर अब पार्टी नेताओं की भूमिका पर सवाल उठना तेज हो गया है। पूर्व मंत्री उमंग सिंगार ने एक ट्वीट के जरिए पार्टी के अंदर सियासी हलचल को तेज कर दिया है। सिंगार ने लिखा है कि आज का वक्त खुद को नेता बनाने का नहीं बल्कि पार्टी और संगठन को मजबूत करने का है। उमंग ने पार्टी में राजशाही और सामंत शाही के हावी होने की भी बात कही है। उमंग सिंगार ने कहा है जिस तरह आज ज्योतिरादित्य सिंधिया और सचिन पायलट जैसे नेता जो महत्वाकांक्षा रखते है और पार्टी संगठन को दूसरे पायदान पर रखते हैं। उन लोगों से मेरा यही कहना है कि आपको पार्टी ने नेता बनाया था, आप नेता नहीं थे। हालांकि, माना जा रहा है कि उमंग सिंगार का इशारा प्रदेश के बड़े नेता दिग्विजय सिंह और राष्ट्रीय स्तर के नेताओं की तरफ था। वही, उमंग सिंगार के बयान के समर्थन में पूर्व मंत्री डॉ. गोविंद सिंह भी आ गए हैं।
डॉ. गोविंद सिंह ने कहा है की भाजपा कांग्रेस विधायकों के लिए चारागाह बन गई है। संपत्ति बनाने के लिए नेता राजनीति में आ रहे हैं। जन सेवा के लिए नहीं। डॉ. गोविंद सिंह ने विधायकों के जाने को संगठन की कमजोरी बताया है। कांग्रेस विधायक के मुताबिक जिला स्तर पर कांग्रेस का संगठन बेहद कमजोर है और इस पर पार्टी को ध्यान देने की जरूरत है। पार्टी में कोई कमी जरूर है तभी विधायक दल बदल कर दूसरी पार्टी में जाने का काम कर रहे हैं। डॉ. गोविंद सिंह ने पार्टी नेताओं को इस बात की सलाह दी है कि भाईचारा और व्यवहार के जरिए विधायकों को रोकने के लिए कदम उठाना चाहिए। साथ ही डॉ. गोविंद सिंह ने कांग्रेस पार्टी को लेट करने के लिए राहुल गांधी के नाम पर कहा है कि पार्टी में अब जरूरत सामूहिक नेतृत्व की है जिसके जरिए पार्टी को दोबारा खड़ा किया जा सके।

नेतृत्व पर उठ रहे सवाल
वही, कांग्रेस के अंदर कमजोर संगठन पर पार्टी नेतृत्व को लेकर उठ रहे सवालों के बीच कांग्रेस छोडक़र भाजपा में शामिल हुए कैबिनेट मिनिस्टर प्रभु राम चौधरी ने कहा है कि कांग्रेस पार्टी को इस समय आत्म अवलोकन करने की जरूरत है। पार्टी को इस बारे में विचार करना चाहिए कि आखिर कौन से कारण हैं जिनकी वजह से कांग्रेस के नेता पार्टी छोडक़र बीजेपी में शामिल हो रहे हैं। बहरहाल, कांग्रेस की कमजोरी का फायदा भाजपा को मिल रहा है। जिस तरीके से भाजपा के नेता दावा कर रहे हैं कि कुछ और कांग्रेस विधायक पार्टी छोडक़र भाजपा में शामिल हो सकते हैं इसके बाद कांग्रेस के अंदर कमजोर संगठन को लेकर सवाल उठना तेज हो गए हैं। वहीं उपचुनाव में फिलहाल कांग्रेस में फ्री-ऑल जैसी स्थिति बन गई है। जिन विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव होने हैं, वहां कई संभावित उम्मीदवार घूम रहे हैं। कुछ तो ऐसे हैं जिनका टिकट की दौड़ में दूर-दूर तक कोई नाम नहीं है, लेकिन लोगों से संपर्क बराबर कर रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि टिकट उनका ही फाइनल होगा। प्रदेश नेतृत्व ने उन्हें क्षेत्र में संपर्क करने के लिए हरी झंडी दे दी है। कांग्रेसियों ने अलग-अलग दुकान सजाकर धरने-प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। इस कारण कार्यकर्ता व क्षेत्र के लोग भी गफलत में हैं। लोग पूछने लगे हैं कि कांग्रेस चुनाव में कितने लोगों को टिकट देगी। लेकिन कांग्रेस के नीतिधारकों कहना है कि टिकट मांगने का सभी को अधिकार है। लेकिन टिकट का फैसला सर्वे के आधार पर होगा। सर्वे कौन व कहां कर रहा है? इस सवाल का जवाब किसी नेता के पास नहीं है।

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