कोरोना अटैक से लिवर, स्ट्रोक व मेमोरी लॉस की बढ़ी समस्या

Corona attack increased problem of liver, stroke and memory loss

भोपाल/रवि खरे/बिच्छू डॉट कॉम। देश के साथ ही प्रदेश में कोरोना संक्रमण एक बार फिर अपने उग्र रूप में फैलता जा रहा है। देखते ही देखते वायरस की चपेट में आने वालों की संख्या बढ़ती गई। प्रदेश में कोरोना वायरस की आक्रामकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रोजाना हजारों की संख्या में मरीज पॉजिटिव मिल रहे हैं। तेज बुखार, सूखी खांसी, गले में सूजन, थकावट और सांस में तकलीफ कोरोना वायरस के प्रमुख लक्षण हैं। कोविड-19 के मरीजों में हाल ही में कन्फ्यूजन, लॉस ऑफ स्मैल, व्यावहारिक बदलाव जैसे कुछ न्यूरोलॉजिकल लक्षण भी देखने को मिले हैं। वायरस की चपेट में आए अस्पताल में दाखिल कुछ मरीजों की मानसिक स्थिति पर इसका बुरा असर पड़ा है।
निशाने पर हैं खराब लिवर वाले
एक अध्ययन के मुताबिक खराब लीवर की समस्या वाले लोगों में कोरोना संक्रमण का खतरा सर्वाधिक था। संक्रमण के बाद इन मरीजों का लीवर पूरी तरह खराब हो गया। पहले से लिवर इंजरी का इलाज करा रहे लोग भी आसानी से कोरोना की चपेट में आ गए। 15 मार्च से 15 जून के बीच अस्पताल के कोविड वार्ड में 170 कोरोना संक्रमित मरीज हुए थे। जांच में पता चला है कि इनमें से 152 मरीजों के लीवर फंक्शन में पहले ही खामी थी। इन मरीजों पर अध्ययन में पाया गया कि 58 फीसद मरीजों में लीवर फंक्शन खराब पाया गया। वहीं 43 फीसद मरीजों में लीवर इंजरी पाई गई। यानी इन मरीजों का पहले से ही लीवर इंजरी का इलाज चल रहा था। ऐसे मरीज आसानी से कोरोना की चपेट में आ गए।
इम्यून सिस्टम और साइकोलॉजिकल इफेक्ट
नॉवेल कोरोना वायरस से लड़ने पर बॉडी इम्यून सिस्टम पर भी इसका असर पड़ता है। इनफ्लेमेटरी रिस्पॉन्स के दौरान ‘मलाडैप्टिव’ के प्रोड्यूस होने से बीमारी में शरीर के ऊतक और अंग डैमेज होते हैं। कोविड-19 का शिकार होने पर कई तरह के साइकोलॉजिकल चेंजेस देखने को मिले हैं। तेज बुखार से लेकर शरीर के विभिन्न अंगों में आॅक्सीजन की कमी ब्रेन डिसफंक्शन की वजह बनी है। कोविड-19 के कई मामलों में मरीज का बेहोश होना या कोमा में चले जाने का खतरा भी देखा गया है। कोरोना मरीज में ब्लड क्लॉटिंग भी सामान्य लोगों की तुलना में ज्यादा देखी गई है। दरअसल इंसान के फेफड़ों और शरीर की गहरी नसों में हो सकते हैं, जिससे रक्त प्रवाह बंद हो सकता है। यदि ब्लड क्लॉट दिमाग तक जाने वाली धमनियों का रास्ता बंद कर दे तो स्ट्रोक की समस्या हो सकती है।
वर्क फ्राम होम के भी दिखने लगे प्रभाव
कोरोना संक्रमण के चलते आजकल व्यावसायिक लोग घर से काम करने और छात्र आॅनलाइन क्लास में पढ़ने को विवश हैं। इस दौरान वह घंटों लगातार ईयरफोन का इस्तेमाल करते हैं। इसलिए डॉक्टरों का कहना है कि ईयर फोन के अत्यधिक इस्तेमाल के चलते ही अब कान में दर्द, खिंचाव और संक्रमण की शिकायतों वाले अधिक मरीज मिल रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि पिछले 7 से 8 महीनों से घंटों हेडफोन और इयरपॉड के अत्यधिक इस्तेमाल से लोगों के कानों में दर्द, जलन और सूजन जैसी शिकायतें बढ़ गई हैं।

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