वित्त आयोग की अनुशंसाओं के आधार पर ही खर्च होगा पांच साल तक बजट

Budget will be spent for five years only on the basis of recommendations of Finance Commission

भोपाल/राजीव चतुर्वेदी/बिच्छू डॉट कॉम। प्रदेश में अगले पांच सालों तक बजट को 15वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं के आधर पर ही खर्च किया जाएगा। प्रदेश में यह अनुशंसाएं इसी साल से लागू कर दी गई हैं, जो अगले पांच सालों तक 2025 तक प्रभावी रहेंगी। इसके साथ ही वित्त आयोग से मिलने वाली अनुदान राशि को भी त्रिस्तरीय पंचायतों के माध्यम से ही वितरित किया जाएगा।
इस राशि में से सर्वाधिक 85 फीसदी राशि खर्च करने का अधिकार ग्राम पंचायतों को रहेगा, जबकि शेष राशि में से जनपद पंचायत को 10 और जिला पंचायत को 5 प्रतिशत राशि खर्च करने का अधिकार होगा। इसके लिए पंचायतों में होने वाले विकास कार्यों के लिए डिस्ट्रिक्ट प्लानिंग कमेटी (डीपीसी) का गठन कर उसकी अनुशंसा पर ही सभी तरह के निर्माण कार्य किए जाएंगे। इस कमेटी का गठन जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में होगा।
इस समिति में अन्य सदस्यों के रुप में जिला पंचायत सीईओ, जिला पंचायत एवं नगरीय निकायों के प्राधिकृत अधिकारी व अन्य अधिकारी शामिल किये जाएंगे। कमेटी जिले की त्रिस्तरीय पंचायतों व नगरीय निकायों द्वारा तैयार प्लान से इंटिग्रेटेड कंसोलिडेटेड प्लान तैयार कर अनुमोदन करेगी जो डिस्ट्रिक्ट डेवेलपमेंट प्लान के नाम से जाना जाएगा। इसके लिए हर साल प्राथमिकता के आधार पर कामों का चयन कर साल भर की योजना बनाई जायेगी। इस योजना के सभी कामों की जानकारी को केन्द्र के पंचायती राज के ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर अपलोड की जाएगी।

इस तरह से बनेगी कार्ययोजना
सबकी योजना सबका विकास अभियान के अनुरूप ग्राम पंचायत का विकास प्लान तैयार होगा। इसके लिए ग्राम सभा का आयोजन किया जाएगा। अधिक लागत वाले कामों को जनपद और जिला पंचायात के प्लान में शामिल कर प्रस्ताव भेजा जायेगा। इसी तरह से जिस काम का प्रभाव क्षेत्र दो या दो से अधिक ग्राम पंचायतों पर आना है उसकी कार्य योजना जनपद पंचायत को भेजी जायेगी, जिसे जनपद पंचायत अपनी कार्य योजना में शामिल करने का फैसला करेगा। इसी तरह से जिला पंचायत द्वारा विकास पर कार्यशाला कर जिला पंचायत का प्लान तैयार किया जायेगा। 15वें वित्त आयोग अनुदान के तहत कुल प्राप्त राशि का न्यूनतम 50 प्रतिशत, कार्य योजना में खर्च किया जायेगा। जल जीवन मिशन के कार्यों को प्राथमिकता पर पूर्ण करना, स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण, के तहत सामुदायिक स्वच्छता परिसर निर्माण किया जायेगा। 15वें वित्त आयोग की अनुशंसा अनुसार किसी भी प्रकार का स्थापना खर्च, वेतन, मानदेय भुगतान, टेंट किराया, सांस्कृतिक कार्यक्रम पर राशि इस मद से खर्च नहीं की जा सकेगी।

Related Articles